मीडियामोरचा

____________________________________पत्रकारिता के जनसरोकार

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"पैसा ही पैसा" जीवन की सच्चाई के करीब

संजय कुमार /पुस्तक चर्चा/ पैसा ही पैसा माधुरी सिन्हा की सद्यः प्रकाशित पुस्तक है जिसे पटना के प्रकाशक नोवेल्टी एंड कंपनी में प्रकाशित किया है. जैसा कि पुस्तक का शीर्षक है ‘पैसा ही पैसा’ तो यह एक ऐसे गरीब बच्चे की कहानी है इसका जीवन गरीबी में व्यतीत हुआ. माधुरी सिन्हा ने अब तक कई उपन्यास लिखे हैं थाम लिया बांहे और पायल इनकी चर्चित उपन्यासों में से एक है थाम लिया बांहे एवं पायल के अलावा भोजपुरी में कई कहानियां भी इन्होंने लिखी है.…

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रिसर्च जर्नल ‘समागम’ का अक्टूबर अंक गांधी साद्र्धशती पर

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भोपाल / महात्मा गांधी के जन्म के डेढ़ सौ वर्ष पूर्ण होने के अवसर पर भोपाल से प्रकाशित रिसर्च जर्नल ‘समागम’ का अक्टूबर अंक ‘गांधी साद्र्धशती’ पर केन्द्रित होगा. लगभग 100 पृष्ठों का यह विशेष अंक महात्मा के विविध आयामों पर केन्द्रित होगा. इस अंक में देश के सुपरिचित लेखकों के साथ शोधार्थियों एवं शिक्षकों का लेखकीय सहयोग मिल रहा है. इस बारे में सम्पादक मनोज कुमार ने बताया कि बीते अक्टूबर 2018 में भी रिसर्च जर्नल ‘समागम’ ने सौ पृष्ठों के…

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अच्छी तरह से जानते हैं हत्यारे

अरविंद भारती की किताब “वे लुटेरे हैं

शहंशाह आलम/  यह विदा कहने का वक़्त है।

     इसलिए हे राजन, आप चौंके अथवा चीहुँकें अथवा विस्मय में न पड़ें।

     इसलिए हे राजन, यह वक़्त कवि अरविंद भारती को विदा कहने का वक़्त नहीं है। न इनकी कविता की विदाई की घोषणा अभी की जानी है। व…

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ढाई हजार वर्ष पूर्व गौतम बुद्ध ने पर्यावरण सुरक्षा का मर्म समझा

लेखक-पत्रकार डॉ ध्रुव कुमार की पुस्तक "बौद्ध धर्म और पर्यावरण "

संजय कुमार/ वर्तमान दौर में पर्यावरण के समक्ष संकट और  ग्लोबल वार्मिंग से पूरी दुनिया चिंतित है । अनेक देशों में बढ़ते औद्योगिकीकरण, शहरीकरण और जनसंख्या विस्फोट के कारण भूमंडलीय तापमान में वृद्धि हो रही है। रही सही कसर मानव की आधुनिक जीवन शैली ने पूरी कर दी है। नतीजा सबके सामने है- कहीं जलवायु परिवर्तन का संकट है,…

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एक पत्रकार के रिपोर्ताजों का कोलाज

जीवन की सच्चाई से रूबरू कराती है डॉ. दीनानाथ साहनी की पुस्तक  ‘तीसरी बस्ती’ 

संजय कुमार/ पुस्तक समीक्षा/ डॉ. दीनानाथ साहनी लम्बे समय से पत्रकारिता से जुड़े है। पत्रकारिता के साथ साथ साहित्य के विभिन्न विद्याओं पर कलम चलायी है। कविता, कहानी, उपन्यास पर खूब लिखा है। उनकी पुस्तक तीसरी बस्ती उनके पत्रकारिता जीवन को रेखांकित करती है। तीसरी बस्ती रिपोर्ताजओं का…

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यह सुधार समझौतों वाली मुझको भाती नहीं ठिठोली

पं. माखनलाल चतुर्वेदी की जयंती (4 अप्रैल,1889) पर विशेष

प्रो. संजय द्विवेदी/ पं.माखनलाल चतुर्वेदी हिंदी पत्रकारिता और साहित्य के क्षेत्र में एक ऐसा नाम हैं, जिसे छोड़कर हम पूरे नहीं हो सकते। उनकी संपूर्ण जीवनयात्रा, आत्मसमर्पण के खिलाफ लड़ने वाले की यात्रा है। रचना और संघर्ष की भावभूमि पर समृद्ध हुयी उनकी लेखनी में अन्याय के खिलाफ प्रतिरोध का जज्बा न चुका, न कम हुआ। वस्तुतः वे एक साथ कई…

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दलित साहित्य आंदोलन का दस्तावेज

कैलाश दहिया / पुस्तक समीक्षा /  'समकालीन हिंदी दलित साहित्य : एक विचार-विमर्श' नाम से वरिष्ठ लेखक सूरजपाल चौहान के समय- समय पर पत्र-पत्रिकाओं में छपे लेखों- आलेखों का संग्रह है। किताब की भूमिका में लेखक ने लिखा है, 'इनका महत्त्व मुझे तब ज्ञात हुआ जब देश के विभिन्न विश्वविद्यालयों से दलित लेखन पर शोध कर रहे छात्र-छात्राओं से समय-समय पर इन विषयों पर जानकारी प्राप्त करने की बात कही गयी। मैं आखिर विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं से खोज - खोज कर कब तक फोटो प्रतियां…

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