मीडियामोरचा

____________________________________पत्रकारिता के जनसरोकार

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Blog posts November 2013

मीडिया कंपनियों ने पहुँचाई मीडिया के सम्‍मान को ठेस : हामिद अंसारी

खबरों के प्रति गंभीरता छोड़कर ताकत, विज्ञापन, ग्‍लैमर, चकाचौंध और पैसे के पीछे भागे

उप राष्‍ट्रपति ने  ‘जर्नलिज्‍म-एथिक्‍स एंड रिस्‍पांसिबिलिटीज’ पुस्‍तक का विमोचन…

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कमसारनामाः कमसार व बार का अक्स

एम. अफसर खां सागर /कमसारनामा में सुहैल खां ने गाजीपुर के संक्षिप्त इतिहास के साथ-साथ सकरवार वंश के क्रम में यहां के भूमिहार ब्राहमणों, कमसार के पठानों और राजपूतों की चार सौ अस्सी साल के  वंशावली तथा इतिहास को संकलित करने का अनूठा काम किया है। सुहैल खां ने प्रस्तुत पुस्तक मे…

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मीडिया संगठन यौन उत्पीड़न निवारण के लिए समिति गठित करें : काटजू

नई दिल्ली। भारतीय प्रेस परिषद (पीसीआई) ने सभी मीडिया संगठनों से कार्यस्थलों पर महिलाओं का यौन उत्पीड़न रोकने और शिकायत निवारण के लिए आंतरिक समितियों के अब तक गठन नहीं किए जाने पर सवाल उठाते हुए सभी मीडिया संगठनों से आंतरिक समितियां गठित करने को कहा है…

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झारखण्ड स्थापना दिवस पर बिरसा मुंडा पुरस्कार-2013" दिये गए

मनोज  सिंह  राजपूत , आफताब आलम सहित कई सम्मानित

मुम्बई। झारखंडी एकता संघ द्वारा  मंबई में झारखण्ड स्थापना दिवस का  आयोजन  किया गया।  इस अवसर पर  विरसा मुंडा सम्मान से विभूतियों को उनके उनके विशेष   योगदान के लिए …

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ओमप्रकाश वाल्मीकि जी के स्मृति दिवस पर स्मृति सम्मान की घोषणा

मध्यवर्गीय व्यक्तिवाद के खिलाफ लगातार लड़ते रहे वाल्मीकि कबीर, नाभादास, अश्वघोष और बुद्ध की परंपरा से जोड़कर वाल्मीकि जी को देखना चाहिए: प्र्रो. मैनेजर पांडेय, ईश्वर और आस्तिकता के घोर विरोधी थे वाल्मीकि जी: बजरंग दलित साहित्य के लिए साहित्यिक मूल्य के बजाए जीवन मूल्य को कसौटी बनाया वाल्मीकि ने: प…

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तरुण तेजपाल के खिलाफ पटना में विरोध मार्च

पटना । महिला पत्रकार के साथ तहलका के चीफ एडिटर तरुण तेजपाल द्वारा किए गए यौन शोषण ने पूरे पत्रकारिता जगत को शर्मशार किया है। इस घटना के खिलाफ, साउथ एशिया वीमेन इन मीडिया, श्रमजीवी प्रत्रकार यूनियन, महिला संगठनों व नागरिकों की ओर से आज पटना के रेडियो स्टेशन के पास से विरोध मार्च का आयोजन किया…

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हिंदी और इसकी बोलियों को उखाड़ने का काम अब मीडिया ने अपने हाथ में ले लिया है

यहाँ यह याद दिलाना ज़रूरी है कि आज जिस हिन्दी को हम देख रहे हैं - उसे ‘पत्रकारिता’ ने ही विकसित किया था

प्रभु जोशी / अँ…

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तो अब अहीर भी पत्रकारिता करेंगे ?

मीडिया में जाति का दंश : पार्ट 3

अमरेन्द्र यादव। वर्ष 2011 में जब माखनलाल चतुर्वेदी राष्‍ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्‍वविद्यालय से एम. ए. (जनसंचार) करने आया, दो सेमेस्‍टर कब निकल गया पता ही नहीं चला. इसके बाद गर्मी की छुटी ह…

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सिनेमा पर एक अच्छी किताब :भारतीय सिनेमा का सफरनामा

पुस्तक चर्चा / अंतर्राष्ट्रीय फिल्मोत्सव गोवा  में सूचना और प्रसारण मंत्री मनीष तिवारी द्वारा लोकार्पित, पुस्तक “भारतीय सिनेमा का सफरनामा”, चर्चे में है। सूचना और प्रसारण मंत्रालय के प्रकाशन प्रभाग द्वारा सद्य:  प्रकाशित  …

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न्यूज चैनल वालों, कानून को अपना काम करने दो...

 हर न्यूज चैनल की एक, दो नहीं बल्कि दर्जनों काली कहानियां हैं... अगर वाकई पत्रकारिता करते हो तो पहले अपनी कहानियां खुद के चैनलों पर चलाने की हिम्मत दिखाओ,…

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बिहार की मीडिया :खबरों को लेकर कितना संवेदनशील ?

आदर्श तिवारी / बिहार की मीडिया जिस बदसूरत ढंग बिहार की सूरत दुनिया के सामने पेश करती है,उससे बिहार के बाहर बिहारियों को ऐसे देखा जाता है जैसे वो किसी दूसरे लोक के प्राणी है। आज भी अगर बिहारियों को कमतर आंका जाता है तो इसके पीछे यहाँ कि मीडिया सबसे ज्यादा कसूरवार है। इसका दर्द…

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अब अख़बारों में संपादक का नाम....ढूंढते रह जाओगे..

संजीव शर्मा / देश के तमाम समाचार पत्रों में संपादक नाम की सत्ता की ताक़त तो लगभग दशक भर पहले ही छिन गयी थी. अब तो संपादक के नाम का स्थान भी दिन-प्रतिदिन सिकुड़ता जा रहा है. इन दिनों अधिकतर समाचार पत्रों में संपादक का नाम तलाशना किसी प्रतियोगिता में हिस्सा लेने या वर्ग पहेली को हल …

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वरिष्ठ पत्रकार अग्निमा दूबे नहीं रही

नई दिल्ली। हिंदी की मूर्धन्य पत्रकार अग्निमा दूबे का शुक्रवार को निधन हो गया। वे पिछले एक साल से कैंसर से जूझ रही थीं। उनके परिवार में माता­पिता, एक बेटी और एक बेटा है। एक बार आपरेशन होने के बाद कैंसर ने अपना रौद्र रूप दिखाया और उन्हें लेकर ही विदा हुआ। हफ्ते भर से उनका इलाज अपोल…

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पत्रकारिता का स्वर्ण युग तो अब आ रहा है

दिलीप मंडल। संपादकों और पत्रकारों की साख (विश्वसनीयता) नष्ट होने पर आप ऐसे क्यों चिंतित हैं, जैसे कि आपकी अपनी साख नष्ट हो गई है? जिसकी साख जा रही है, वह चिंतित है और उसे चिंतित होना चाहिए.…

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संस्कृति संगम के पाँचवें संस्करण का प्रकाशन होगा

पिछले चार संस्करणों के ज़रिए साहित्य, संगीत, सिनेमा, पत्रकारिता, रंगमंच आदि क्षेत्रों में सक्रिय रचनाकर्मियों को एकजुट करने में महत्वपूर्ण भूमिका…

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“भारतीय सिनेमा का सफरनामा” पुस्तक का हुआ लोकार्पण

 गोवा । गोवा में भारत के अंतर्राष्ट्रीय फिल्मोत्सव के आज दूसरे दिन सूचना और प्रसारण मंत्री मनीष तिवारी ने भारतीय पैनोरमा के शुभारंभ…

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न्यायलय द्वारा दंडात्मक कार्रवाई की जानी चाहिए

तरुण तेजपाल पर महिला पत्रकार के यौन उत्पीडऩ आरोप का मामला तूल पकड़ने लगा है। उनके 'प्रायश्चित' की बजाय उनपर दंडात्मक कार्रवाई की माँग ज़ोर पकड़ रही है....…

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मीडिया में जाति का दंश !

कुछ लोग का धर्मान्‍तरण होता है, मेरा जातांतरण हो गया... 

अमरेन्‍द्र यादव/ जाति पर बात करना मुझे भी खराब लगता है। जाति व्‍यक्ति की नही जमात की होनी चाहिए। मै आज नहीं अभी से ही जाति से सम्…

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कवि मथुरा प्रसाद गुंजन स्मृति सम्मान समारोह

सम्मान समारोह- 2013 सह कवि सम्मेलन सम्पन्न 

मुंगेर/ रविवार को बिहार के मुंगेर में कवि मथुरा गुंजन स्मृति सम्मान -2013 सह कवि सम्मेलन का आयोजन किया गया। जिसकी अध्यक्षता गीतकार छंदराज ने की तथा मुख्य अतिथि के रूप में डा. शंक…

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चुनाव में मीडिया का हस्तक्षेप

मनोज कुमार / भारत के स्वाधीन होने के बाद 1952 में पहला आम चुनाव हुआ। इसके बाद संविधान के अनुसार सामान्य परिस्थितियों में प्रत्येक पांच वर्ष बाद निर्धारित समय में चुनाव कराये जाने की व्यवस्था की गई। लोकतंत्र को सुदृढ़ बनाने के लिये जिन संस्थाओं को संविधानवेत्ताओं ने अपनी स्वीकृति …

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