मीडियामोरचा

____________________________________पत्रकारिता के जनसरोकार

Print Friendly and PDF

Blog posts : "सिनेमा"

जय - वीरू का ये कैसा वनवास...!!

May 17, 2016

इन जैसे सहज - सरल पात्रों को फिल्म जगत ने एक तरह से लंबे वनवास पर ही भेज दिया है

तारकेश कुमार ओझा / सत्तर के दशक की सुपरहिट फिल्म शोले आज भी यदि…

Read more

‘सेल्यूलॉयड मैन’ पीके नायर की देन नेशनल फिल्म आर्काइव ऑफ इंडिया

April 5, 2016

जन्मदिन 6 अप्रैल पर उनको याद करते हुए

मनोज कुमार/ 50 साल पहले लगभग-लगभग 32-35 साल का एक युवा बनाना तो फिल्में चाहता था लेकिन उसकी रूचि सिनेमा के इतिहास को संजोने की हुई. एक बड़े सपने को लेकर छोटी सी कोशिश करने वाले परमेश …

Read more

14 मार्च : तारीख बेमिसाल

March 12, 2016

पहली बोलती फिल्म आलम आरा के बरक्स भारतीय सिनेमा का सफर 

मनोज कुमार/ हर दिन गुजरने के साथ तारीख बदल जाती है. यह क्रम हमारे जीवन में नित्य चलता रहता है किन्तु कुछ तारीखें बेमिसाल होती हैं. बेम…

Read more

दुआ यही कर सकते हैं कि कोई ‘हैदर’ पैदा ही ना हो

February 6, 2015

फिल्म 'हैदर' पर कवि-आलोचक कैलाश दहिया की टिप्पणी प्राप्त हुई है श्री दहिया ने फिल्म को 'जारकर्म' से जोड़ कर देखा है और उसी दृष्टिकोण से आलोचना की है…

Read more

फिल्म 'पी के’ के विरोध के निहितार्थ

January 1, 2015

निर्मल रानी/ भारत सरकार द्वारा नियुक्त भारतीय फिल्म सेंसर बोर्ड द्वारा फिल्म को प्रदर्शित करने की मंज़ूरी मिलने के बावजूद कुछ धर्मगुरुओं व हिंदूवादी संगठनों द्वारा राजकुमार हिरानी द्वारा निर्देशित तथा आमिर खान द्वारा निर्मित फिल्म पीके के प्रदर्शन का विरोध किया जा रहा है। कुछ ज…

Read more

इस देश के शासवर्ग का चरित्र जनता के साथ धोखाधड़ी का है : प्रो. आनंद तेलतुमड़े

December 7, 2014

छठे पटना फिल्मोत्सव प्रतिरोध का सिनेमा की शुरुआत 

पटना। 'बोल की लब आजाद हैं तेरे’ इस आह्वान के साथ कालीदास रंगालय में छठे पटना फिल्मोत्सव प्रतिरोध का सिनेमा उद्घाटन हुआ। यह त्रिदिवसीय फिल्मोत्सव प्रसिद्ध चि…

Read more

कभी झंडा... तो कभी ट्रांजिसटर...!!

August 16, 2014

बाजार का चर्चित फंडा ब्रांडिंग , पैकेजिंग और मार्केटिंग के जरिए ऐसे बाजीगर कूड़ा - करकट भी सोने के भाव बेचने का माद्दा रखते हैं…

Read more

एक अनोखा प्रतिरोध !

August 1, 2014

दो युवा भाइयों द्वारा बनायी गयी छोटी सी फ़िल्म "कंडोम लीड”

यादवेन्द्र / 8 जुलाई से मिस्र और इस्राइल के बीच सैंडविच बनी हुई छोटी सी पर दुनिया की सबसे ज्यादा घनी आबादी वाली गाज़ा पट्टी अखबारो…

Read more

खान तिकड़ी पर मीडिया की मेहरबानी का आखिर राज क्या है...!!

February 23, 2014

तारकेश कुमार ओझा / किस्मत मेहरबान तो गधा पहलवान वाली कहावत को शायद बदलते दौर में बदल कर मीडिया मेहरबान तो गधा पहलवान करने की जरूरत है। क्योंकि व्यवहारिक जीवन में इसकी कई विसंगितयां देखने को मिल रही है। इसकी वजह शायद पैसे से सत्ता और सत्ता से पैसा वाले चलन का समाज के हर क्…

Read more

दो कौड़ी की फिल्में भी सौ करोड़ क्लब में ...!!

December 23, 2013

मीडिया आज बेहयाई से घटिया फिल्मों को भी तथाकथित सौ करोड़ क्लब में शामिल कराने का ठेका ले रहा है....

तारकेश कुमार ओझा /…

Read more

एक बेहतरीन संपादक भी थे ऋतुपर्णो

May 31, 2013

पलाश विश्वास / महज 49 साल की आयु में हाल के वर्षों में बंगाल के सबसे सक्रिय और सबसे चर्चित फिल्मकार ऋतुपर्णों  घोष नींद में चले गये।…

Read more

फि‍ल्‍मांकन स्‍थल के रूप में देश को बढ़ावा देना भारत का उद्देश्य

May 20, 2013

कांस फि‍ल्‍म महोत्‍सव भी मना रहा है भारतीय सि‍नेमा का शताब्‍दी वर्ष

भारतीय सि‍नेमा अपने शताब्‍दी वर्ष में एक वैश्‍वि‍क पद्चि‍न्‍ह स्‍थापि‍त करने के उद्देश्‍य से फ्रांस में कांस फि‍ल्‍म मह…

Read more

राजनीति का जांबी कारोबार

May 17, 2013

मुर्दों के लिए सारां जहां, जिंदो को दो गज जमीन नहीं! हम लोग भी मुर्दाफरोश हैं

भारतीय राजनीति के इस जांबी कारोबार के मद्देनजर 'गो गोवा गान' फिल्म को देखें, तो कामेडी की हवा निकल ज…

Read more

भारतीय सिनेमा के पुरोधा दादा साहेब फालके हैं या तोरणे

April 30, 2013

किसी मजदूर को भारत का पहला फिल्म निर्माता होने का श्रेय भला क्यूं दिया जाए?

अश्विनी कुमार पंकज /  भारत में सिनेमा के सौ साल का जश्न शुरू हो गया है।…

Read more

14 blog posts