मीडियामोरचा

____________________________________पत्रकारिता के जनसरोकार

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हक के प्रेमी का यूं अचानक चले जाना

हकदार के संस्थापक व जुझारू पत्रकार पन्नालाल प्रेमी का 22 अक्तूबर को निधन

ताराराम गौतम/ देश भर में दलित पत्रकारिता में अपनी विशिष्ट पहचान रखने वाले साप्ताहिक अखबार "हकदार" के संस्थापक, स्वामी, श्रेष्ठा और ओजस्वी वक्ता पन्नालाल प्रेमी अब हमारे बीच में नहीं रहे। दलितों, पिछड़ों के हक की आवाज को बुलंद करने वाले प्रेमी जी अनंत में खो गए, लेकिन उन्होंने हक की जो आ…

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खबरों का घोटाला !

कृष्णेन्द्र राय//

खबर है दिलचस्प ।

खबरों का घोटाला ।।

नजर लगी है तेज ।

                               लगाओ टीका काला ।।

खबर है पधारी ।

ले संग अपने आय ।।

होगी हरी जेब ।

अद्भुत है उपाय ।।

कोई छाने ख़ाक ।…

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नोचकारिता के सिपाही

सरस्वती रमेश //

नोचकारिता के सिपाही हैं ये

बिकाऊ -चलताऊ खबरों पर

गिद्ध दृष्टि रखने और

                        चील सा झपट्टा मारने

                        के महारथी हैं ये.

इन्हें तीखी गन्ध सी 

भड़काऊ खबरें चाहिए…

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खबरों की भीड़ में ....!!

तारकेश कुमार ओझा //

खबरों की  भीड़ में , 

राजनेताओं का रोग है .

अभिनेताओं के टवीट्स हैं .

अभिनेत्रियों का फरेब है .

खिलाड़ियों का  उमंग है 

अमीरों की अमीरी हैं  . 

कोरिया - चीन है 

तो अमेरिका और पाकिस्तान भी ह…

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जनता का अख़बार कौन निकालेगा

मनोज कुमार झा //

विज्ञापन ख़बरों की तरह

और ख़बरें विज्ञापनों की तरह

अख़बार में देश-दुनिया का हाल

                               कुछ इसी तरह

 

नँगाझोर बाज़ारवाद के इस दौर में

आदमी को मानो क़त्ल कर

उसकी बोटी-बोटी का स्वा…

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क्या है हमारी खबरों में

रश्मि रंजन//

 

सोचती हूँ.......

क्या है हमारे विचारों में

क्या है हमारे शब्दों में

क्या है हमारी खबरों में

धर्म/ जाति/ पैसा.....

और भी बहुत कुछ......

भ्रांति, अराजकता, शक्ति

सामर्थ्य युक्त हिंसक- भीड़…

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कोविड से किताबों को खतरा

प्रमोद रंजन / कोविड : 19 ने  किताबों के बाजार को गहरा धक्का पहुंचाया है। इसका अनुमान इससे लगाया जा सकता है कि  वैश्विक स्तर पर 2019 में किताबों का बाजार $ 92.8 बिलियन डालर का था | 2020 में इसके घटकर $ 75.9 बिलियन  डालर रह जाने की उम्मीद है।…

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