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 मीडियामोरचा

____________________________________पत्रकारिता के जनसरोकार

नवीनतम ---

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सोशल मीडिया से --

सहज संप्रेषण पत्रकारिता की पहली शर्त

ओम थानवी। पिछले साल मैंने एक टिप्पणी लिखी थी कि जब टीका शब्द हिंदी में है, हिंदी मीडिया ने वैक्सीन प्रयोग क्यों ओढ़ लिया है? बहरहाल, अच्छा लगा कि कुछ अख़बार-टीवी टीका-टीकाकरण भी लिखने लगे। …

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वरिष्ठ पत्रकार कृष्ण किसलय का निधन

रोहतास / रोहतास के वरिष्ठ पत्रकार और वर्तमान में सोनमाटी के संपादक कृष्ण किसलय का आज शाम डेहरी में उनके आवास पर निधन हो गया । वे कई अखबारों में उप संपादक रह चुके थे और सेवा निवृत होने के बाद डेहरी में रह रहे थे और अपने पुराने साप्ताहिक सोनमाटी का पुनः प्रकाशन कर रहे थे। साथ ही सोनमाटी डॉ…

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पर्यावरण संरक्षण से ही बचेगा जीवन : प्रो. संजय द्विवेदी

पर्यावरण दिवस की पूर्व संध्या पर आईआईएमसी में पौधरोपण कार्यक्रम का आयोजन

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कोराना प्रभावित मरीज़ों, परिवारों की मदद कर रहा है समर चैरिटेबल ट्रस्ट

पटना/ कोविड - 19 की दूसरी लहर के दौरान समर चैरिटेबल ट्रस्ट द्वारा फुलवारी शरीफ़ और उसके आसपास के इलाकों में रह रहे सैकड़ों परिवारों के बीच खाद्यान्न सामाग्री का वितरण किया जा रहा है।…

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सम्पादक

डॉ. लीना


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हिंदी पत्रकारिता के प्रवर्तक के नाम पर होगा आईआईएमसी का पुस्तकालय

देश में पं. युगल किशोर शुक्ल के नाम पर बनेगा पहला स्मारक

नई दिल्ली। भारतीय जन संचार संस्थान का पुस्तकालय अब पं. युगल किशोर शुक्ल ग्रंथालय एवं ज्ञान संसाधन केंद्र के नाम से जाना जाएगा। हिंदी पत्रकारिता के प्रवर्तक पं. युगल किशोर शुक्ल के नाम पर यह देश का पहला स्मारक होगा। पुस्तकालय के नामकरण के अवसर पर आईआईएमसी द्वारा 17 जून को "हिंदी पत्रकारिता की प्रथम प्रतिज्ञा: हिंदुस्तानियों के हित के…

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बहुजन मीडिया की जरूरत, आखिर क्यों ?

संजीव खुदशाह/ मीडिया को लोकतंत्र का चौथा खंभा कहा जाता है। मैं इस बात से पूरी तरह सहमत हूँ। लेकिन मीडिया को लोकतंत्र का चौथा खंभा कहलाने के लिए उसका लोकतांत्रिक, विविधता पूर्ण, सोशल बैलेंस से लैस होना चाहिए। लेकिन भारतीय मीडिया किसी राजतंत्र की तरह सिर्फ सवर्णों द्वारा संचालित होती हैं।…

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प्रो. गोविंद सिंह उत्तराखंड भाषा संस्थान में सदस्य नामित

आईआईएमसी के महानिदेशक प्रो. संजय द्विवेदी ने दी शुभकामनाएं

नई दिल्ली। भारतीय जन संचार संस्थान के डीन (अकादमिक) प्रो. गोविंद सिंह को उत्तराखंड भाषा संस्थान में सदस्य के तौर पर नामित किया गया है। इस संस्थान के अध्यक्ष उत्तराखंड के मुख्यमंत्री श्री तीरथ सिंह रावत हैं। आईआईएमसी के महानिदेशक प्रो. संजय द्विवेदी ने इस उपलब्धि पर प्रो. गोविंद सिंह को शुभकामनाएं दी हैं।…

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बिहार वेब मीडिया नियमावली-2021 को मंजूरी

विज्ञापन के लिए सूचीबद्ध होंगे, डब्लूजेएआई ने जताई खुशी, कहा संघर्ष रंग लाया

पटना/ बिहार सरकार प्रिंट- इलेक्ट्रॉनिक मीडिया की तर्ज पर अब वेब मीडिया में विज्ञापन देगी। कैबिनेट ने आज बिहार वेब मीडिया नियमावली-2021 को मंजूरी दी है। बिहार मंत्रिपरिषद की बैठक में सूचना एवं जन संपर्क विभाग के इस प्रस्ताव पर सहमति दे दी गई है। नई नियमवाली में वे मीडिया को पांच कैटेगरी म…

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संभावनाओं भरा है हिंदी पत्रकारिता का भविष्य

30 मई 'हिंदी पत्रकारिता दिवस' पर विशेष

डॉ. पवन सिंह मलिक/ 30 मई 'हिंदी पत्रकारिता दिवस' देश के लिए एक गौरव का दिन है। आज विश्व में हिंदी के बढ़ते वर्चस्व व सम्मान में हिंदी पत्रकारिता का विशेष योगदान है। हिंदी पत्रकारिता की एक ऐतिहासिक व स्वर्णिम यात्रा रही है जिसमें संघर्ष, कई पड़ाव व सफलताएं भी शामिल है। स्वतंत्रता संग्राम या उसके बाद के उभरते नये भारत की बात हो, तो उसमें हिंदी पत्रकारिता के भागीरथ प्रयास को नक…

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पत्रकारिता दिवस का मान बढ़ाया भोपाल-इंदौर ने

30 मई 'हिंदी पत्रकारिता दिवस' पर विशेष

मनोज कुमार/ एक पत्रकार के लिए आत्मसम्मान सबसे बड़ी पूंजी होती है और जब किसी पत्रकार को अपनी यह पूंजी गंवानी पड़े या गिरवी रखना पड़े तो उसकी मन:स्थिति का अंदाजा लगाना मुश्किल हो जाता है. फिर आप किसी भी पत्रकार के लिए कोई दिन-दिवस मनाते रहिए, सब बेमानी है. हर साल हिन्दी पत्रकारिता दिवस 30 मई को मनाते हैं. यह हमारे स्वाभिमान का दिवस है. हिन्दी की श्रेष्ठता का दिवस. अंग्रेजों को देश न…

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पाठकों में विश्वास पैदा करे मीडिया

हिंदी पत्रकारिता दिवस के उपलक्ष्‍य में भारतीय जन संचार संस्थान द्वारा ‘कोरोना काल के बाद की पत्रकारिता’ विषय पर चर्चा

नई दिल्‍ली/ “तन का कोरोना यदि तन से तन में फैला, तो मन का कोरोना भी मीडिया के एक वर्ग ने बड़ी तेजी से फैलाया। मीडिया को लोगों के सरोकारों का ध्‍यान रखना होगा, उनके प…

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कोविड से जान गंवाने वाले पत्रकारों के 67 परिवारों को वित्तीय सहायता की मंजूरी

केंद्र सरकार देगी प्रत्येक परिवार को सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय की पत्रकार कल्याण योजना के तहत 5 लाख रुपये की राशि   

दिल्ली/ सूचना और प्रसारण मंत्री श्री प्रकाश जावड़ेकर के मार्गदर्शन में सूचना और प्रसारण मंत्रालय एवं पत्र सूचना कार्यालय ने स्वत: संज्ञान लेते हुए वर्ष 2020 और वर्ष 2021 में महामा…

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नारद दृष्टि : पत्रकारिता का पथ प्रदर्शक

डॉ. पवन सिंह मलिक/ आज पूरा विश्व भारत की ओर आशा भरी नजरों से देख रहा है, क्योंकि भारत ही विश्व को सही दिशा और दशा देने की क्षमता रखता है। ऐसे में लोकतंत्र का चौथा  स्तम्भ होने के कारण मीडिया जगत की भूमिका और अधिक बढ़ जाती है कि विश्व के समक्ष अपने राष्ट्र की कैसी तस्वीर प्रस्तुत  की जाए। भारत हमेशा से ही ज्ञान आराधक राष्ट्र रहा है। भारत की ज्ञान परंपरा औरों से विशेष इसलिए है क्योंकि यह केवल हमारे बाहर मौजूद लौकिक (मटेरियल) ज्ञान को ही महत्वपूर्ण नहीं मानती बल्कि आत्म-चिं…

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के जी सुरेश सीईसी की शासी निकाय के सदस्य बने

भोपाल/ भोपाल स्थित माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय के कुलपति और मीडिया विशेषज्ञ  डॉ के जी सुरेश को कांर्सोटियम फॉर एजुकेशनल कम्युनिकेशंस (सीईसी) की शासी निकाय का सदस्य नामांकित किया गया है।…

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सूचना की अधिकता से आमजन असमंजस में: डॉ सच्चिदानंद जोशी

जे.सी बोस विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय के संचार एवं मीडिया प्रौद्योगिकी विभाग द्वारा 'मीडिया की बात आपके साथ' साप्ताहिक श्रृंखला के उद्घाटन सत्र में वेबिनार का आयोजन

फ़रीदाबाद/…

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रचना, सृजन और संघर्ष से बनी थी पटैरया की शख्सियत

प्रो. संजय द्विवेदी/ वे ही थे जो खिलखिलाकर मुक्त हंसी हंस सकते थे, खुद पर भी, दूसरों पर भी। भोपाल में उनका होना एक भरोसे और आश्वासन का होना था। ठेठ बुंदेलखंडी अंदाज उनसे कभी बिसराया नहीं गया। वे अपनी हनक, आवाज की ठसक, भरपूर दोस्ताने अंदाज और प्रेम को बांटकर राजपुत्रों के शहर भोपाल में भी एक नई दुनिया बना चुके थे, जो उनके चाहने वालों से भरी थी। 12 मई,2021 की सुबह जब वरिष्ठ पत्रकार श्री शिवअनुराग पटैरया ने अपनी कर्मभूमि रहे इंदौर शहर में आखिरी सांसें लीं तो भोपाल ब…

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आलेख- ख़बरें और भी हैं

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आपकी उपस्थिती

4051411

पुरालेख--

बहस--

समाजवाद की आड़ में जारकर्म समर्थक का चेहरा

कैलाश दहिया/ आर.डी. आनंद ने दिनांक 25 मार्च, 2021को अपनी फेसबुक वॉल पर 'आम्बेडकरवादी और आजीवक' शीर्षक से अपना लेख लगाया है। सर्वप्रथम तो, इन के लेख का शीर्षक ही गलत है। आजीवक एक कं…

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पत्रिकाएँ--

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पत्रकारिता : एक नजर

वेब पत्रकारिता का चमकता भविष्य

अर्पण जैन "अविचल"/  सूचना और संचार क्रांति के दौर में आज प्रिंट और इलेक्ट्रानिक मीडिया के बीच वेब पत्रकारिता का चलन तेजी से बढ़ा है और अपनी पहचान बना ली है. अखबारों की तरह बेव पत्र और पत्रिकाओं का जाल, अंतरजाल पर पूरी तरह बिछ चुका है. छोटे-बड़े हर शहर से अमूमन बेव पत्रकारिता संचालित हो रही है. छोटे-बड़े सभी शहरों के प्रिंट व इलेक्ट्रानिक मीडिया भी वेब पर हैं. इस बात से अंदाजा लगाया जा सकता है कि भारत में थोड़े ही समय मे…

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राष्ट्रीय सुर्खियां--

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