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____________________________________पत्रकारिता के जनसरोकार

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प्रिंट पत्रकारिता

April 5, 2013

कैसे होता है प्रकाशन

संतोष कुमार गंगेले प्रिंट पत्रकारिता का तात्पर्य मशीन से छपने बाले अखबारो से है । यदि हम सीधे तौर पर पत्रकारिता के बारे में चर्चा करेगें तो सह उचित नही होगा, पत्रकारिता समाचारों का आदान-प्रदान है, इतिहासकारों से जानकारियां संग्रहित की है उसी के आधार पर हम आप नया इतिहास बनाने का प्रयास जारी रखते है ।

भारतीय संस्कृति के संवाहक देवर्षि नारद जी के माध्यम से देववाणी जो मानव कल्याण के लिए थी का  संवाद जन जन तक पहुँचाने का कार्य किया करते थें। उसके वाद भगवान श्री राम जी के भक्त श्री हनुमान जी जन संचार के नायक थें । महाभारत में संजय की दिव्य दृष्टि जिन्हेाने कुरूक्षेत्र का आँखों देखा हाल धृतराष्ट्र का बताते -सुनाते रहे । मानव ने पंक्षी कबूतर को संदेष लेने व भेजने में सहयोग लिया । खबरों का इधर से उधर पहुँचाने के संदेशों को ही समाचार कहा जाता है। इस प्रकार के संवादों को प्रचलन मानव विकाश के साथ जो भी शासक , राजा महाराजा हुआ करते थें वह अपनी बात अपने संदेश बाहको के माध्यम से गाव चैराहो पर किसी बाद्य यंत्र ढोल, नगाड़ा, रमतूला की  आवाज से जन समूह को एकत्रित किया करते थे उसके बाद हुकुम आदेश को बताया जाता था, धीरे धीरे मानव बुद्धि का विकाश हुआ तो संदेशों व समाचारो के शिलालेखो के माध्यम से समाचारों का आदान प्रदान होता रहा। मानव बुद्धि के कारण द्रव्य पदार्थो की खोज कर रंग तैयार किये जाने लगे उसके बाद लकड़ी के ठप्पे के माध्यम से समाचार दिये जाने लगे । 

विश्व में पहली वार सन् 1450 ई0 जर्मनी के जोहान गुटेन वर्ग ने छपाई की मशीन की खोज की जिसे प्रिंट का नाम दिया गया । प्रिंटिंग मशीन का अविष्कार हो जाने के वाद उसका उपयोग छपाई में हुआ ।  भारत में इस प्रकार की मशीन प्रिंटिंग मशीन के अविष्कार का लेख 1550 ई0 में पाया जाता है । भारत में सर्व प्रथम गोवा में 1550 में ,प्रेस की स्थापना हुई, उसके 12 साल बाद बम्बई में 1562 में पिंटिंग प्रेस स्थापित हुआ । मद्रास में 1772 ई0, कलकत्ता में 1779 ई0 प्रेस स्थापित हुआ ।  इस प्रेस से शासको के कार्य हुआ करते थे, लेकिन 29 जनवरी सन् 1780 का दिन स्विर्णम दिवस है जिस दिन एक गैर भारतीय व्दारा बंगाल गजट एण्ड कैलकटा एडवाईटज जिसे हिकीज गजट कहा जाता है का प्रकाशन हुआ ।  भारत में पहिला समाचार पत्र समाज सुधारक श्री राजा राम मोहन राय के प्रयास से 1818 में गंगाल गजट के नाम से प्रकाशित हुआ था लेकिन कुछ समय वाद वह समाचार पत्र बंद हो जाने के बाद सन् 1821 में संवाद कौमुदी और मिरातुल अखवार का प्रकाशन हुआ।  30 मई 1826 को हिन्दी के प्रथम साप्ताहिक समाचार पत्र उदन्त मार्तण्ड का प्रकाशन हुआ। 

अनेक समाचार पत्रों का प्रकाशन शुरू हुआ जिसमे बंगदूत 1829, बनारस अखवार, सुधाकर 1850, बुद्धि प्रकाश 1852, मजहरूल सरूर 1852, इसके वाद 1885 ई0 में हिन्दोस्थान का प्रकाशन शुरू हुआ ।  

प्रिंट पत्रकारिता के बारे में हम यह कह सकते है जो समाचार पत्र मशीनों के द्वारा छाप कर प्रकाशित किये जाते है । किसी भी समाचार पत्र को निकालना या प्रकाशित करना वर्तमान समय में कितना कठिन कार्य है यह तो समाचार पत्र प्रकाशन करने के वाद ही पता चलता है । चॅूकि मैं सन् 1981 से प्रिंट मीडिया से जुड़ा हुआ पत्रकार हॅू इसलिए मेरा अनुभव कहता है कि प्रिंट पत्रकारिता के लिए एक  समाचार पत्र संपादक को कितनी कठिनाईयों से गुजरना होता है यह आम आदमी नही समझ सकता है लेकिन जो इस समाज सेवा कार्य में जुड़े है वह इसको समझ सकते है । वर्तमान समय में इलैक्ट्रानिक एवं सोशल मीडिया के बीच पिंट मीडिया का महत्व आज भी बरकरार है लेकिन चुनौतिया अधिक बढ़ गई है।

प्रिंट पत्रकारिता करने के लिए हमें किसी भी समाचार पत्र प्रकाशन करने के लिए सर्व प्रथम भारतीय संविधान में जो समाचार पत्रों केलिए कार्यालय निर्धारित किया गया उसके नाम से एक आवेदन पत्र जो भारत के समाचार पत्रो के पंजीयन दिल्ली के नाम से  विभिन्न दस नामो के साथ आवेदन पत्र तैयार करना होता है । इस आवेदन को हम सीधे तौर पर नही भेज सकते है इसलिए जिस स्थान या क्षेत्र से समाचार पत्र प्रकाशन करना होता है उस जिला के जिला दण्डाधिकारी के यहां आवेदन देना होता है । जिला दण्डाधिकारी के माध्यम से यह आवेदन प्रधान कार्यायल दिल्ली जाता है , दिल्ली स्थित कार्यालय में इस बात की जाॅच की जाती है कि जो आवेदक ने दस नाम दिये है उस नाम से भारत में समाचार पत्र तो प्रकाशन नही हो रहा है । यदि मिलते जुलते नाम होगें तो आपका आवेदन पत्र वहीं निरस्त हो जायेगा , यदि नाम नही मिलते तो कोई एक नाम का टाईटिल आपका स्वीकार कर लिया जायेगा । जिसकी सूचना विभागीय तौर पर आपके पते पर आती है ।

भारत के समाचार पत्र पंजीयन विभाग से समाचार पत्र का टाईटिल मिल जाने के वाद एक घोषणा पत्र आवेदन पत्र पुनः जिला दण्डाधिकारी के समक्ष भरना होता है जिसमें समाचार पत्र के स्वामित्व, प्रकाशक, मुद्रंक का नाम व पूरा पता सहित एवं सहमति नियमानुसार देना होती है ।  समाचार पत्र प्रकाशन केलिए बिना प्रिंट मशीन के समाचार प्रकाशन असंभव है इसलिए संविधान के नियमानुसार प्रिंट मशीन जिसे मुद्रक कहा गया है की सहमति उसका पता व विवरण आवश्यक होता है । किसी भी समाचार पत्र का प्रकाशन प्रेस अधिनियम के तहत ही किया जा सकता है । किसी सी भी प्रकार की गलत जानकारी या समाचार मुद्रित होने पर प्रिंटिंग प्रेस के मालिक संचालक के विरुद्ध कानूनी कार्यावाही का प्रवाधान होता है ।

प्रिंट पत्रकारिता में वर्तमान चुनौतिया बहुत सारी होती है, जब कोई समाचार पत्र का प्रकाशन शुरू किया जाता है इसके पूर्व समाचार पत्र के छपाई के लिए निर्धारित स्थान आवश्यक है , समाचार पत्र के कार्यालय के लिए स्थान निर्धारित होना आवश्यक है ,प्रिंट मशीन उत्तम होना आवाश्यक क्यो कि प्रतिदिन समाचार पत्र प्रकाशित होता है , मशीन संचालन के लिए योग्य आपरेटर की आवश्यकता होती है, बिजली न होने पर विद्युत उत्पादन के यंत्र रखना होते है, जब संपादक कार्यालय में बैठता है तो उसे अपने आस पास क्षेत्रों के समाचारों का संकल्न करना आवश्यक होता है । जब तक संपादक की टेवल पर समाचार नही होगे समाचार पत्र का प्रकाशन संभव नही है इसलिए समाचार प्रकाश केलिए जिला, नगर कस्बा, ग्रामीण क्षेत्रों तक समाचार संकलन करने के लिए पत्रकार जिनको हम प्रतिनिधि, संवाददाता व्यूरो चीफ आदि नामो से संबोधित करते है कि आवश्यकता होती है, समाचार संकलन करने के लिए जो पत्रकार अधिकृत किये जाते उन्हे प्रजातंत्र  में पत्रकार की भूमिका का ज्ञान अनुभव होना आवश्यक है

पत्रकारिता-सरकार, शासन, प्रशासन एवं जनता के बीच वैलगाड़ी की धुरी की तरह होती है या जनता की  समस्याओं को हल कराने जनता की आवाज को सरकार तक पहुचाने, एवं सरकार एवं शासन, प्रशासन की कार्यावाही निर्णयो से जन मानस को अवगत कराने से तात्पर्य है । पत्रकारिता एक मिषन की तरह समाज सेवा का कार्य क्षेत्र होता है । समाचार पत्र के संचालन केलिए भारत सरकार एवं प्रदेष सरकार विज्ञापन नीति निर्धारित करती है, जो समाचार पत्र की आय का साधन होती है । आम जनसाधारण से  समाचार पत्रो में विज्ञापन प्राप्त होते है जिससे समाचार पत्र, पत्रिकाओ को आर्थिक लाभ होता है ।

इसलिए संपादक की जिम्मेदारी होती है कि उसके पास जो समाचार प्राप्त हुआ है उसको वह पत्रकारिता की परिभाषा में परिर्वतन करेगा , चॅूकि समाचार पत्र की विश्वसनीयता उसके समाचार पत्र में छपने वाले समाचारो पर निर्भर रहती है, समाज सुधारने एवं समाज में शांति बनाने का कार्य समाचार पत्र ही करते है । आम आदमी का विश्वास समाचारो पर होता है । यदि कोई समाचार समाज विरोधी प्रकाशित हो गया तो समाज में सम्प्रदायिक दंगे भड़क जाते है, शांति भंग हो जाती है , अश्लील व अपशब्द  का प्रयोग नही होता है साहित्य व मर्यादा की भाषा में ही समाचार लिखा जाता है । 

        संसद, विधान सभाओं, विधान मंडलो, नगर निगम, नगर पालिकाओं, न्यायपालिकाओं के फैसले के समाचार, खेल कूद, सामाजिक, राजनैतिक, सांस्कृतिक, गोष्ठीओ, आम सभाओं, प्रेस विज्ञप्तियों के समाचारो के साथ साथ नैतिक शिक्षा एवं व्यवहारिक शिक्षा के समाचारों को प्रमुख स्थान देना होता है । जन मानस की समस्यओं को हल कराने केलिए समाचार प्रकाशित किये जाते है । बड़े बड़े समाचार पत्रो में संपादकीय , आपके पत्र, आपके सुझाव, समाज सुधारक व्यक्तियों के बारे में , धर्म व ज्ञान के बारे में बच्चों को ज्ञान बर्धक जानकारियों को समाचार पत्र में प्रमुख स्थान देना होता है । समाचार पत्र जब प्रिंट प्रेस पर जाता है तो छपने के पूर्व उसको एक बार पुनः जाच करना होती है कि जो समाचार प्रकाशन को दिया था उसको उसी भाषा में छापा जा रहा है या नही, एक ष्षव्द के इधर-उधर हो जाने से समाचार के लाभ के स्थान पर नुकसान हो सकता है, समाचार पत्र की विश्वसनीयता समाप्त हो सकती है ।

प्रिंट पत्रकारिता में सबसे बड़ी चुनौती समाचार संकलन करने , उसके जाच ने समाचार के प्रकाशन की होती है, संपादक की जिम्मेदारी रहती है कि वह किसी भी समाचार प्रकाशन के पूर्व उसकी सच्चाई जानने का प्रयास करे, किसी के चरित्र हनन करने एवं झूठा समाचार प्रकाशन का अधिकार किसी भी समाचार पत्र या पत्रकार को नही दिया गया है ।   एक चुनौती यह भी होती है कि  संपादक को शहर व शहर से बाहर समाचार पत्र वितरण कराने के लिए ऐजेण्ट बुक स्टाल डीलर नियुक्त करना होते है , डीलरों को निर्धारित कमीषन दिया जाने का प्रावधान होता है, एक माह तक समाचार पत्र वितरण कराने के बाद डीलर एजेण्ट राशि एकत्रित कर संपादक तक भेजता है । दैनिक समाचार पत्र प्रकाशन सुबह 5 बजे के पूर्व करना आवश्यक है क्योकि आम आदमी सूर्य उदय के साथ समाचार पत्र पढ़ने के लिए उतावला हो जाता है इसलिए संपादक को अपने पेपर समाचार पत्र को आम जन तक पहुचाने केलिए एक टीम गठित करना होती है जो समाचार पत्र आम जन तक पहुचा सके, स्थानीय नगर या शहर में समाचार पत्रों को क्रमबद्ध तरीके से लगाने, उनकी गिनती कराने समाचार पत्र के बंडल बनाकर, बंडल को बाधने शहर से बाहर भेजने केलिए  बाहनों की व्यवस्था बनाने का कार्य भी समाचार प्रकाशक संपादक की जुम्मेदारी है जो यह कार्य भी बहुत ही चुनौती पूर्ण होता है ।

वर्तमान समय में भारत सरकार का भी प्रयास रहता है कि आकाशवाणी के माध्यम से आम जनता तक स्वच्छ व ताजे समाचार पहुचाया जावे, भारत सरकार के सुझाव, जनहित में विज्ञप्तिया जानकारिया भी समाचार के पहिले व बीच बीच में जन जाग्रति के लिए प्रसारित की जाती है ।  इलैक्ट्रानिक मीडिया एवं सोशल मीडिया तीव्रगति से फैल चुकी है सैकड़ों टीवी समाचार चैनल बाजार में आ चुके है, इंटरनेट सुविधाये हो जाने से पल पल की खबर आम व्यक्ति तक पहुच रही है उसके बाद भी आम जन का विष्वासप्रिंटमीडिया पर भरोसा है , क्यो इन सबसे हट करप्रिंटमीडिया जो भी समाचार लिखता है या प्रकाशित करता है उसका लिखित रिकार्ड होता है प्रिंटमीडिया के माध्यम से आम जन जन तक अखवार के माध्यम से खबर पहुच जाती है । सूचनाओं का आदान प्रदान करने केलिए अखवार से अच्छा कोई माध्यम नही है ।

लेकिन प्रिंट पत्रकारिता के माध्यम से जब कोई गलत समाचार प्रकाशित हो जाता है तो उसके बिरूध्द समाचार पत्र के स्वामित्व प्रकाशक मुद्रक के विरूद्ध भारतीय दंड संहिताओं के तहत अपराध भी दर्ज हो जाते है सिद्ध न करने पर सजा का प्रावधान रखा गया है। भारतीय संविधान में समाचार पत्रो की सुनवाई के लिए संविधान में भारतीय प्रेस परिषद का भी गठन किया गया है जो पत्रकारों की समस्याओं को सुनती है । समाचार पत्र के विरुद्ध कार्यावाही का भी अधिकार रखती है । गणेषषंकर विद्यार्थी प्रेस क्लब का प्रदेष अध्यक्ष होने के नाते मेरा प्रसाय रहेगा कि  प्रदेश में निष्पक्ष, कर्मठ पत्रकारो, साहित्यकारों की लेखनी को सम्मान मिलता रहेगा ।

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