मीडियामोरचा

____________________________________पत्रकारिता के जनसरोकार

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Blog posts : "फेसबुक से "

मीडिया के लिए भ्रष्टाचार मुद्दा कब था?

वीरेंद्र यादव/पटना / मुख्यमंत्री नीतीश कुमार मीडिया के ‘दोहरे’ स्टैंडर्ड से आहत हैं। एक साल 5 महीना पहले मीडिया के लिए भ्रष्टाचार सबसे बड़ा मुद्दा था। लेकिन एक साल पांच महीना प‍हले जब भाजपा जदयू के साथ सत्ता में आ गयी तो मीडिया ने भ्रष्टाचार का मुद्दा छोड़ दिया है। एक…

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शोषण और पतन के दो पाटों के बीच फंसी-बची पत्रकारिता

कुमार दिनेश/ हर पेशे में अनुभव की कद्र है, विशेष कर वकालत, चिकित्सा और पत्रकारिता में, लेकिन अखबार मालिक कम पैसे में ज्यादा लोगों से काम लेने की शोषणकारी मानसिकता के कारण दोहरी नीति अपनाते हैं। …

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सरकार और पत्रकार

अम्बरीश कुमार/ राजस्थान पत्रिका ने छतीसगढ़ के मुख्यमंत्री रमन सिंह के खिलाफ स्टोरी लिखने पर रायपुर के ब्यूरो चीफ राजकुमार सोनी को दक्षिण भारत के कोयम्बतूर में भेज दिया था .पर वे सोशल मीडिया पर सरकार के खिलाफ लिखते रहे .चुनाव के दौरान 'चाउर वाले बाबा ... वाला मशहूर गीत लाखों लो…

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तो सरकार प्रेस क्लब को अपने अधीन ही कर ले!

संजय वर्मा/ पटना प्रेस क्लब की सदस्यता प्राप्त करना है, वो कहेंगे ज्ञानेश्वर जी बो कहेंगे सुभाष पांडे जी, बो कहेंगे अरुण अशेष जी से मिल लीजिये। मतलब जो सदस्य बनना चाहते उन्हें फुटबॉल की तरह पासिंग थ्रो का सामना करना पड़ रहा. पत्रकार ही पत्रकार को औकात बता दे रहे है जो प्रेस क्लब पर …

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कौन तय करेगा कि मीडिया में असल अजेंडा क्या है

हिंदी का "खान मार्केट क्लब" !

नरेंद्र नाथ/ आजकल सोशल मीडिया पर कुछ एलीट-हिंदीभाषी हिंदी को गाली देकर अपने लिए हिंदी का "खान मार्केट क्लब" बनाने के अभियान में हैं। उनके लिए अब जर्नल में लंबी-लंबी लैटिन शब्दों में छपी रिपोर्ट ही असली मीड…

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तब विरोधस्वरूप एक्रेडिटेशन कार्ड भी सरकार को लौटा देते थे पत्रकार

सुरेन्द्र किशोर/ हम पत्रकार गण अपने बारे में कम ही लिखते हैं। बल्कि न के बराबर। आज थोडा़ अपनी बिरादरी के बारे में भी लिख देता हूं। इस बहाने कुछ बड़े व सम्मानित पत्रकारों की हमें याद भी आ जाएगी। इनमें से कई अब इस दुनिया में नहीं रहे।…

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बिहार की पत्रकारिता को सम्पादक नहीं चलाता, सरकार चलाती है

संजीव चंदन। दो-तीन दिन से बिहार में अखबार देख रहा हूँ। एक दिन दैनिक जागरण ने हेडिंग बनायी कि पीएम की हत्या की साजिश के आरोप में पांच गिरफ्तार। हिन्दुस्तान की आज की हेडिंग है 'कोरेगांव के आरोपित रहेंगे नजरबंद। ऐसे ही जनता का ज्ञानवर्धन किया जाता है अखबारों से। …

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पत्रकारिता की दिशाहीनता

राकेश प्रवीर। क्या हमारी पत्रकारिता वाकई दिशाहीन हो गयी है? क्या मीडिया के वजूद पर उठ रहे सवाल वाजिब है? इस तरह के अनेक ऐसे सवाल हैं जो हमें सोचने के लिए मजबूर करते हैं। एक बार फिर देश में ‘होप एंड हैप्पीनेस’ की जुगाली शुरू हो गयी है। एक ओर जहां जन सामान्य की समस्याएं विकराल …

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2014 के जनादेश ने कैसे बदल दिया मीडिया को

पूण्य प्रसून वाजपेयी/ क्या वाकई भारतीय मीडिया को झुकने को कहा गया तो वह रेंगने लगा है। क्या वाकई भारतीय मीडिया की कीमत महज 30 से 35 हजार करोड की कमाई से जुड़ी है । क्या वाकई मीडिया पर नकेल कसने के लिये बिजनेस करो या धंधा बंद कर दो वाले हालात आ चुके हैं । हो जो भी …

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इण्डिया टी वी से इसलिए है प्यार...

रामजी तिवारी/ मुझे इण्डिया टी वी से प्यार है । उनके कार्यक्रमों "कद्दू में हनुमान" और "तीन बार क्यों रोये सलमान" का मैं पुराना फैन रहा हूँ । "गाय का दूध पीते है एलियन" और "लाल किले का लाल भूत" जैसी कई मास्टरपीस प्रस्तुतियां मेरे जेहन में अब भी बसी हुयी हैं ।…

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पिछले तीन वर्षों में एक-एक कर सात

चेत सके तो चेत जाएं

राकेश प्रवीर/ पिछला तीन साल बिहार के पत्रकारों के लिए क्रूर रहा हैं। हर कुछ महीने के अंतराल पर बिहार के किसी न किसी हिस्से में किसी न किसी पत्रकार की हत्या महज अपराध की समान्य घटना नहीं है। सभी पत्रकारों की हत्या के पीछे कारण…

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रिपोर्टर नहीं, संपादक दोषी

प्रेमेंद्र मिश्र। एक आपत्तिजनक न्यूज़, वेब पोर्टल पर डालने को लेकर मेरे जिले के दो होनहार पत्रकार कानूनी पेंच झेल रहे हैं। पर क्या वाकई दोष उनका है ? क्या उनके न्यूज़ ग्रुप ने उन्हें वांछित ट्रेनिंग दी? उन्हें बताया गया कि क्या प्रकाशित करना है और क्या नही? और अगर उन्हो…

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ख़बरें चुराकर लिखने वाले ये पत्रकार भी सेलेब्रिटी !

शशांक मुकुट शेखर। कुछ दिन पहले एक खबर आई थी. नोएडा में एक टीवी चैनल में डेस्क पर काम करने वाले एक पत्रकार को काम के प्रेशर की वजह से ऑफिस में ही पैरालीसिस अटैक आया. काम का प्रेशर मीडिया एजेंसियों में आम बात है. कम पैसों में ओवरटाइम वर्क भी आम बात है. मेरे कई मित्र भी दि…

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युवाओं को दीमक की तरह चाट रहा सोशल मीडिया

मोo सोहैल / युवाओं को दीमक की तरह चाट रहा सोशल मीडिया। आजकल नौजवान सोते - जागते, उठते- बैठते हर समय सोशल मीडिया इस्तेमाल करने का आदि होते जा रहा हैं। वो रह-रह कर फेसबुक पर अपना अकाउंट देखता रहता है। टि्वटर को बिना देखे उसे चैन नहीं मिलता और इंस्टाग्राम पर अपनी पोस्ट का लाइक्स गिनते रहत…

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पत्रकारिता जैसे-जैसे रद्दी होगी, लोकतन्त्र का कबाड़खाना बड़ा होता जाएगा

दिनेश चौधरी। कप्पू मस्तमौला पत्रकार थे। अखबार के मुख्य उप सम्पादक। मालिक-सम्पादक को भी नहीं भजते थे। एक बार मालिक ने दो मिनट देर से आने पर कुछ कहा था तो अगले दिन से अपने भूदानी झोले में टेबल-घड़ी लाकर सामने रखने लगे, इस नारे के साथ कि 'टाइम से आना और टाइम से जाना।'…

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कहाँ है विकास ?

मीडिया वाले तीन वर्षों से विकास - विकास चिल्ला रहे हैं

तारिक फातमी/ ये मीडिया वाले भी कितने बेवकूफ़ हैं, तीन वर्षों से विकास - विकास चिल्ला रहे हैं। हर समाचार पत्र और न्यूज़ चैनल वालों को बस …

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अख़बारों का हाल देखिए

संगीन आरोप पीछे, धमकी आगे

ओम थानवी/ अख़बारों का हाल देखिए: छोटे शाह 100 करोड़ का मुक़दमा दायर कर देंगे - यह है सुर्खी। भ्रष्टाचार का संगीन आरोप पीछे हो गया, धमकी आगे! कल्पना कीजिए यही आरोप केजरीवाल, चिदम्बरम, वीरभद्र सिंह या किसी अन्य दुश्मन प…

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सही या गलत, मीडिया पहले जैसी ही है

नरेंद्र नाथ। जरा आप इस लिस्ट को देखें- सीडब्ल्यूजी: टाइम्स ऑफ इंडिया, टाइम्स नाउ की अगुवाई में एक्सपोज

कोलगेट: टाइम्स ऑफ इंडिया की अग…

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संजीदा सच दिखाने वाले चैनल में बचा क्या रह जाएगा?

ओम थानवी/ आख़िर NDTV भी क़ब्ज़े कर लिया गया। मसालों के नाम पर स्पाइस-जेट हवाई कम्पनी चलाने वाले अजय सिंह अब यह तय करेंगे कि एनडीटीवी के चैनलों पर क्या दिखाया जाए, क्या नहीं। इसका मुँह-चाहा फ़ायदा उन्हें सरकार से मिलेगा। इस हाथ दे, उस हाथ ले। एक मसाला-छाप व्यापारी को और क्या चाहिए?…

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पत्रकारिता के छात्रों के लिए "गौशाला इन विश्वविद्यालय"

स्वागत योग्य, सराहनीय क़दम !!! 

तारिक फातमी/ पत्रकारिता की शिक्षा देने वाले देश के एक प्रमुख संस्थान "माखनलाल चतुर्वेदी पत्रकारिता विश्वविद्यालय" ने पत्रकारिता के छात्रों के लिए गौ सेवा को अनिवार्य विषय के रूप में अपने पाठ्यक्रम में…

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