मीडियामोरचा

____________________________________पत्रकारिता के जनसरोकार

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Blog posts : "General"

एक सपने के सच हो जाने जैसा

जिस विश्वविद्यालय में कभी विद्यार्थी हुआ करता था, आज कार्यवाहक कुलपति के पद पर आसीन है संजय द्विवेदी

मनोज कुमार/ वो…

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इस बुरे दौर के बाद अपनी विश्वसनियता पर फिर गौर करे प्रिंट मीडिया

अबरार मुल्तानी/ मैं भी ऐसे दौर से गुजरा हूँ जब हर लिखी बात को सही मानता था। फिर धीरे धीरे पता चला कि न्यूज़ पेपर की हर ख़बर सत्य नहीं होती। फिर सोशल मीडिया के आने से ख़बरों के भी चरित्र होतें हैं यह पता चला और अखबारों की भी अपनी विचारधारा होती है यह भी मालूम हुआ। कई लोग अब ख़बर…

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कोरोना पर स्वास्थ्य मंत्री के बयान को मीडिया में पर्याप्त जगह नहीं: नायडू

राज्यसभा के सभापति ने सदन में कहा कि मीडिया का ध्यान सनसनीखेज हैडलाइनों पर

नयी दिल्ली/ राज्यसभा के सभापति एम वेंकैया नायडू ने सदन में कोरोना वायरस पर स्वास्थ…

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कुशाभाऊ ठाकरे पत्रकारिता विश्वविद्यालय के नए कुलपति का चयन क्यों है महत्त्वपूर्ण

प्रो.संजय द्विवेदी/ हिंदी पत्रकारिता के विनम्र सेवकों की सूची जब भी बनेगी उसमें प्रो. बलदेव भाई शर्मा का नाम अनिवार्य रूप से शामिल होगा। ऐसा इसलिए नहीं कि उन्हें रायपुर स्थित कुशाभाऊ ठाकरे पत्रकारिता एवं जनसंचार विश्वविद्यालय का कुलपति नियुक्त किया गया है। बल्कि इसलिए…

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सूचना और प्रसारण की मीडिया इकाइयां टीम की तरह कार्य करें

हैदराबाद/ सूचना और प्रसारण मंत्री प्रकाश जावड़ेकर ने मंत्रालय के तहत सभी मीडिया इकाईयों को सूचना और प्रसारण टीम के रूप में कार्य करने को कहा है। वे आज सवेरे हैदराबाद में मंत्रालय की दक्षिण क्षेत्र की मीडिया इकाईयों के अधिकारियों के दो दिन के सम्मेलन को वीडियो कांफ्रेंसिंग के जरिये संब…

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आकाशवाणी से प्रतिदिन 607 बुलेटिन होते हैं प्रसारित

आज विश्व रेडियो दिवस

आज विश्व रेडियो दिवस है। रेडियो के महत्व के बारे में जागरूकता बढ़ाने के उद्देश्य से यह दिवस मनाया जाता है। इस वर्ष विश्व रेडियो दिवस का विषय है--रेडियो और विविधता। इस अवसर पर संयुक्त राष्ट्र महासचिव अंतोनियो गुतरश ने कहा है कि रेडियो लोगों क…

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ब्राह्मणवादी स्ट्रक्चर से दरनिकार कर दिए गए पत्रकार एक दिन बेहतरीन इतिहास लिखेंगे

अभिमन्यू कुमार साहा/ मुख्यधारा की मीडिया से तमाम योग्यताओं के बावजूद दरनिकार कर दिए गए दलित-पिछड़े पत्रकार आज कीर्तिमान रच रहे हैं.…

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पर्वत कुमार दास के निधन पर प्रेस परिषद ने जताया शोक

प्रेस परिषद के  मौजूदा सदस्य थे श्री दास  

नयी दिल्ली/ भारतीय प्रेस परिषद ने अपने मौजूदा सदस्य पर्वत कुमार दास के निधन पर शुक्रवार को शोक जताया। परिषद की ओर से जारी विज्ञप्ति में कहा गया है, “भारतीय प्रेस परिषद अप…

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बाबा साहब आम्बेडकर की पत्रकारिता

‘दलित दस्तक’ नवम्बर की कवर स्टोरी है- बाबा साहब डॉक्टर भीमराव आम्बेडकर की पत्रकारिता यानी ‘मूकनायक’

संजय कुमार /

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पटना पुस्तक मेला 2019 में अंबेडकर और गांधी चर्चा में

हालांकि अंबेडकर की पुस्तकों को लेकर पाठकों के आकर्षण की मीडिया चर्चा नहीं करता

संजय कुमार / पटना पुस्तक मेला 2019 में गांधी और अंबेडकर चर्चे में हैं।…

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वहां पहुंचेंगे, जहां हम कभी नहीं गए

पत्रकार अम्बरीश कुमार की नई पुस्तक “डाक बंगला”

सतीश जायसवाल/ यात्रा अनुभवों ने हमारे रचना साहित्य को अपनी अदेखी-अजानी दुनिया के अमूर्तन को साक्षात उपस्थितियों से भरा-पूरा किया है। वहां पहुंचाया, जह…

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अख़बार के लिए यह एक भूल सुधार है !

पटना / एक अख़बार के स्थानीय सम्पादक को, पूरी सम्पादकीय टीम को, उसके संवाददाताओं को, फलानों ढिमकानों को,  पूरे दिनभर या उससे पहले के भी कुछ दिनों में लालबहादुर शास्त्री जी याद नहीं आते !  …

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क्या प्रायोजित खबरें हैं?

लीना/ पटना / दैनिक भास्कर पटना ने पहले पन्ने पर लीड स्टोरी बनाई गई है तो हिंदुस्तान, पटना ने भी अंदर के पन्ने पर तीन कालम में ठीक-ठाक खबर दी है. और जगह भी खबर है. खबर है- जुगाड़ से तैयार की गई नाव में सवार सांसद रामकृपाल यादव के गड्ढे में गिरने और फिर डूबने से बचने की. तस्वीरें भी है…

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सचमुच एक असंभव संभावना हैं गांधी!

महात्मा गांधी की 150 वीं जयंती वर्ष प्रसंग

प्रो. संजय द्विवेदी/ इतिहासकार सुधीर चंद्र की किताब ‘गांधी एक असंभव संभावना’ को पढ़ते हुए इस किताब के शीर्षक ने सर्वाधिक प्रभावित किया। यह शीर्षक कई अर्थ लिए …

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पत्रकारिता के क्षेत्र में पं. दीनदयाल उपाध्याय

जयंती, 25 सितंबर पर विशेष

लोकेन्द्र सिंह/ पंडित दीनदयाल उपाध्याय बहुआयामी व्यक्तित्व के धनी थे। सादगी से जीवन जीने वाले इस महापुरुष में राजनीतिज्ञ, संगठन शिल्पी, कुशल वक्ता, समाज चिंतक, अर्थचिंतक, शिक्षाविद्, लेखक और पत्रकार सहित कई प्…

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निर्भीक पत्रकारिता का सर्वोच्च स्वर: बी बी सी

तनवीर जाफ़री/ इस समय विश्व का अधिकांश भाग हिंसा, संकट, सत्ता संघर्ष, साम्प्रदायिक व जातीय हिंसा तथा तानाशाही आदि के जाल में बुरी तरह उलझा हुआ है। परिणाम स्वरूप अनेक देशों में आम लोगों के जान माल पर घोर संकट आया हुआ है। मानवाधिकारों का घोर हनन हो रहा है। लाखों लोग विस्थापित होकर अप…

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मीडिया के अंदर और बाहर छोड़ता सवाल जन मीडिया

संजय कुमार / जन मीडिया का सितंबर 2019 का अंक कई खास शोध आलेखों  से चर्चा में है। टीवी पत्रकारिता की जान ‘एंकर’ पर खास स्टोरी है- 'एंकर नियंत्रित विचार-विमर्श का तंत्र' तो वहीं 'लोकसभा चुनाव 2019 पर सोशल मीडिया का असर' है। ज्वलंत मुद्दा  'जलवायु परिवर्तन पर दक्षिणपंथी मीडिया का नजरि…

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अगले वर्ष मीडिया शिक्षा सौ साल पूरे करने जा रहा

मीडिया की सच्ची तस्वीर प्रस्तुत करता जन मीडिया पत्रिका का अगस्त 19 अंक

संजय कुमार/ जन मीडिया का अगस्त अंक यानी 89 वीं में मीडिया शोध की तस्वीर हर अंक की तरह ही ख़ास …

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पत्रकारिता की लाज: रेमन मैग्सेसे अवॉर्ड विजेता रवीश कुमार

तनवीर जाफ़री/ आपातकाल के समय 1975 में तत्कालीन प्रधानमंत्री श्रीमती इंदिरा गाँधी ने एक बार देश के चौथे स्तंभ का गला घोंटने का प्रयास करते हुए प्रेस पर सेंसर लागू किया था। इंदिरा गाँधी की इस तानाशाही का पूरे देश में ज़बरदस्त विरोध हुआ था। विपक्ष,मीडिया व देश के आम लोग सभी आपातकाल क…

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क्यूं दूर होते जा रहे हैं ‘किताबों’ से

विश्व पुस्तक तथा कापीराइट दिवस-23 अप्रैल विशेष

निर्भय कर्ण/ विलियम स्टायरान ने कभी कहा था कि ‘एक अच्छी किताब के कुछ पन्ने आपको बिना पढ़े ही छोड़ देना चाहिए ताकि जब आप दुखी हों तो उसे पढ़ कर आपको सुकुन प्राप…

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