मीडियामोरचा

____________________________________पत्रकारिता के जनसरोकार

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‘समागम’ का नया अंक रेडियो पर

February 20, 2018

आकाशवाणी की सिग्नेचर ट्यून, किसने, कब बनाई शायद आपको ना मालूम हो, आप तो शायद यह भी भूल गए होंगे कि बिनाका गीत माला और सिबाका गीत माला बाद के दिनों में सिबाका-कॉलेगेट गीतमाला के नाम से प्रसारित होता था. कुछ ऐसी ही अनुछुई और भूल चुके यादों को साथ लेकर आया है रिसर्च जर्नल ‘समागम’ का नया अंक ‘रेडियो की वापसी’ के साथ. रिसर्च जर्नल ‘समागम’ अपने निरंतर प्रकाशन का 17वां वर्ष पूर्ण कर 18वें वर्ष में प्रविष्ट कर गया है. 13 फरवरी को विश्व रेडियो दिवस के अवसर पर ‘समागम’ ने फरवरी 2018 का अंक रेडियो पर केन्द्…

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मुज्जफर हुसैनः हम तुम्हें यूं भुला ना पाएंगें

February 14, 2018

13 फरवरी की रात हुआ है वरिष्ठ पत्रकार – स्तंभकार श्री हुसैन का निधन

संजय द्विवेदी/ मुंबई की सुबह और शामें बस ऐसे ही गुजर रही थीं। एक अखबार की नौकरी, लोकल ट्रेन के धक्के, बड़ा पाव और ढेर सी चाय। जिंदगी में कुछ रोमांच नहीं था। इस शहर में बहुत कम लोग थे, जिन्हें अपना कह सकें। पैसे इतने कम कि मनोरंजन के बहुत उपलब्ध साधनों से दूर रहना जरूरत और विवशता दोनों ही थी। ऐसे कठिन…

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सोशल मिडिया वाले देश को बचा लें

January 29, 2018

गुलाम कुन्दनम//

मुज्जफरनगर फिर धधक उठा,
काशगंज मुज्जफरनगर बन रहा,
जो बीज सत्ता के खातिर बोए गये थे
आज वही रक्तबीज बन रहा।

दंगों में किसी को शिकार
तो किसी को शहीदी माला,
गुरूग्राम हिंसा में नाम आपने,…

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मैं नहीं चम्मच चुरायो

January 12, 2018

दिनेश चौधरी/ अनुप्रास के उदाहरण के रूप में हम सब अपने बचपन से 'चाँदी के चम्मच से चटनी चटाई' पढ़ते आ रहे थे। अब चूंकि दसों दिशाओं में पतन का जोर है तो इसे 'चटनी चखते चाँदी की चम्मच चुराई' के रूप में पढ़ा जा सकता है। काम भले ही बुरा हो, अनुप्रास तो बढ़िया सधता है। यह कलाकर्म वाला मामला है, जिसे पश्चिमी कूढ़-मगज कभी नहीं समझ सकते। चौर्य-कला हमारे यहाँ प्राचीन काल से ही अत्यंत विकसित-समृद्ध रही है।…

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‘समागम’ पत्रिका 18वें वर्ष में

January 11, 2018

भोपाल। रिसर्च जर्नल ‘समागम’ ने अपने निरंतर प्रकाशन के 17 वर्ष पूर्ण कर लिया है. 17वें साल का आखिरी अंक जनवरी-2018 का महात्मा गांधी के ग्राम स्वराज एवं विवेकानंदजी के शिकागो भाषण के सवा सौ साल पूर्ण होने पर केन्द्रित है. फरवरी 2018 में ‘समागम’ रेडियो पर केन्द्रित होगा और यह अंक 18वें वर्ष का प्रथम अंक होगा. इस आशय की जानकारी सम्पादक मनोज कुमार ने दी है.…

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"समागम" जीवनभर, मात्र 15सौ में

December 1, 2017

भोपाल/ शोध पत्रिका समागम फरवरी 2018 में 18वे साल में प्रवेश कर रही है। पत्रिका के सम्पादक मनोज कुमार ने बताया कि इस अवसर पर लाइफ मेम्बरशिप 3000 रुपये के स्थान पर मात्र 1500 में दिया जाएगा। साथ में दो मानक स्तर के शोध पत्र का प्रकाशन भी किया जाएगा। समागम यूजीसी से एएप्रूव्ड रिसर्च जर्नल है।…

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पत्रकारिता कैसे करूँ?

November 22, 2017

पूजा प्रांजला //

पत्रकार तो बन रही,

पत्रकारिता कैसे करूँ?

अच्छाइयां मिलती नहीं,

बुराइयाँ कितनी लिखूं ?

ये देश है जितनी बड़ी

कठनाइयां उनसे बड़ी

कठनाइयों को गिन रही

हाथ की चलती घडी ।

पत्रकार तो बन र…

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