मीडियामोरचा

____________________________________पत्रकारिता के जनसरोकार

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क्या है हमारी खबरों में

रश्मि रंजन//

 

सोचती हूँ.......

क्या है हमारे विचारों में

क्या है हमारे शब्दों में

क्या है हमारी खबरों में

धर्म/ जाति/ पैसा.....

और भी बहुत कुछ......

भ्रांति, अराजकता, शक्ति

सामर्थ्य युक्त हिंसक- भीड़…

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कोविड से किताबों को खतरा

प्रमोद रंजन / कोविड : 19 ने  किताबों के बाजार को गहरा धक्का पहुंचाया है। इसका अनुमान इससे लगाया जा सकता है कि  वैश्विक स्तर पर 2019 में किताबों का बाजार $ 92.8 बिलियन डालर का था | 2020 में इसके घटकर $ 75.9 बिलियन  डालर रह जाने की उम्मीद है।…

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सच जानने के हमारे अधिकार को किस एक्ट के तहत बाधित किया गया है?

.... ये वही मीडिया संस्थान थे, जिन्होंने डब्लूएचओ द्वारा दी गई मानवाधिकारों का ख्याल रखने की सलाह को प्रकाशित करने से परहेज किया था...

प्रमोद रंजन/ फरवरी, 2020 में जब अखबारों में दुनिया में एक नए वायरस के फैलने की सूचना आने लगी और मेरे सहकर्मियों के बीच इसकी चर्चा होने ल…

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मक्खलि गोसाल और उन का आजीवक चिंतन

कैलाश दहिया/ दलितों में आज महान मक्खलि गोसाल को ले कर जिज्ञासा पैदा हो गई है। ये जानना चाहते हैं मक्खलि गोसाल कौन थे? क्या वे सही में दलित चिंतक थे? उन का आजीवक धर्म क्या था और उस के सिद्धांत क्या थे? कुछ दलित तो गोसाल के दलित होने पर ही सवाल उठाते हैं। उधर, गोसाल पर लिखने वाले प्रक्षिप्तकार भी पैदा हो गए हैं। इन में दलित और गैर दलित दोनों ही हैं। ब्राह्मण का तो काम ही है प्रक्षिप्त और पुराण गढ़ना, इस लिए इस की बात करना बेमानी है। …

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नागरिक पत्रकारिता की आवश्यकता को रेखांकित करती पुस्तक

मीडिया शिक्षक डॉ. पवन सिंह मलिक के सम्पादन में है पुस्तक 

लोकेन्द्र सिंह/ सूचनाओं का आदान-प्रदान करना हम सबका मानव स्वभाव है। इस प्रवृत्ति का एक ही अर्थ है कि प्रत्येक व्यक्ति के भीतर किसी न किसी रूप में ‘एक पत्रकार’ बैठा है। किसी मीडिया संस्थान के प्रशिक्षित पत्रकार की भाँति वह भी समाज को सूचनाएं/समाचार देना अपना दायित्व समझता है या सूचनाएं देने की इच्छा रखता है। इंटरनेट और स्…

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‘राष्ट्रवाद और मीडिया’ पर स्पष्ट दृष्टिकोण पैदा करती पुस्तक

सुरेश हिंदुस्थानी/  राष्ट्रवाद सदैव से चर्चा एवं आकर्षण का विषय रहा है। आज के परिदृश्य में तो यह और अधिक चर्चित है। सब जानना चाहते हैं कि आखिर राष्ट्रवाद क्या है? राष्ट्रवाद पर इतनी बहस क्यों होती है? क्यों कुछ लोग राष्ट्रवाद का विरोध करते हैं? राष्ट्रवाद और मीडिया के बीच क्या संबंध है? राष्ट्रवाद के अध्येयता डॉ. सौरभ मालवीय एवं लोकेंद्र सिंह की पुस्तक ‘राष्ट्रवाद और मीडिया’ ने इन सब प्रश्नों के उत्तर देने का यथासंभव प्रयास किया है। यह पुस्तक सर्वथा उचित समय पर प्…

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साहित्यकार कोश हो रहा तैयार

मातृभाषा ने उठाया हिंदी का सबसे बड़ा साहित्यकार कोश  बनाने का बीड़ा, भारत में रहने वाले रचनाकार अपना या अपने शहर के साहित्यकारों, कवियों, लेखकों आदि का परिचय प्रेषित कर सकते हैं

इंदौर। हिन्दी का दायरा बढ…

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मीडिया साहित्य की और रचनायेँ--

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