मीडियामोरचा

____________________________________पत्रकारिता के जनसरोकार

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Blog posts : "फेसबुक से "

एक संवेदनशील पत्रकार की मौत और उसकी वजह

सुनील पांडेय / वरिष्ठ पत्रकार राज रतन कमल नहीं रहे। शुक्रवार देर रात निधन हो गया। आज सुबह से ही FB पर उनके लिए संवेदना व्यक्त की जा रही है। मैं भी इस दुःख की घड़ी में उनके परिवार के साथ खड़ा हूँ। लेकिन मुझे घोर आश्चर्य हो रहा है कि पटना में मौजूद उनके साथ काम कर चुके, उन्हें निजी…

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पत्रिका अखबार का काला पानी संस्करण बंद

राजकुमार सोनी/ आज से डेढ़ साल पहले जब छत्तीसगढ़ में भाजपा की सरकार थीं तब मेरा तबादला कोयम्बटूर ( तमिलनाडु ) कर दिया गया था. यहां कुछ दिन मैंने संपादकीय प्रभारी के तौर पर काम किया, लेकिन ठीक विधानसभा चुनाव के पहले जयपुर में पदस्थ एक वरिष्ठ संपादक ने मुझसे फोन पर कहा कि मैंने चा…

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प्रिंट मीडिया में संकट और गहरा जाएगा

अम्बरीश कुमार। लॉक डाउन के कुछ ही दिन बाद एक पोस्ट लिखी कि प्रिंट मीडिया के बहुत खराब दिन आ गए हैं ।कई संस्करण बंद हो चुके हैं ।वेतन आधा रह गया है बहुत अखबारों में । स्टाफ कम किया जा चुका है ।पत्रकार संगठन अब बोलते नही सरकार की कैसे तारीफ की जाए इसमें जुटे हैं ।वेज बोर्ड नि…

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बारूद के ढेर पर न्यूज़ रीडिंग!

ये समाचार नहीं बताते सीधा मतलब समझा देते हैं

सरस्वती रमेश/ आपने कभी बारूद के ढेर पर बैठकर न्यूज रीडिंग करते हुए न्यूज़ रीडरों को देखा है!  अगर नहीं,  तो रिपब्लिक भारत चैनल देखिए। उसके न्यूज़ रीडरों के स…

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बधाई नहीं अपनी संवेदना जतायें !

साकिब खान/ हिंदी पत्रकारिता दिवस पर बधाई नहीं अपनी संवेदना जतायें। दोस्तों हिंदी की पत्रकारिता अपने सबसे मुश्किल दिनों में है। …

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यह समय बधाई का नहीं है

कुमार निशांत/ मैं सोशल मीडिया पर आज देख रहा हूं कि हिन्दी पत्रकारिता दिवस पर पत्रकार एक दूसरे को बधाइयां दे रहे हैं. लेकिन, अभी यह समय बधाई हो का नहीं है. अभी पत्रकारिता बहुत ही भयावह स्थिति में गुजर रही है. जो लोग अखबार में या इलेक्ट्रॉनिक्स मीडिया में बने हुए हैं वह कितने दिन…

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मीडिया को बचाइए

संतोष मानव/ आप नहीं जानते, मीडिया मुगल कितनी कमाई करते हैं? किन-किन रास्तों से करते हैं? सरकारों से किस-किस तरह के लाभ लेते हैं। कभी पुचकार और कभी दबाकर। कहां-कहां फंड डाइवर्सिफाइ करते हैं। कल का खाकपति आज खरबपति हैं। साइकिल पर अखबार बेचने वाले, मिठाई बेचने वाले, केरोसिन बेचने वाले…

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आप सरकार की आवाज क्यों बनना चाहते हैं ?

खुला_पत्र_सम्पादकों_के_नाम

यह खुला पत्र सभी मीडिया घरानों - प्रिंट मीडिया, टीवी न्यूज़ चैनल और डिजिटिल वेब मीडिया में एडिटोरियल कंटेंट तय करने वाले संपादक बंधुओं के लिए है। संपादक एक ऐसी संस्था मानी जाती है, जो अखबार, टीवी या वेब मीडिया में प्रकाशित/ प्र…

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मीडिया अब बताएगी कि इनका चेन कहाँ तक है?

समझना आसान है, सरकार और भारतीय मीडिया को मुस्लिम विरोधी एजेंडा कितना रास आता है!

हेमनाथ मिश्रा। मरकज़ के अलावा और कितने चेन को सामने लाया गया? म…

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मीडिया कर्मियों से ये कैसा सलूक?

प्रवीण बागी। यह एक अजीब विडंबना है। कोरोना से लड़ने के लिए मेडिकलकर्मियों, पुलिसकर्मियों और सफाईकर्मियों को सम्मानित किया जा रहा है। पूरा देश उनके लिए ताली बजाता है। दीया जलाता है। वायुसेना के हेलीकॉप्टर पुष्पवर्षा करते हैं। प्रधानमंत्री उन्हें कोरोना वारियर्स का नाम दे रहे हैं।…

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मीडिया लिटरेसी कैंपेन चलाने की जरूरत

जागरूक समाज आगे आए

संतोष सारंग/ सामाजिक संस्थाओं, नागरिक संगठनों के लिए अनाज बांटने से अधिक आमलोगों के बीच मीडिया लिटरेसी कैंपेन चलाने की जरूरत है। वर्तमान परिस्थिति के लिए अगर सबसे अधिक जिम्मेदार है, तो वह मनुवादी मीडिया है। लोकतंत्र को मजबूत बना…

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'रेडलाइट मीडिया' के 'डॉग एंकर' और 'गिद्ध

संतोष सारंग /तुमने तब किसानों के आंदोलन को भी साजिश बोला था। छात्रों के आंदोलन को भी देश के साथ गद्दारी करार दिया था। और आज भूख व बेबसी के मारे हजारों बेकाबू प्रवासी मजदूरों की भीड़ में भी तुम्हें साजिश की बू दिखती है सता के भूखे भेड़िये। राजनीति की लाश पर बैठनेवाले गिद्धों, भुखमर…

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भारतीय मीडिया ने कोरोना को घृणित बना दिया

गिरीश मालवीय/ भारतीय मीडिया ने कोरोना को घृणित बना दिया, पूरी दुनिया के मीडिया को देखे और आप भारत के मीडिया को देखे तो आप को यह फर्क स्पष्ट दिखाई देगा।  …

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सरकार से लूट का बड़ा हिस्सा मीडिया मालिक डकार जाते हैं

रजनीश कुमार झा/ जो पत्रकार संगठन कभी पत्रकारों के लिए खड़ा नहीं हुआ, वो जैसे ही सोनिया ने मीडिया मे सरकारी विज्ञापनों मे कटौती का सुझाव दिया मीडिया मालिकों के लिए एकत्रित हो गए।…

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सरकार की आलोचना करने के लिए ही हमने अख़बार निकाला है

‘माखनलाल चतुर्वेदी’ को उनके जन्मदिवस (4 अप्रैल) पर सादर नमन

जिया हसन/ 4 अप्रैल 1889 पत्रकारिता का एक ज्योत दीप्तिमान हुआ था वह ज्योत आगे चलकर ‘प्रभा और कर्मवीर’ जैसे प्रतिष्ठत पत्रों के संप…

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शर्म मगर तुम को नहीं आती

डॉ. भूरे लाल/  अब से कुछ दिन पहले कैलाश दहिया का एक लेख "आपहुदरी और इसके अय्यार : इतिहास के हवाले" शीर्षक से कोलकाता से प्रकाशित "सदीनामा" पत्रिका के मई 2019 में छपा था। इस लेख में "आपहुदरी" यानि रमणिका गुप्ता की "जार क्रांति" से गहरी सहानुभूति रखने वाले कुछ दलित-पिछड़े विचारकों, …

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भारतीय मीडिया का मानसिक दिवालियापन

प्रेमेंद्र। किसी ने कह दिया कि यूपी के सोनभद्र में सोना मिला है बस यार लोग कैमरा कलम लेकर टूट पड़े । किसी को 3000 टन सोना मिल गया,  किसी ने लिखा ट्रेन की बोगी के साइज की सोने की चट्टाने, किसी को वहां जहरीले नाग दिखने लगे, किसी ने कहा कि खजाने की रक्षा करने के लिए  यह जहरीले सां…

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न्यूज सप्लायर

अम्बरीष कुमार/ कल जनसत्ता के एक स्ट्रिंगर का फोन आया बोला ,आपके जाने के बाद समूचे यूपी बिहार मध्य प्रदेश जैसे ज्यादातर राज्यों में कोई वेज बोर्ड वाला तो छोड़िए बिना बोर्ड वाला भी रिपोर्टर नही है ।समूचे पूर्वी भारत में एक रिपोर्टर जो थे उन्होंने इस्तीफा दे दिया दो महीने पहले । …

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अब याद बनकर रह गई

हीरालाल प्रसाद/ बीबीसी शाँर्टवेव रेडियो का प्रसारण 31जनवरी 2020 से बंद होने से राष्ट्र के बीबीसी के श्रोता काफी भावुक एवं दुखी हैं।…

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वक्त है संभल जाएं...

अम्बरीष कुमार/ मीडिया के लिए यह काला दिन है !

ये पत्रकार कवरेज करना चाहते हैं ,बात करना चाहते हैं ।संपादक भी खड़े हैं पुलिस के घेरे में पर जनता नही चाहती ।यह पहली बार दिख रहा है ,वैसे कोई आंदोलन पत्रकारों को बुलाये तो वे आते नही औ…

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