मीडियामोरचा

____________________________________पत्रकारिता के जनसरोकार

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Blog posts August 2017

छोटे और मध्यम अखबारो के लिए कठिन समय

August 16, 2017

छोटे अखबारों को बचाने लिए हो सरकार की पॉलिसी

आज़ादी के 70 साल बाद अभी वर्तमान समय  में छोटे और मध्यम अखबारों के लिए सबसे कठिन समय है। सरकार की डीएवीपी पाॅलिसी 2016 और जीएसटी  के कारण 90 फीसदी अखबार बंद होने के कगार पर हैं, या …

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न्‍यूज एजेंसी BYN का हुआ शुभारंभ

August 16, 2017

पटना / बिहार की पहली न्‍यूज एजेंसी BYN का शुभारंभ स्‍वतंत्रता दिवस के मौके पर कल पटना में किया गया। इस अवसर पर आयोजित कार्यक्रम को संबोधित करते हुए BYN के संपादक वीरेंद्र यादव ने कहा कि मासिक पत्रिका ‘वीरेंद्र यादव न्‍यूज’ वर्तमान स्‍वरूप में यथावत जारी रहेगी। पत्रिका के कार्य को विस्‍तार कर…

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ब्रॉडकास्ट एडीटर्स असोसिएशन की नयी एक्जीक्यूटिव

August 14, 2017

सुप्रिय प्रसाद नये अध्य़क्ष, अजीत अंजुम महासचिव

दिल्ली/ आज तक और इंडिया टुडे के मैनेजिंग एडीटर सुप्रिय प्रसाद को ब्रॉडकास्ट एडीटर्स असोसिएशन (BEA) यानी न्यूज चैनलों के संपादकों की संस्था का नया अध्य़क्ष चुन लि…

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मीडिया महफिले मुशायरा में छात्र-छात्राओं ने बांधा समां

August 13, 2017

स्वतंत्रता दिवस और अंतरराष्ट्रीय युवा दिवस पर कार्यक्रम

पटना/ कम्युनिटी राइट्स एंड डेवलपमेंट फ़ाउंडेशन (सीआरडीएफ़) और स्नातकोत्तर उर्दू विभाग, पटना विश्वविद्यालय के संयुक्त तत्वावधान में स्वतंत्र…

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15 अगस्‍त से न्‍यूज एजेंसी BYN

August 9, 2017

दिसंबर तक इसे लोकल खबरों का बड़ा न्‍यूज पुल बनाने की कोशिश

पटना/ मासिक पत्रिका ‘वीरेंद्र यादव न्‍यूज’ अपने कार्यक्षेत्र का विस्‍तार करते हुए समाचार एजेंसी के रूप में अपनी कार्यशैली को तब्‍दील कर…

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पत्रकारिता में भी 'राष्ट्र सबसे पहले' जरूरी

August 5, 2017

लोकेन्द्र सिंह/ मौजूदा दौर में समाचार माध्यमों की वैचारिक धाराएं स्पष्ट दिखाई दे रही हैं। देश के इतिहास में यह पहली बार है, जब आम समाज यह बात कर रहा है कि फलां चैनल/अखबार कांग्रेस का है, वामपंथियों का है और फलां चैनल/अखबार भाजपा-आरएसएस की विचारधारा का है। समाचार माध्यमों को…

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लोकसंस्कृति विशेषांक है साहित्य अमृत का नया अंक

August 4, 2017

नयी दिल्ली/ हिन्दी साहित्य की प्रख्यात पत्रिका ‘साहित्य अमृत’ के इस माह लोकसंस्कृति विशेषांक में देश में करीब 36 क्षेत्रों की लोकसंस्कृतियों को अनूठे ढंग से संग्रहीत किया गया है तथा इसके साथ एक-डेढ़ सदी पहले प्रवासियों के साथ विश्व के अनेक भागों में फैली भारतीय संस्कृति और 1947 में…

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क़तरनों में छिपी अर्थव्यवस्था की गिरावट की ख़बरें

August 3, 2017

रवीश कुमार/ बिजनेस अख़बारों में एक चीज़ नोटिस कर रहा हूं। अर्थव्यवस्था में गिरावट की ख़बरें अब भीतर के पन्नों पर होती हैं। कोर सेक्टर में आई गिरावट की ख़बर पहने पन्ने पर छपा करती थी लेकिन इसे भीतर सामान्य ख़बर के तौर पर छापा गया था।…

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दो पत्र- आलेख एक, लेखक अलग-अलग

August 2, 2017

पटना/ संजय कुमार ने अपने फेसबुक पर यह जानकारी दी है-

*मीडिया का देखिये खेल, बिहार पटना से प्रकाशित "स्वराज" और सासाराम से "मीडिया दर्शन", ने छापा एक लेख, एक ही शीर्षक और शब्द क्या अक्षर भी सेम "जवानों को राखी रूपी मिस…

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क्या प्रभाष जोशी होने के लिए रामनाथ गोयनका चाहिए?

August 1, 2017

ये पुस्तक जीवनी कम पत्रकारीय समझ पैदा करते हुये अभी के हालात को समझने की चाहे अनचाहे एक ऐसी जमीन दे देती है, जिस पर अभी प्रतिबंध है…

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