मीडियामोरचा

____________________________________पत्रकारिता के जनसरोकार

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एक बार फिर नए सिरे से सुर्खियां

मी टू की होली...!!

तारकेश कुमार ओझा/ अरसे बाद अभिनेता नाना पाटेकर बनाम गुमनाम सी हो चुकी अभिनेत्री तनुश्री दत्ता प्रकरण को एक बार फिर नए सिरे से सुर्खियां बनते देख मैं हैरान था। क्योंकि भोजन के समय रोज टेलीविजन के सामने बैठने पर आज की मी टू से जुड़ी खबरें... की तर्ज पर कुछ न कुछ चैनलों की ओर से नियमित परोसा जाता रहा।  मैं सोच कर परेशान था कि इतने साल तक ठंडे बस्ते में रहने के बाद अचानक यह विवाद फिर सतह पर कैसे आ गया और इस पर दोबारा हंगामा क्यों …

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"विधना नाच नचाबे" फिल्म स्तर पर भाषाई आन्दोलन

यह मगही फिल्म आंचलिक भाषा की फिल्मी दुनिया में खूब धूम मचा रही है          

डॉ राशि सिन्हा (नवादा बिहार)/ प्रभात वर्मा निर्देशित फिल्म विधना नाच नचावे महज एक फिल्म ही नहीं वरन् अपनी लोक संस्कृति की व्याख्या करते हुए अपनी लोक भाषा को पुरानी पीढ़ी से उठाकर नई पीढ़ी तक की पहचान बनाने का बीड़ा है, जो आज सफल होता दिख रहा है। बहुत बार ऐसा देखा जा…

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तेलुगु मीडिया पर केंद्रित है मीडिया विमर्श का नया अंक

भारतीय भाषाओं की पत्रकारिता में अंतरसंवाद और समन्वय के उद्देश्यों से मीडिया विमर्श भारतीय भाषाओं की पत्रकारिता पर शोधपरक सामग्री देने का प्रयास अपने जन्म से ही कर रही है। मीडिया विमर्श ने उर्दू पत्रकारिता और गुजराती पत्रकारिता के बाद तेलुगु मीडिया पर केंद्रित विशेषांक का प्रकाशन किया है।…

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स्त्री चेतना को जगाती कविताएं

एम अफसर खान 'सागर'/ सुहैल मेरे दोस्त उषा राय की पहली कविता संग्रह है। कुल चौव्वालीस (44) कविताओं का यह संग्रह स्त्री जीवन के विभिन्न रूपों को दर्शाती है, जिसमें करुणा, आक्रोश, ममता, दया और यथार्थ शामिल है। इसके साथ इस संग्रह में सामाजिक, पारिवारिक विद्रूपताओं के सरोकार भी परिलक्षित हैं। आजकल कविताएं लिखना बहुत आसान समझा जाता है किंतु कविता इतनी मुश्किल है कि वह अनुभूतियों की छाप से आगे न निकले तो शब्दों के जोड़-तोड़ में बदल जाती है। मगर उषा राय ने इस संग्रह में काव्य पाठक…

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समागम का नया अंक बैरागी पर

समागम का जून अंक बाल कवि बैरागी पर केन्द्रित है। इस शोध पत्रिका के सम्पादक मनोज कुमार बताते हैं कि देश के सुपरिचित कवि एवं प्रतिष्ठित राजनेता बालकवि बैरागी अचानक हमारे बीच में नहीं रहे। यह हमारे लिए गहरा आघात है। जाने कब और कैसे हम उनसे जुड़ गए, खबर ही नहीं हुई। ऐसा अपनापन उनसे मिला, जिसका शब्दों में बखान करना मुश्किल सा है। हाँ,  कुछ पोस्टकार्ड, कुछ चिट्ठी और समय समय पर समागम के लिए उनके लिखे लेख धरोहर के तौर पर हमारी पूंजी है। …

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पत्रकार

अविनाश कुमार //

ये कौन पत्रकार है, ये कौन पत्रकार

जिसका पथ है त्याग का ,

सत्य का परमार्थ का,

पीर परमहंस सा,                                                 

जो आता है नजर,

भोग -विलास लालसा का                                     

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समाज से सवाल करता ‘बीमार मानस का गेह’

 संजय कुमार/ अपने तेवर को लेकर चर्चित कवि-आलोचक मुसाफिर बैठा अपनी सद्यः प्रकाशित काव्य संग्रह ‘बीमार मानस का गेह’ से चर्चे में है। रश्मि प्रकाशन, लखनऊ से प्रकाशित ‘बीमार मानस का गेह’ में 38 बेहतरीन कविताओं को चार खंडों में बांटा गया है। प्रसिद्ध हिंदी आलोचक खगेन्द्र ठाकुर ने भूमिका में मुसाफिर बैठा की कविताओं को जीवन के अनुभवों से अनुप्रेरित और मुसाफिर बैठा को संभावनाओं से भरे पूरे ताजा कवि बताया है। प्रसिद्ध कथाकार प्रेमकुमार मणि ने भी दलित कवि-आलोचक मुसाफिर बैठा की कविताओं प…

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