मीडियामोरचा

____________________________________पत्रकारिता के जनसरोकार

Print Friendly and PDF

‘आरटीआई से पत्रकारिता' की विधि सिखाती एक पुस्तक

लोकेन्द्र सिंह/ भारत में सूचना का अधिकार, अधिनियम-2005 (आरटीआई) लंबे संघर्ष के बाद जरूर लागू हुआ है, किंतु आज यह अधिकार शासन-प्रशासन व्यवस्था को पारदर्शी बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। जहाँ सूचनाओं को फाइल पर लालफीता बांध कर दबाने की प्रवृत्ति रही हो, वहाँ अब साधारण नागरिक भी सामान्य प्रक्रिया का पालन कर आसानी से सूचनाएं प्राप्त कर सकता है। सूचनाओं तक पहुँच की सुविधा से सबसे अधिक लाभ पत्रकारों को हुआ है। यद्यपि अभी भी पत्रकार सूचना के अधिकार का प्रभावी ढंग से …

Read more

आधुनिक मीडिया

अविनाश कुमार// 

वक्तव्यों की स्वातंत्र मीडिया
जब कर्तव्यों पर कुभलांती है,
आपातकाल और सेंसरशीप में
इसकी गरिमा धुंधलाती है,
“अंधे की लाठी है“
जब इसको बतलाया जाता है,
अखिल समाज का दर्पण है
ये बोध…

Read more

उनकी आंखों में था एक समृद्ध लोकजीवन का स्वप्न


नहीं रहे पद्मश्री से अलंकृत वरिष्ठ पत्रकार पं. श्यामलाल चतुर्वेदी

प्रो. संजय द्विवेदी/ भरोसा नहीं होता कि पद्मश्री से अलंकृत वरिष्ठ पत्रकार- साहित्यकार पं.श्यामलाल चतुर्वेदी नहीं रहे। शुक्रवार सुबह ( 7 दिसंबर,2018) उनके निधन की सूचना ने बहुत सारे चित्र और स्मृतियां सामने ला दीं। छत्तीसगढ़ी राजभाषा आयोग के अध्यक्ष रहे श्री चतुर्वेदी सही मायनों में छत्त…

Read more

एक बार फिर नए सिरे से सुर्खियां

मी टू की होली...!!

तारकेश कुमार ओझा/ अरसे बाद अभिनेता नाना पाटेकर बनाम गुमनाम सी हो चुकी अभिनेत्री तनुश्री दत्ता प्रकरण को एक बार फिर नए सिरे से सुर्खियां बनते देख मैं हैरान था। क्योंकि भोजन के समय रोज टेलीविजन के सामने बैठने पर आज की मी टू से जुड़ी खबरें... की तर्ज पर कुछ न कुछ चैनलों की ओर से नियमित परोसा जाता रहा।  मैं सोच कर परेशान था कि इतने साल तक ठंडे बस्ते में रहने के बाद अचानक यह विवाद फिर सतह पर कैसे आ गया और इस पर दोबारा हंगामा क्यों …

Read more

"विधना नाच नचाबे" फिल्म स्तर पर भाषाई आन्दोलन

यह मगही फिल्म आंचलिक भाषा की फिल्मी दुनिया में खूब धूम मचा रही है          

डॉ राशि सिन्हा (नवादा बिहार)/ प्रभात वर्मा निर्देशित फिल्म विधना नाच नचावे महज एक फिल्म ही नहीं वरन् अपनी लोक संस्कृति की व्याख्या करते हुए अपनी लोक भाषा को पुरानी पीढ़ी से उठाकर नई पीढ़ी तक की पहचान बनाने का बीड़ा है, जो आज सफल होता दिख रहा है। बहुत बार ऐसा देखा जा…

Read more

तेलुगु मीडिया पर केंद्रित है मीडिया विमर्श का नया अंक

भारतीय भाषाओं की पत्रकारिता में अंतरसंवाद और समन्वय के उद्देश्यों से मीडिया विमर्श भारतीय भाषाओं की पत्रकारिता पर शोधपरक सामग्री देने का प्रयास अपने जन्म से ही कर रही है। मीडिया विमर्श ने उर्दू पत्रकारिता और गुजराती पत्रकारिता के बाद तेलुगु मीडिया पर केंद्रित विशेषांक का प्रकाशन किया है।…

Read more

स्त्री चेतना को जगाती कविताएं

एम अफसर खान 'सागर'/ सुहैल मेरे दोस्त उषा राय की पहली कविता संग्रह है। कुल चौव्वालीस (44) कविताओं का यह संग्रह स्त्री जीवन के विभिन्न रूपों को दर्शाती है, जिसमें करुणा, आक्रोश, ममता, दया और यथार्थ शामिल है। इसके साथ इस संग्रह में सामाजिक, पारिवारिक विद्रूपताओं के सरोकार भी परिलक्षित हैं। आजकल कविताएं लिखना बहुत आसान समझा जाता है किंतु कविता इतनी मुश्किल है कि वह अनुभूतियों की छाप से आगे न निकले तो शब्दों के जोड़-तोड़ में बदल जाती है। मगर उषा राय ने इस संग्रह में काव्य पाठक…

Read more

मीडिया साहित्य की और रचनायेँ--