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____________________________________पत्रकारिता के जनसरोकार

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पुरालेख--

राष्ट्रीय सुर्खियां--

सम्पादक

डॉ. लीना


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आकाशवाणी से प्रतिदिन 607 बुलेटिन होते हैं प्रसारित

आज विश्व रेडियो दिवस

आज विश्व रेडियो दिवस है। रेडियो के महत्व के बारे में जागरूकता बढ़ाने के उद्देश्य से यह दिवस मनाया जाता है। इस वर्ष विश्व रेडियो दिवस का विषय है--रेडियो और विविधता। इस अवसर पर संयुक्त राष्ट्र महासचिव अंतोनियो गुतरश ने कहा है कि रेडियो लोगों को करीब लाने में उपयोगी रहा है और सूचना की सहज उपलब्धता के लिए रेडियो ने अपनी खास पहचान बनाई है।…

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पत्रकारिता जुल्म, अत्याचार और अधिकार हनन की कोख से जन्मी है: शाहीन नज़र

ख़ुदा बख्श लाइब्रेरी में भारतीय पत्रकारिता पर प्रो. शाहीन का व्याख्यान

पटना/ ‘‘हिन्दूस्तानी पत्रकारिता: उर्दू, हिन्दी और अंग्रेजी समाचारपत्रों का एक तुलनात्मक अध्ययन’’ के विषय पर दिनांक कल ख़ुदा बख्श लाइब्रेरी में एक व्याख्यान का आयोजन किया गया। प्रो. शाहीन नज़र, आई.टी.एम.आई., नोएडा को इसके लिये विषेष तौर पर आमंत्रित किया गया था।…

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पं. बृजलाल द्विवेदी साहित्यिक पत्रकारिता सम्मान से सम्मानित होंगे श्री कमलनयन पाण्डेय

गांधी भवन में 9 फरवरी को आयोजित होगा मीडिया विमर्श का सम्मान समारोह

भोपाल। मीडिया विमर्श के सारस्वत आयोजन में 9 फरवरी को त्रैमासिक पत्रिका ‘युगतेवर’ (सुलतानपुर, उत्तर प्रदेश) के संपादक कमलनयन पाण्डेय को प्रतिष्ठित साहित्यक पत्रकारिता सम्मान 'पं. बृजलाल द्विवेदी अखिल भारतीय साहित्यिक पत्रकारिता सम्मान' से सम्मानित किया जाएगा। सम्मान समारोह का आयोजन गांधी भवन में सुबह 11:30 बज…

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सामाजिक क्रांति के महानायक पत्रकार : डॉ. अम्बेडकर

(‘मूकनायक’ के 100 साल- 31 जनवरी, 2020 पर विशेष)

संजय कुमार/ डॉ. भीमराव रामजी अम्बेडकर किसी परिचय के मोहताज नहीं है, संविधान निर्माता और दलितों के मसीहा के तौर विख्यात हैं। डॉ. अम्बेडकर के परिचय में एक सफल पत्रकार एवं संपादक शब्द भी जुड़ा है। भारतीय पत्रकारिता के इतिहास में डॉ.अम्बेडकर एक ऐसे महान एवं जुझारू पत्रकार थे जिन्होंने सामाजिक क्रांति का जो बीज पत्रकारिता की दुनिया में बोया था, वह आज भी ‘शिकायत’ के साथ प्रासंगिक है।…

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इसका, उसका, किसका मीडिया

(‘मूकनायक’ के 100 साल- 31 जनवरी, 2020 पर विशेष)

संजय स्वदेश/  बाबा साहब भीम राव अंबेडकर ने 31 जनवरी 1920 को मराठी पाक्षिक ‘मूकनायक’ का प्रकाशन प्रारंभ किया था. सौ साल पहले पत्रकारिता पर अंग्रेजी हुकूमत का दबाव था. दबाव से कई चीजे प्रभावित होती थी. सत्ता के खिलाफ बगावत के सूर शब्दों से भी फूटते थे. आजाद भारत में यह दबाव धीरे धीरे मार्केट ने ले लिया. मार्केट का प्रभाव अप्रत्यक्ष ज्यादा है. इस प्रभाव को समझने के बाद बदलाव की…

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अंबेडकर की पत्रकारिता

(‘मूकनायक’ के सौ साल- 31 जनवरी, 2020 पर विशेष)

डॉ. विद्या शंकर विभूति/ डॉ.भीमराव अंबेडकर प्रशिक्षित अर्थशास्त्री एवं बैरिस्टर थे, पत्रकारिता से उनका कोई लेना-देना नहीं था, लेकिन काल और परिस्थितियों की वजह से उन्हें इस क्षेत्र में आना पड़ा। यों मराठी दलित पत्रिका का इतिहास 1866 से शुरू होता है और सेना से सेवानिवृत्त गोपालबाबा वलंगकर को पहला दलित पत्रकार माना जाता है क्योंकि उन्होंने ही सबसे पहले ‘विटाल व…

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मूक नायक की गूंज सौ वर्ष बाद भी

(‘मूकनायक’ के सौ साल- 31 जनवरी, 2020 पर विशेष)

मनोज कुमार/ प्रकाशन का नाम ‘मूकनायक’ था लेकिन आवाज इतनी बुलंद की आज गुजरते सौ वर्ष में भी  ‘मूकनायक’ का डंका बज रहा है। ‘मूकनायक’ डॉ. भीमराव अम्बेडकर की पत्रकारिता के सौ साल का साक्षी है। आज सौ साल के उत्सव के समय हम ‘मूकनायक’ और बाबा साहेब के उन संघर्षों का स्मरण करते हैं जब उन्होंने कितनी कठिनाई से अपना प्रकाशन आरंभ किया था। निश्चित रूप से बाबा साहेब के समक्ष आर्थिक संकट …

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मूकनायक और अम्बेडकरी पत्रकारिता के 100 साल का उत्सव

नई दिल्ली। 31 जनवरी 1920, ये वो तारीख है जब एक नए अध्याय की शुरुआत हुई थी। इस दिन डॉ. अम्बेडकर ने मराठी भाषा में 'मूकनायक' नाम से पाक्षिक शुरू किया था। इसके सौ साल पूरा होने पर देश की राजधानी दिल्ली में एक भव्य आयोजन होने जा रहा है। यह आयोजन दिल्ली में 15 जनपथ स्थित डॉ. अम्बेडकर इंटरनेशनल सेंटर में होगा। इसका आयोजन 'दलित दस्तक' द्वारा किया जा रहा है। दलित दस्तक मासिक पत्रिका है जो डॉ. अम्बेडकर की पत्रकारिता को आगे बढ़ाने के लिए जून 2012 से प्रकाशित हो रही है। पत्रिका के संपादक अ…

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मीडिया सरकारी योजनाओं को निष्पक्षता से जनता तक पहुँचाने की करे पहल

पत्र सूचना कार्यालय, सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय, भारत सरकार, पटना द्वारा बेगूसराय में क्षेत्रीय मीडियाकर्मियों हेतु एकदिवसीय कार्यशाला  “वार्तालाप” आयोजित

बेगूसराय/ सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय, भारत सरकार की प्रमुख मीड…

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क्षेत्रीय मीडियाकर्मियों के लिए पीआईबी, पटना का वार्तालाप कल

बेगूसराय के जिलाधिकारी करेंगे एकदिवसीय कार्यशाला “वार्तालाप” का उद्घाटन

बेगूसराय/ सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय, भारत सरकार की प्रमुख मीडिया इकाई, पत्र सूचना कार्यालय (पीआईबी), पटना द्वारा बेगूसराय में 24 जनवरी, 2020 को क्षेत्रीय मीडिया कार्यशाला – “वार्तालाप” का आयोजन किया जाएगा। इस एकदिवसीय कार्यशाला का आयोजन कारगिल विजय सभा भवन, समाहरणालय परिसर, बेगूस…

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‘ब्रेकिंग न्‍यूज’ के कोलाहल में समाचार माध्‍यम का ह्रास हुआ है: राष्‍ट्रपति

राष्‍ट्रपति ने 14वां रामनाथ गोयंका विशिष्‍ट पत्रकारिता पुरस्‍कार प्रदान किए

नई दिल्ली/ राष्‍ट्रपति श्री रामनाथ कोविंद ने 20 जनवरी, 2020 को नई दिल्‍ली में आयोजित एक समारोह में 14वां रामनाथ गोयंका विशिष्‍ट पत्रकारिता पुरस्‍कार प्रदान किए। इस अवसर पर राष्‍ट्रपति ने कहा कि रामनाथ गोयंका विशिष्‍ट पत्रकारिता पुरस्‍कार पत्र-पत्रिका, प्रसारण एवं डिजिटल मीडिया…

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आज की भी जरूरत हैं कर्मवीर और मूकनायक

मनोज कुमार/ शब्द सत्ता की शताब्दी मनाते हुए हम हर्षित हैं लेकिन यह हर्ष क्षणिक है क्योंकि महात्मा गांधी जैसे कालजयी नायक के डेढ़ सौ वर्षों को हम चंद महीनों के उत्सव में बदल कर भूल जाते हैं, तब सत्ता को आहत करने वाली पत्रकारिता की जयकारा होती रहे, यह कल्पना से बाहर है। इन सबके बावजूद शब्द की सत्ता कभी खत्म नहीं होने वाली है और ना ही उसकी लालसा स्वयं के जयकारा करने में है। शब्द सत्ता तो दादा माखनलाल चतुर्वेदी की कविता का वह गान है जिसमें दादा लिखते हैं..चाह नहीं मैं सुरबाला के गह…

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आलेख- ख़बरें और भी हैं

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