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____________________________________पत्रकारिता के जनसरोकार

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Blog posts : "पुस्तक समीक्षा"

सजग पत्रकार की दृष्टि में मोदी-युग

June 24, 2017

रमेश नैयर/ पुस्तक ‘मोदी युग’ का शीर्षक देखकर प्रथम दृष्टया लगा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की स्तुति में धड़ाधड़ प्रकाशित हो रही पुस्तकों में एक कड़ी और जुड़ गई। अल्पजीवी पत्र-पत्रिकाओं के लेखों के साथ ही एक के बाद एक सामने आ रही पुस्तकों में मोदी सरकार की जो अखंड वंदना चल रही है, वो अब…

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सामाजिक प्रतिबद्धताओं से सजा व्यंग्य संग्रह: शोरूम में जननायक

March 11, 2017

एम. एम. चन्द्रा/ अनूप मणि त्रिपाठी का पहला व्यंग्य संग्रह “शोरूम में जननायक” में लगभग तीन दर्जन व्यंग्य है. व्यंग्य संग्रह में भूमिका नहीं है, सुधी पाठक इससे अंदाज लगा सकते है कि नव लेखन के सामने आने वाली चुनौतियां कम नहीं होती. पुस्तक में भूमिका का न होना एक तरह अच्छा ही हुआ ह…

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इतिहासबोध से वर्तमान विसंगतियों पर प्रहार

December 16, 2016

सागर मंथन चालू है

समीक्षक: एम् एम् चन्द्रा/ व्यंग्य की दुनिया में चार पीढ़ी एक साथ सक्रिय है. यह व्यंग्य क्षेत्र के लिए शुभ संकेत है. मैं व्यक्तिगत तौर पर इस बात का खंडन करता हूँ कि व्यंग्य के लिए यह समय अन्धकार का समय है या चरणवं…

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कल्लू मामा जिंदाबाद

April 2, 2016

समीक्षक - आरिफा एविस / सोशल मीडिया पर एक चरित्र “कल्लू मामा” रोज आता है बिंदास किसी की परवाह किये बिना लिखता है तब मैंने इस कल्लू मामा को समझने की कोशिश की .... हालाँकि मैंने आज तक इनको न देखा है न सुना बस फेसबुक पर ही पढ़ा है.....तब मैंने व्यंग्यकार सुभास चंदर का …

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बिहारी राजनीति की सेक्स यात्रा

February 23, 2016

रमणिका गुप्ता की आत्मकथा “आपहुदरी” पटना के पत्रकार वीरेंद्र कुमार यादव की नजर से

हिन्दी की लेखिका और बिहार विधान मंडल की पूर्व सदस्य रमणिका गुप्ता की अपनी संघर…

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समय की निराशा को दूर करने और मनुष्य की शून्यता को भरने की ज़िद

February 13, 2016

'रेत पर लिखी इबारतें (जाबिर हुसेन का रचना-कर्म) और 'कोलाहल में शब्दों की लय' (जाबिर हुसेन की क़लम) पुस्तकों की समीक्षा

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जहाँ शब्द कभी बासी नहीं होते

January 31, 2016

कविता संग्रह- 'राजधानी में एक उज़बेक लड़की' की समीक्षा

समीक्षक- शहंशाह आलम/ कविता सड़ रहे समय के सबसे अधिक विरुद्ध रहती है। यह किसी भी कवि-समय के लिए सुखद होता है, जब उस कवि की कवि…

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भावों की एक सच्ची अभिव्यक्ति

October 24, 2015

मैं भारत हूँ’  युवा पत्रकार और लेखक लोकेन्द्र सिंह की प्रथम काव्यकृति है

गिरिजा कुलश्रेष्ठ। ‘मैं भारत हूँ’ युवा पत्रकार और लेखक लोकेन्द्र सि…

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दीनदयाल जी की याद दिलाती एक किताब

August 5, 2015

लोकेन्द्र सिंह/  भारतीय जनता पार्टी के प्रति समाज में जो कुछ भी आदर का भाव है और अन्य राजनीतिक दलों से भाजपा जिस तरह अलग दिखती है, उसके पीछे महामानव पंडित दीनदयाल उपाध्याय की तपस्या है। दीनदयालजी के व्यक्तित्व, चिंतन, त्याग और तप का ही प्रतिफल है कि आज भारतीय जनता पार्ट…

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दलितों के खाद्य जीवन को रेखांकित करता:‘अन्न हे अपूर्णब्रह्म’

April 5, 2015

एक ऐसा दस्तावेज जो वर्ण,जाति व धार्मिक व्यवस्था की पोल खोलता दिखता है और उनके खान-पान को रेखांकित करता है

पुस्तक समीक्षा / सं…

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ऐतिहासिक है नरेंद्र मोदी पर लिखी प्रकाश हिन्दुस्तानी की पुस्तक

July 26, 2014

समीक्षा/ बी.पी. गौतम /प्रकाश हिन्दुस्तानी, यह नाम स्वयं ही एक ब्रांड है। अपने लेखन के चलते पत्रकारिता जगत में बहुचर्चित प्रकाश हिन्दुस्तानी का नाम व चेहरा हर पाठक पहचानता है, उनके बारे में जितनी अधिक बात की जाये, उतनी कम ही रहेगी, इसलिए पिछले दिनों उनके द्वारा लिखी गई…

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अभूतपूर्व चुनाव का अहम दस्तावेज 'मोदी लाइव'

June 25, 2014

पत्रकार संजय द्विवेदी की पुस्तक है 'मोदी लाइव'

लोकेन्द्र सिंह / सोलहवीं लोकसभा का आम चुनाव अपने आप में अनोखा था। भारतीय लोकतंत्र के इतिहास में यह पहला मामला था जब समस्त राजनीतिक दल सत्ताधारी पार्टी…

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जिन्दगी के तल्खी को पुकारती आवाज़-ए-ज़मीर

March 26, 2014

पुस्तक समीक्षा/  एम. अफसर खां सागर/ ‘आवाज़-ए-ज़मीर’ हुकम सिंह ‘ज़मीर’ के 103 गजलों का संग्रह है। ज़मीर साहब पुलिस विभाग में उच्च पद पर रहते हुए भी इंसानी जिन्दगी के हर पहलू पर बड़े ही फलसफाना अंदाज में शेर कहें हैं। पुलिस सेवा के लिए राष्ट्रपति पदक,…

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कमसारनामाः कमसार व बार का अक्स

November 28, 2013

एम. अफसर खां सागर /कमसारनामा में सुहैल खां ने गाजीपुर के संक्षिप्त इतिहास के साथ-साथ सकरवार वंश के क्रम में यहां के भूमिहार ब्राहमणों, कमसार के पठानों और राजपूतों की चार सौ अस्सी साल के  वंशावली तथा इतिहास को संकलित करने का अनूठा काम किया है। सुहैल खां ने प्रस्तुत पुस्तक मे…

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पत्रकारिता में अपना कैरियर बनाइए

October 8, 2013

व्यवहारिक पत्रकारिता पर ज्यादा जोर

अखबारी पत्रकारिता पर अनेक किताबें बाजार में हैं। इन्हीं में एक किताब और जुड़ गई है- "पत्रकारिता में अपना कैरियर बनाइए"। यह बाकी से इस मायने में अलग है कि इसमें सिद्धांत पर कम अख़बारों की व्यावहारिक पत्रकारि…

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ईश्वर से संवाद करती कविताएं

September 25, 2013

‘सत्य-स्वन ’ रामकृपाल शर्मा के जीवन की अन्तिम कृति

एम. अफसर  खां सागर/ रामकृपाल शर्मा के जीवन की अन्तिम कृति ‘सत्य-स्वन ’ लघु का…

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अमर शहीद जगदेव प्रसाद: जीवन और विचार

September 16, 2013

 डा0 राधाकृष्ण सिंह / पुस्तक-समीक्षा/ इधर युवा लेखक जीतेन्द्र वर्मा की नई पुस्तक अमर शहीद जगदेव प्रसाद: जीवन और विचार…

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विस्मृत संत की खोज

September 6, 2013

एम.अफसर  खान सागर / विनय कुमार वर्मा द्वारा लिखित पुस्तक ‘संत नरहरिदास ’ एक महान अज्ञात संत पर शोध कार्य करके बड़ी बारीकी से लिखा गया ग्रंथ है।…

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समभाव के पुनर्जागरण हेतु

August 7, 2013

एम. अफसर खां सागर/ ‘प्राचीन संस्कृति में एकता के सूत्र’ पुस्तक में डा एस के मिश्रा ने सामाजिक सौहार्द के सूत्रों को प्राचीन संस्कृति के बीच से खोजने का प्रयास किया है।…

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लेखकों के संसार में

July 24, 2013

लेखकों और समकालीन लेखन परिदृश्य को समझें -पहचानने का अवसर

कनक जैन / हिन्दी में साक्षात्कार पुरानी किन्तु उपेक्षित विधा है। साक्षात्कार आम तौर पर राजनेताओं और फ़िल्मी अभिनेताओं के ही छपते हैं। …

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