मीडियामोरचा

____________________________________पत्रकारिता के जनसरोकार

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Blog posts : "मुद्दा "

कौन कहता है कि मीडिया बिक गया है?

आलोक श्रीवास्तव/ एक स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव के लिए किसी देश के संस्थानों की निष्पक्षता की आवश्यकता होती है -- एक स्वतंत्र प्रेस, एक स्वतंत्र न्यायपालिका, और एक पारदर्शी चुनाव आयोग जो उद्देश्यपूर्ण और तटस्थ हो।…

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चौथे स्तम्भ की औक़ात बताते "अराजक माननीय"

तनवीर जाफ़री/ माना जाता है कि विश्व के सबसे बड़े लोकतंत्र भारत वर्ष की बुनियाद चार मज़बूत स्तम्भों पर टिकी हुई है। यह चार स्तम्भ हैं विधायिका, कार्यपालिका, न्‍यायपालिका और मीडिया (प्रेस)। लोकतंत्र की सफलता के लिए इन चारों स्तंभों का मज़बूत होना बेहद ज़रूरी है । मज़बूती का अर्थ यही है क…

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मास मीडिया को बड़े स्तर पर नियंत्रित किया जा रहा: महुआ मोइत्रा

टीएमसी सांसद महुआ मोइत्रा लोकसभा में दिये अपने पहले भाषण से ही पूरे देश में चर्चित हो गयी हैं। इस भाषण में वह  हमलावर दिखीं। भाषण में वे कई मुद्दों के साथ आज की मीडिया की स्थिति पर भी बोलीं। अंग्रेज़ी में दिये गये उनके इस सम्पूर्ण भाषण का वरिष्ठ पत्रकार राघवेंद्र दुबे ने हिंदी में अनुवाद किया है।…

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हमें तय करना है, सोशल मीडिया देश की वास्तविक आवाज बने

श्याम नारायण रंगा ‘अभिमन्यु’/ सोशल मीडिया बाकी परम्परागत मीडिया से एक जुदा साधन है। इसके द्वारा अपने मोबाइल और कम्प्यूटर पर एकांत में बैठा व्यक्ति पूरी दुनिया से जुडा रह सकता है। फेसबुक, वाॅट्सअप, लिंकडइन, इन्स्टाग्राम आदि आदि सोशल मीडिया के बहुत सषक…

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हिन्दी पत्रकारिता: कहां से चले थे, कहां पहुंचे?

हिन्दी पत्रकारिता दिवस पर विशेष  

मनोज कुमार/ अपने इतिहास का स्मरण करना भला-भला सा लगता है. और बात जब हिन्दी पत्रकारिता की हो तो वह रोमांच से भर देता है. वह दिन और वह परिस्थिति कैसी होगी जब पंडित जुगलकिशोर शुक्ल ने हिन्दी अख…

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पत्रकारिता की प्राथमिकता को टटोलने का समय

हिंदी पत्रकारिता दिवस, 30 मई पर विशेष 

लोकेन्द्र सिंह/ 'हिंदुस्थानियों के हित के हेत' इस उद्देश्य के साथ 30 मई, 1826 को भारत में हिंदी पत्रकारिता की नींव रखी जाती है। पत्रकारिता के अधिष्ठाता देवर्षि नारद के जयंती प…

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मोदी की जीत और अखबारों के शब्द

मीडिया आपको किन शब्दों में उलझाकर पटकना चाहता है जरा उसकी बानगी देखिए

राजकुमार सोनी/ जब मैं अखबार की दुनिया में था तब हर दूसरे- तीसरे दिन मालिक और मूर्धन्य संप…

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भारतीय पत्रकारिता में इंदौर शहर का योगदान

डॉ.अर्पण जैन 'अविचल'/ जब धरती के गहन, गंभीर और रत्नगर्भा होने के प्रमाण को सत्यापित किया जाएगा और उसमें जब भी मालवा या कहें इंदौर का जिक्र आएगा निश्चित तौर पर यह शहर अपने सौंदर्य और ज्ञान के तेज से बखूबी स्वयं को साबित करेगा। हिंदी या कहें अन्य भाषाओँ में इंदौर के पत्रक…

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बीच-बीच में आर्थिक ख़बरों को पढ़ते-समझते रहिए

यही असली खेल हो रहा है, न कि वहां जहां आप लगे हैं

रवीश कुमार / इंडियन एक्सप्रेस के संदीप सिंह की ख़बर ध्यान से पढ़ें। ख़बर की हेडिंग है कि एस्सल ग्रुप की दो कंपनियां घाटे में थीं फिर भी देश के चोटी के म्यूच…

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विपक्ष और पाठकों की हो रही है हत्या

दैनिक जागरण के महासमर 2019 के चार पन्नों की समीक्षा

रवीश कुमार/ तारीख़ 25 मार्च। पन्ना नंबर दो। महासमर 2019। इस पन्ने पर छोटी-बड़ी 14 ख़बरें हैं। 7 ख़बरें भाजपा नेताओं के बयान पर बनाई गईं हैं। मुख्यमंत्र…

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वर्तमान सियासत और भारतीय मीडिया ..?

रिजवान चंचल/ लगातार बार बार हर बार लाशों पर सियासत करने के आदी हो चुके सियासतदानों की सोच और भारतीय मीडिया की कारस्तानी एक बार फिर विश्वपटल पर शर्मसार होती नजर आयी एक बार फिर सवालों के बीच घिरी मीडिया से लोग जानना चाहते हैं कि पुलवामा आतंकी हमला है या  सियासत के षड्यंत्र का एक हि…

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क्या आप ढाई महीने के लिए चैनल देखना बंद नहीं कर सकते?

रवीश कुमार/ अगर आप अपनी नागरिकता को बचाना चाहते हैं तो न्यूज़ चैनलों को देखना बंद कर दें। अगर आप लोकतंत्र में एक ज़िम्मेदार नागरिक के रूप में भूमिका निभाना चाहते हैं तो न्यूज़ चैनलों को देखना बंद कर दें। अगर आप अपने बच्चों को सांप्रदायिकता से बचाना से बचाना चाहते हैं तो न्यूज़ चैनल…

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औसत होते हिन्दी के अख़बारों में ग़ायब होते पत्रकारों के नाम

हिन्दुस्तान की समीक्षा, (हिन्दुस्तान अख़बार को सैंपल के तौर पर लिया है। दूसरे हिन्दी अख़बारों की भी समीक्षा करूंगा।)…

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रफाल पर ख़बर तो पढ़ी लेकिन क्या हिन्दुस्तान के पाठकों को सूचनाएँ मिलीं

रवीश कुमार/ हिन्दुस्तान अख़बार ने रफाल मामले को लेकर पहली ख़बर बनाई है। ख़बर को जगह भी काफी दी है। क्या आप इस पहली ख़बर को पढ़ते हुए विवाद के बारे में ठीक-ठीक जान पाते हैं? मैं चाहता हूं कि आप भी क्लिपिंग को देखें और अपने स्तर पर विश्लेषण करें। ठीक उसी तरह से जैसे आप हम एंकरों के क…

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बिहार डायरी 2019 में हटाये गए लगभग सभी न्यूज पोर्टल के प्रतिनिधियों के नाम

सूचना एवं जनसंपर्क विभाग बिहार सरकार न्यू मीडिया के पत्रकारों को पत्रकार नहीं मानता

डॉ. लीना /पटना। बिहार सरकार का सूचना एवं जनसंपर्क व…

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क्या आपका हिन्दी अख़बार या चैनल मामले की ख़ुद से पड़ताल कर रहा है?

आलोक वर्मा के घर किसी सिफ़ारिश करने गए थे केंद्रीय सतर्कता आयुक्त चौधरी ?

रवीश कुमार/ हिन्दी अख़बारों के संपादकों ने अपने पाठकों की हत्या का प्लान बना लिया है। अ…

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इलेक्ट्रानिक मीडिया ने निर्वाचन में बढ़ाया कोलाहल

मूल सवालों को किया नजरअंदाज

संजय कुमार / इलेक्ट्रानिक मीडिया आज एक मस्त हाथी की तरह हो चुका है। वह अपनी ताकत के आगे किसी को कुछ नहीं समझता है। नेता, अफसर, शासन-प्रशासन, खास एवं आम जनता सब इसके प्रभाव में आ चुके हैं। समाज और लोकत…

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युवा पत्रकारों से निवेदन

 लिखना तो पड़ेगा। ये रोज़ का अभ्यास है।

रवीश कुमार / चुनाव आते ही कुछ युवा पत्रकार व्हाट्स एप करने लगते हैं कि मुझे चुनाव यात्रा पर ले चलिए। आपसे सीखना है। लड़का और लड़की दोनों। दोनों को मेरा जवाब ना है। यह संभव नही…

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ठीकरा मीडिया के ऊपर फोड़ दीजिए!

गिरीराज सिंह ने  एंकर  को कहा, आप लोगों ने पार्टी के एजेंडे को लोगों तक पहुंचाने में काफी खराब भूमिका निभाई है

साकिब जिया /…

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क्या राजनीतिक सत्ता ने वर्चस्व के लिये मीडिया को ही खत्म करना शुरू कर दिया है?

जरा सोचिये जब मेनस्ट्रीम मीडिया को कोई देखने-सुनने पढ़ने वाला नहीं होगा !

पुण्य प्रसून बाजपेयी / क्या पत्रकारिता की धार भोथरी हो चली है । क्या मीड…

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