काश पुरस्कार तब मिलता जब वे इसकी महत्ता को महसूस कर पाने में सक्षम होते
तारकेश कुमार ओझा/ कहते हैं कि अंग्रेजों ने जब रेलवे लाइनें बिछा कर उस पर ट्रेनें चलाई तो देश के लोग उसमें चढ़ने से यह सोच कर डरते थे कि मशीनी चीज का क्या भरोसा, कुछ दूर चले और भहरा कर गिर पड़े। मेरे गांव में एेसे कई बुजुर्ग …

















