मीडियामोरचा

____________________________________पत्रकारिता के जनसरोकार

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Blog posts : "फेसबुक से "

2014 के जनादेश ने कैसे बदल दिया मीडिया को

पूण्य प्रसून वाजपेयी/ क्या वाकई भारतीय मीडिया को झुकने को कहा गया तो वह रेंगने लगा है। क्या वाकई भारतीय मीडिया की कीमत महज 30 से 35 हजार करोड की कमाई से जुड़ी है । क्या वाकई मीडिया पर नकेल कसने के लिये बिजनेस करो या धंधा बंद कर दो वाले हालात आ चुके हैं । हो जो भी …

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इण्डिया टी वी से इसलिए है प्यार...

रामजी तिवारी/ मुझे इण्डिया टी वी से प्यार है । उनके कार्यक्रमों "कद्दू में हनुमान" और "तीन बार क्यों रोये सलमान" का मैं पुराना फैन रहा हूँ । "गाय का दूध पीते है एलियन" और "लाल किले का लाल भूत" जैसी कई मास्टरपीस प्रस्तुतियां मेरे जेहन में अब भी बसी हुयी हैं ।…

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पिछले तीन वर्षों में एक-एक कर सात

चेत सके तो चेत जाएं

राकेश प्रवीर/ पिछला तीन साल बिहार के पत्रकारों के लिए क्रूर रहा हैं। हर कुछ महीने के अंतराल पर बिहार के किसी न किसी हिस्से में किसी न किसी पत्रकार की हत्या महज अपराध की समान्य घटना नहीं है। सभी पत्रकारों की हत्या के पीछे कारण…

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रिपोर्टर नहीं, संपादक दोषी

प्रेमेंद्र मिश्र। एक आपत्तिजनक न्यूज़, वेब पोर्टल पर डालने को लेकर मेरे जिले के दो होनहार पत्रकार कानूनी पेंच झेल रहे हैं। पर क्या वाकई दोष उनका है ? क्या उनके न्यूज़ ग्रुप ने उन्हें वांछित ट्रेनिंग दी? उन्हें बताया गया कि क्या प्रकाशित करना है और क्या नही? और अगर उन्हो…

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ख़बरें चुराकर लिखने वाले ये पत्रकार भी सेलेब्रिटी !

शशांक मुकुट शेखर। कुछ दिन पहले एक खबर आई थी. नोएडा में एक टीवी चैनल में डेस्क पर काम करने वाले एक पत्रकार को काम के प्रेशर की वजह से ऑफिस में ही पैरालीसिस अटैक आया. काम का प्रेशर मीडिया एजेंसियों में आम बात है. कम पैसों में ओवरटाइम वर्क भी आम बात है. मेरे कई मित्र भी दि…

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युवाओं को दीमक की तरह चाट रहा सोशल मीडिया

मोo सोहैल / युवाओं को दीमक की तरह चाट रहा सोशल मीडिया। आजकल नौजवान सोते - जागते, उठते- बैठते हर समय सोशल मीडिया इस्तेमाल करने का आदि होते जा रहा हैं। वो रह-रह कर फेसबुक पर अपना अकाउंट देखता रहता है। टि्वटर को बिना देखे उसे चैन नहीं मिलता और इंस्टाग्राम पर अपनी पोस्ट का लाइक्स गिनते रहत…

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पत्रकारिता जैसे-जैसे रद्दी होगी, लोकतन्त्र का कबाड़खाना बड़ा होता जाएगा

दिनेश चौधरी। कप्पू मस्तमौला पत्रकार थे। अखबार के मुख्य उप सम्पादक। मालिक-सम्पादक को भी नहीं भजते थे। एक बार मालिक ने दो मिनट देर से आने पर कुछ कहा था तो अगले दिन से अपने भूदानी झोले में टेबल-घड़ी लाकर सामने रखने लगे, इस नारे के साथ कि 'टाइम से आना और टाइम से जाना।'…

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कहाँ है विकास ?

मीडिया वाले तीन वर्षों से विकास - विकास चिल्ला रहे हैं

तारिक फातमी/ ये मीडिया वाले भी कितने बेवकूफ़ हैं, तीन वर्षों से विकास - विकास चिल्ला रहे हैं। हर समाचार पत्र और न्यूज़ चैनल वालों को बस …

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अख़बारों का हाल देखिए

संगीन आरोप पीछे, धमकी आगे

ओम थानवी/ अख़बारों का हाल देखिए: छोटे शाह 100 करोड़ का मुक़दमा दायर कर देंगे - यह है सुर्खी। भ्रष्टाचार का संगीन आरोप पीछे हो गया, धमकी आगे! कल्पना कीजिए यही आरोप केजरीवाल, चिदम्बरम, वीरभद्र सिंह या किसी अन्य दुश्मन प…

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सही या गलत, मीडिया पहले जैसी ही है

नरेंद्र नाथ। जरा आप इस लिस्ट को देखें- सीडब्ल्यूजी: टाइम्स ऑफ इंडिया, टाइम्स नाउ की अगुवाई में एक्सपोज

कोलगेट: टाइम्स ऑफ इंडिया की अग…

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संजीदा सच दिखाने वाले चैनल में बचा क्या रह जाएगा?

ओम थानवी/ आख़िर NDTV भी क़ब्ज़े कर लिया गया। मसालों के नाम पर स्पाइस-जेट हवाई कम्पनी चलाने वाले अजय सिंह अब यह तय करेंगे कि एनडीटीवी के चैनलों पर क्या दिखाया जाए, क्या नहीं। इसका मुँह-चाहा फ़ायदा उन्हें सरकार से मिलेगा। इस हाथ दे, उस हाथ ले। एक मसाला-छाप व्यापारी को और क्या चाहिए?…

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पत्रकारिता के छात्रों के लिए "गौशाला इन विश्वविद्यालय"

स्वागत योग्य, सराहनीय क़दम !!! 

तारिक फातमी/ पत्रकारिता की शिक्षा देने वाले देश के एक प्रमुख संस्थान "माखनलाल चतुर्वेदी पत्रकारिता विश्वविद्यालय" ने पत्रकारिता के छात्रों के लिए गौ सेवा को अनिवार्य विषय के रूप में अपने पाठ्यक्रम में…

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दो पत्र- आलेख एक, लेखक अलग-अलग

पटना/ संजय कुमार ने अपने फेसबुक पर यह जानकारी दी है-

*मीडिया का देखिये खेल, बिहार पटना से प्रकाशित "स्वराज" और सासाराम से "मीडिया दर्शन", ने छापा एक लेख, एक ही शीर्षक और शब्द क्या अक्षर भी सेम "जवानों को राखी रूपी मिस…

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जिम्मेदार खुद पत्रकार बंधु !

निखिल आनंद/ उत्तर प्रदेश विधानसभा का यह पूरा मामला क्या है मुझे नहीं पता, लेकिन इस स्थिति के जिम्मेदार खुद पत्रकार बंधु है। …

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.... से सावधान!

दिनेश चौधरी/ कथित पत्रकारों के साथ लालू यादव की क्या झड़प हुई है, मुझे नहीं मालूम। लालू बहुत डिप्लोमेटिक हैं और प्रेस से भागते भी नहीं। भागने वाले तो 3 साल से भाग रहे हैं। लालू मुलायम की तरह ढुलमुल भी नहीं रहे और उनका स्टैंड हमेशा बहुत साफ़ रहा। पर थोड़ी बात आज की पत्रकारिता पर करनी…

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दरअसल पत्रकार अपना काम भूल गए है!

प्रेमेन्द्र मिश्रा/ एक पत्रकार एक नेता को टीवी शो से खदेड़ता है, एक नेता पत्रकार को मुक्का मारने की धमकी देता है, एक पत्रकार नेता को टुच्चा कहता है, एक मौलाना टीवी एंकर को चड्ढी पहनने की सलाह देता है, एंकर मौलाना को गरियाती है ..... यहाँ तक तो आ गए , अब सुनेंगे की पत…

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एक सिलसिले का समापन

मेरी प्रस्तुति में ‘मीडिया मंथन’ के आखिरी एपिसोड का प्रसारण

उर्मिलेश/ सन् 2010 में राज्यसभा टीवी(RSTV)के कार्यकारी संपादक के रूप में काम शुरू करते हुए हमने संसदीय चैनल के संभावित का…

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उन्मादी लेखन करने वालों की एक श्रेणी वो, जिन्हें न्यूज चैनलों ने फर्जी खबरों से अज्ञान के आनंदलोक में डुबो रखा है

उर्मिलेश/ कश्मीर या समाज के किसी भी जटिल व संवेदनशील विषय पर अतिशय राष्ट्रवादी खुमार में डूबकर उन्मादी लेखन करने वालों में मुझे दो तरह के लोग नजर आते हैं। इनमें सारे लोग गलत नहीं हैं। एक श्रेणी उनकी है, जो सचमुच उन्मादी हैं और दूसरी श्रेणी उनकी है, जिन्हें हमारे ज्यादातर न्यूज चैनलों…

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क्या नाकामी ढकने के लिए लिया जा रहा मीडिया का सहारा?

संतोष सिंह/ सच में आज भी जनता मीडिया की खबरों पर इतना भरोसा करता है, मुझे तो ऐसा नही लगता है लेकिन हमारे राजनेताओं को ऐसा जरुर महसूस हो रहा है,,, क्योंकि आजकल सब कुछ मीडिया के सहारे ही नापने कि कोशिश चल रही है. हलाकि ऐसा पहले कभी नही देखा. नीतीश भी मीडिया पर पैनी जनर रखते थे. सरकार…

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तिजोरी के झरोखे से झांकती पत्रकारिता

रमेश प्रताप सिंह। भारतीय जनता पार्टी की नरेंद्र मोदी सरकार के दो साल का कार्यकाल क्या पूरा हुआ, तमाम अखबारों के तेवर-कलेवर तो बदले ही पत्रकारिता के जेवर को भी उतारने में कोई कोर-कसर नहीं बाकी रखी। कल तक जो पत्रकारिता को लेकर बड़े-बड़े दावे करते थे, अपनी निष्पक्ष और …

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