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____________________________________पत्रकारिता के जनसरोकार

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Blog posts : "लोग "

मामाजी माणिकचंद: एक ध्येय समर्पित पत्रकार

डॉ. पवन सिंह मलिक/ भारतीय पत्रकारिता में मूल्यों को स्थापित करने में अनेक नामों की एक लंबी श्रृखंला हमको दिखाई देती है। लेकिन उन मूल्यों को अपने जीवन का ध्येय बना पूरा जीवन उसके लिए समर्पित कर देना और उसी ध्येय की पूर्ति के लिए जीवन भर कलम चलाना, ऐसा कोई नाम है तो वो है ‘मा…

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हिन्दी पत्रकारिता के ‘माणिक’ मामाजी

प्रखर संपादक माणिकचंद्र वाजपेयी उपाख्य ‘मामाजी’ की 101वीं जयंती (7 अक्टूबर) पर विशेष

लोकेन्द्र सिंह / ‘मन समर्पित, तन समर्पित और यह ज…

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जार चिंतन शिरोमणि- अर्थात्, प्रेम कुमार मणि

कैलाश दहिया/ पिछड़ों के विचारक प्रेम कुमार मणि ने 4 सितंबर, 2020 को अपनी फेसबुक वॉल पर 'यह जार चिंतन क्या है?' शीर्षक से अपना लेख लगाया है। बताया जाए, सर्वप्रथम तो इन का यह शीर्षक ही गलत है। यह होना चाहिए था 'यह दलित चिंतन या मोरल चिंतन क्या है?' यह भी बताया जा सकता है कि इस मोरल…

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भाषाई समाजवाद भी लाना चाहते थे कर्पूरी ठाकुर : संतोष के यादव

पटना। सड़क से संसद तक भोजपुरी को संविधान की आठवीं अनुसूची में शामिल करने की लड़ाई लड़ने वाला संगठन भोजपुरी जनजागरण अभियान के राष्ट्रीय प्रवक्ता संतोष के यादव ने अपने बिहार प्रवास के दौरान बातचीत में  कहा कि वर्तमान सरकार की उदासीनता के कारण भोजपुरी आकादमी, बिहार अपनी बदहाली के दौड़ से गुजर …

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लुनिया बने जैन मीडिया के राष्ट्रीय अध्यक्ष

कोलकाता / इंदौर / जैन समाज के मीडिया और समाज को संगठित कर सरक्षण करने वाला ‘जैन मीडिया सोशल वेलफेयर सोसाइटी’ के संस्थापक एवं भूतपूर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष "वरिष्ठ पत्रकार विनायक अशोक लुनिया" कोलकाता ने एक बार फिर जैन मीडिया की कमान सँभालते हुए राष्ट्रीय अध्यक्ष पदभार ग्रहण कर लि…

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मोर्चे पर मोर्चा ...!!

तारकेश कुमार ओझा  / बचपन में मैने ऐसी कई फिल्में देखी है जिसकी शुरूआत से ही यह पता लगने लगता था कि अब आगे क्या होने वाला है। मसलन दो भाईयों का बिछुड़ना और मिलना, किसी पर पहले अत्याचार तो बाद में बदला , दो जोड़ों का प्रेम और विलेनों की फौज... लेकिन अंत में जोड़ों की जीत।…

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