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____________________________________पत्रकारिता के जनसरोकार

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पुरालेख--

राष्ट्रीय सुर्खियां--

सम्पादक

डॉ. लीना


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पत्रकारिता विश्वविद्यालय में 30 सितंबर तक कर सकते हैं आवेदन

हरिदेव जोशी पत्रकारिता और जनसंचार विश्वविद्यालय में स्नातक अंतिम वर्ष के विद्यार्थी भी कर सकते हैं एमए-जेएमसी के लिए आवेदन

जयपुर/ हरिदेव जोशी पत्रकारिता और जनसंचार विश्वविद्यालय (एचजेयू) में अकादमिक सत्र 2020-21 के विभिन्न पाठ्यक्रमों में प्रवेश के लिए आवेदन की अंतिम तिथि बढ़ाकर 30 स…

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61 साल का हुआ दूरदर्शन

15 सितंबर 1959 को प्रारंभ, पहले ‘टेलीविजन इंडिया’  नाम था  

डॉ. पवन सिंह मलिक/ दूरदर्शन, इस एक शब्द के साथ न जाने कितने दिलों की धड़कन आज भी धड़कती है। आज भी दूरदर्शन के नाम से न जाने कितनी पुरानी खट्टी-मिट्ठी यादों का पिटारा हमारी आँखों के सामने आ जाता है। दूरदर्शन के आने के बाद पिछले साठ वर्षों में न जाने कितनी पीढ़ियों ने इसके क्रमिक विकास को जहाँ देखा है वही अपने व्यक्तिगत जीवन में इसक…

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भारतीय भाषाओं के बीच अंतर-संवाद में रुकावट का कारण अंग्रेजी

भारतीय जन संचार संस्‍थान में  ‘भारतीय भाषाओं में अंतर-संवाद’ विषय पर वेबिनार

नई दिल्‍ली/ ’’भाषा का संबंध इतिहास, संस्‍कृति और परम्‍पराओं से है। भारतीय भाषाओं में अंतर-संवाद की परम्‍परा पुरानी है और ऐसा सैकड़ों वर्षों से होता आ रहा है, यह उस दौर में भी हो रहा था, जब वर्तमान समय में प्रचलित भाषाएं अपने बेहद मूल रूप में थीं। श्रीमद् भगवत गीता में समाहित…

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ब्रेकिंग न्यूज के दौर में हिन्दी पर ब्रेक

शहर से इन अखबारों को मोहब्बत नहीं, सिटी उन्हें भाता है!

मनोज कुमार/ ब्रेकिंग न्यूज के दौर में हिन्दी के चलन पर ब्रेक लग गया है. आप हिन्दी के हिमायती हों और हिन्दी को प्रतिष्ठापित करने के लिए हिन्दी को अलंकृत करते रहें, उसमें विशेषण लगाकर हिन्दी को श्रेष्ठ से श्रेष्ठतम बताने की भरसक प्रयत्न करें लेकिन सच है कि नकली अंग्रेजियत में डूबे हिन्दी समाचार चैनलों ने हिन्दी को हाशिये पर ला खड़ा किया …

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मीडिया जगत को आर्थिक पैकेज मिले: एनयूजेआई

देशभर में करेगी आंदोलन

नयी दिल्ली/ नेशनल यूनियन ऑफ जर्नलिस्ट्स (इंडिया) (एनयूजेआई) अखबारों एवं चैनलों में पत्रकारों की छंटनी, वेतन कटौती, फर्जी मुकदमों में गिरफ्तारी, उत्पीड़न, पत्रकार सुरक्षा कानून बनाने और मीडिया कांउसिल के गठन तथा मीडिया जगत के लिए आर्थिक पैकेज की मांग को लेकर देशभर में आंदोलन करेगी।…

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मीडिया प्रोफेशनलों के लिए प्रशिक्षण सह कार्यशाला

दूरस्थ शिक्षा के माध्यम से ‘ भारत में जल संसाधन सेक्टर का सिंहावलोकन‘  विषय पर 05 से 09 अक्तूबर तक

जल शक्ति मंत्रालय का जल संसाधन विभाग, आरडी एंड जीआर जल संसाधनों के नियोजन, विकास एवं प्रबंधन में जल सेक्टर के प्रोफेशनलों के प्रशिक्षण एवं क्षमता निर्माण के क्षेत्र में ‘उत्कृष्टता केंद्र‘ के रूप में कार्य कर रहा है।…

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आईआईएमसी में संवाद व विमर्श का माध्‍यम बनेगा हिंदी पखवाड़ा

‘भारतीय भाषाओं में अंतर-संवाद’ विषय पर चर्चा से 14 सितम्‍बर को होगा आरंभ 

नई दिल्‍ली/ जनसंचार के शिक्षण, प्रशिक्षण तथा शोध के क्षेत्र में गौरवपूर्ण स्थान रखने वाला भारतीय जन संचार संस्‍थान (आईआईएमसी) हर बार की तरह इस वर्ष भी हिंदी पखवाड़े का आयोजन नए अंदाज और नए कलेवर के साथ कर रहा है। कोविड-19 महामारी के कारण बदली परिस्थितियों के बावजूद इस पखवाड़े के आयोजन को…

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के जी सुरेश बने पत्रकारिता विश्वविद्यालय के कुलपति

माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता और संचार विश्वविद्यालय

भोपाल / वरिष्ठ पत्रकार और भारतीय जनसंचार संस्थान (आईआईएमसी) के पूर्व महानिदेशक के जी सुरेश को माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता और संचार विश्वविद्यालय का कुलपति नियुक्त किया गया है। मध्य प्रदेश सरकार के 7 सितंबर को जारी एक आदेश के अनुसार मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने विश्वविद्यालय की महापरिषद के अध्यक्ष के…

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सभी राज्य करें निगरानी समितियों का गठन

सरकारी विज्ञापनों की विषयवस्तु की निगरानी के लिए तीन सदस्यीय समितियों का गठन है अनिवार्य 

सरकारी विज्ञापनों की विषयवस्तु के विनियमन के लिए उच्चतम न्यायालय द्वारा अधिकार प्राप्त समिति (एससीसीआरजीए) की 04 सिंतबर को वर्चुअल बैठक हुई। इस 19वीं वर्चुअल बैठक में महत्वपूर्ण निर्णय लिए गए।…

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न्याय के नाम पर क्या कर रहे हैं चैनल

मीडिया आत्महत्या भी कर रहा है, कई चीज़ों की हत्या भी

विनीत कुमार। इस तस्वीर से हम सबको डरना चाहिए. सारी बातों को पीछे रखकर सोचना चाहिए कि साल 2005 में गड्ढे में गिर गए छोटे प्रिंस को बचाने के लिए जी न्यूज़ जैसे चैनल ने पचास घंटे से ज़्यादा कवरेज दी और बाकी चैनल भी लगातार दिखाते रहे, चैनल की इस कोशिश से प्रिंस तक ऑक्सीजन पहुंच सका और वो ज़िंदा वापस निकाला जा सका. आज वही मीडिया कैसे किसी के ल…

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तो क्यों न मैन पावर ही घटा लें?

अखबारों में छंटनी क्या कम कमाई के कारण है? 

पुष्य मित्र। अखबारों में कर्मियों की छटनी जरूर हो रही है, मगर यह कहना गलत है कि कोरोना काल में अखबारों की आय घटी है। अखबारों की प्रसार संख्या जरूर घटी है, मगर अखबारों का एकनॉमिक्स समझने वाले जानते हैं कि प्रसार बढ़ने का अखबारों की आय बढ़ने से कोई सीधा रिश्ता नहीं है। बल्कि कई दफा प्रसार घटने से अखबारों की लागत घट जाती है और बचत ही हो जाती है।…

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सौ साल का हुआ "आज"

1920 में 5 सितंबर को शुरू हुआ “आज” समाचार पत्र सौ साल बाद भी निरंतर प्रकाशित हो रहा है, पटना से भी 41 वर्षों से निकल रहा है

डॉ. ध्रुव कुमार/ भारत की पत्रकारिता के इतिहास में 1920 ईस्वी का एक विशेष महत्त्व है। इस वर्ष कांग्रेस के कलकत्ता अधिवेशन में गांधी जी के आह्वान पर एक नहीं, दो नहीं, बल्कि ह…

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