मीडियामोरचा

____________________________________पत्रकारिता के जनसरोकार

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साहित्यकार कोश हो रहा तैयार

मातृभाषा ने उठाया हिंदी का सबसे बड़ा साहित्यकार कोश  बनाने का बीड़ा, भारत में रहने वाले रचनाकार अपना या अपने शहर के साहित्यकारों, कवियों, लेखकों आदि का परिचय प्रेषित कर सकते हैं

इंदौर। हिन्दी का दायरा बढ…

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जनता बेख़बर है

हिंदी के सभी प्रमुख दैनिक अख़बारों के मुख पृष्ठ ढके हैं ....... 

चंद्रेश्वर //

बीत रही जो तिथि वो तेईस जनवरी है

दो हज़ार बीस की 

 

हिंदी के सभी प्रमुख दैनिक अख़बारों के

मुख पृष्ठ ढके हैं 

एक कार्पोरेट के जन्म…

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समागम के 19 वर्ष पूर्ण

पत्रिका का नया अंक ‘शब्द सत्ता की शताब्दी’

भोपाल। पंडित माखनलाल चतुर्वेदी द्वारा संपादित ‘कर्मवीर’ के प्रकाशन के सौ वर्ष 17 जनवरी को पूर्ण हो रहा है और 31 जनवरी को डॉ. भीमराव अंबेडकर द्वारा प्रकाशित-सम्पादित पत्रिका ‘मूक नायक’ के सौ वर्ष पूर्ण हो जाएंगे। ‘शब्द सत्ता की शताब्दी’ शीर्षक से दोनों महत्वपूर्ण प्रकाशनों को केन्द्र में रखकर मीडिया एवं सिनेमा की सुपरिचित शोध पत्रिका ‘समागम’ का जनवरी 2020 अंक तैयार किया…

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सचमुच जन मीडिया की ही वकालत

'जन मीडिया' का जनवरी 2020 अंक

डॉ लीना/ 'जन मीडिया',  जनवरी 2020 का अंक काफी खास है। “हमारा समाज, हमारा शोध” पंचलाइन के साथ सालों से हर महीने प्रकाशित होने वाले 'जन मीडिया' के इस अंक में कश्मीर  मुद्दा, टीवी चैनलों को सेल्फ सेंसरशिप, बीबीसी के शार्ट वेब रेडियो सर्विस के बंद होने तथा नागरिकता (संशोधन) विधेयक और हिंदी अखबार को विषय बनाया है ।…

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रिश्तों का अजायबघर है हिन्दी फिल्म 'दे दे प्यार दे'

संतोष कुमार / भारतीय परंपरा से इतर ब्राह्मण की परंपरा में रिश्तों के कोई मायने नहीं होते, यह हमें कामसूत्र और वेद-पुराण के अध्ययन से ज्ञात होता है। इसी भावना से प्रेरित हो ब्राह्मण लेखक अपनी कहानी गढ़ता है। कामसूत्री परंपरा(जारमय) के कड़ी के रूप में 'दे दे प्यार दे' फिल्म तिरोहित हुई है।…

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‘अक्करमाशी’ के अपराधी को भी दंडित करवाएं चित्रा मुद्गल

'कादम्बिनी' पत्रिका के दिसंबर' 2019 अंक में लेखिका चित्रा मुद्गल के आवरण कथा पर कैलाश दहिया की टिप्पणी   

कैलाश दहिया / 'कादम्बिनी' पत्रिका के दिसंबर' 2019 अंक में द्विज लेखिका चित्रा मुद्गल का आवरण कथा के अंतर्गत बिना शीर्षक का लेख छपा है। इसमें इन्होंने अपने उपन्यास 'पोस्ट बॉक्स नंबर 203- नाला सोपारा' का मर्सिया गा…

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सामाजिक न्याय की वकालत करता "हम बहुजन"

पत्रिका "हम बहुजन" का प्रवेशांक सितंबर 2019

डॉ लीना/ सामाजिक , शैक्षणिक एवं सांस्कृतिक पत्रिका "हम बहुजन" का प्रवेशांक सितंबर 2019, मौजूदा भारत, संवैधानिक अधिकार  (आरक्षण) और बहुजन समाज को लेकर पाठकों के बीच आया है। हम बहुजन के इस अंक में अरुंधती राय, उर्मिलेश, प्रोफेसर एस एन. मालाकार, अली अनवर, अनिल चमडिया, उपेंद्र प्रसाद, डॉ महिपाल, डॉ अनिल जय हिंद, रतनलाल, प्रो यू एल  ठाकुर, डॉ अमिता, संजय कुमार सहित देश के जाने माने…

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मीडिया साहित्य की और रचनायेँ--

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