निर्मल रानी/ हरियाणा महिला आयोग की अध्यक्ष रेनू भाटिया ने पिछले दिनों अशोका यूनिवर्सिटी के एसोसिएट प्रोफ़ेसर डॉक्टर अली ख़ान के विरुद्ध एक शिकायत दर्ज की थी। जिसमें उन पर 'ऑपरेशन सिंदूर' और भारतीय सेना की महिला अधिकारियों के बारे में सोशल मीडिया पर कथित तौर पर आपत्तिजनक टिप्पणी करने का आरोप लगाया गया…
Blog posts : "मुद्दा "
झूठ और पाखंड को बेनकाब करने के लिए ईमानदार पत्रकारिता जरुरी
क्या जरूरत है हर विषय पर लिखने की?
खतरनाक है विशेषज्ञता झाडऩे का चक्कर
मनोज कुमार/ एक दौर था जब जवानी इश्क में डूबी होती थी लेकिन एक यह दौर है जहाँ जवानी लेखन में डूबी हुई है. विषय की समझ हो या ना हो, लिखने का सऊर हो या ना हो लेकिन लिखना है, वह भी बिना तथ्य और तर्क के. ऐसे लेखकों की बड़ी फौज तैयार हो गई है जिसे हर विषय पर लिखना शग…
टी आर पी की ख़ातिर कुछ भी करेगा
निर्मल रानी/ अभी गत 28 मार्च 2025 की ही बात है जबकि ज़ी न्यूज़ टी वी चैनल के स्वामी सुभाष चंद्रा को ज़ी न्यूज़ की ओर से अभिनेता सुशांत सिंह राजपूत की मौत को लेकर रिया चक्रवर्ती को टारगेट करने से सम्बंधित ख़बरों को उनके चैनल ज़ी न्यूज़ द्वारा ग़लत तरीक़े से पेश करने के लिए मुआफ़ी मांगनी पड़ी थी। सुभाष …
झूठ फैलाकर उन्माद को हवा देता 'गोदी मीडिया'
तनवीर जाफ़री/ भारत और पाकिस्तान में बढ़ते तनाव के बीच दोनों देशों में 'तत्काल और पूर्ण संघर्षविराम' अर्थात फ़ायरिंग और सैन्य कार्रवाई रोकने पर सहमति बन गई है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की ओर से 'भारत और पाकिस्तान के बीच तत्काल और पूर्ण संघर्षविराम पर सहमति बनने' की जानकारी दी गई थी। डोनाल्ड ट्…
एक चैनल के भीतर ही दो दुनिया!
एक इनके स्टार एंकर्स और एक ये जिनके पास रिपोर्टिंग के लिए ढंग से बुनियादी चीज़ें भी नहीं हैं
विनीत कुमार/ अंजनाऽऽ..अंजनाऽऽऽऽ.. यहां धमाके की आवाज़ सुनाई दे रही है..
फुसफुसाते हुए, बड़े ही नाटकीय अंदाज़ में आजतक का रिपोर्टर जब हमारी स्क्रीन पर होते हैं तो हमारे भीतर यह भाव पैदा ही नहीं होता कि …
शब्द हिंसा का बेलगाम समय!
वस्तुनिष्ठता से किनारा करती मीडिया बहुत खौफनाक हो जाती है
प्रो. संजय द्विवेदी/ यह 'शब्द हिंसा' का समय है। बहुत आक्रमक, बहुत बेलगाम। ऐसा लगता है कि टीवी न्यूज मीडिया ने यह मान लिया है कि शब्द हिंसा में ही उसकी मुक्ति है। चीखते-चिल्लाते और दलों के प्रवक्ताओं को मुर्गो की तरह लड़ाते हमारे एंकर सब कु…
मीठा मीठा मीडिया, कुनैन है पत्रकारिता
मनोज कुमार/ मैं किस्म किस्म के गीत बेचता हूं, बोलो जी कौन सा खरीदोगे, गीत की यह पंक्तियां जब पढ़ते थे तो हंसा करते थे। तब मालूम ना था कि यह गीत की यह दो पंक्तियां भविष्य की मीडिया की कहानी का सच बन कर सामने खड़ा कर दिया जाएगा। आज यही सच है कि मीडिया का कारोबार बढ़ रहा है और सरोकार की पत्रकारिता हाशि…
आर्टिफिशल इंटेलिजेंस और मीडिया के उलझे रिश्ते
खतरे में पत्रकारों की नौकरियां!
प्रो. (डॉ.) संजय द्विवेदी/ “माननीय प्रधानमंत्री जी हम आभारी हैं कि आप हमारे बीच आए। मेरी ऑन दी जॉब लर्निंग अब शुरू हो गई है और 2024 तक मैं देश की सबसे अच्छी जर्नलिस्ट होने की कोशिश करूंगी। उम्मीद करती हूं कि तब आपसे एक एक्सक्लूसिव इंटरव्यू करने का मौका मु झे मिलेगा…
भारतीय पत्रकारिता: सवाल निष्पक्षता का
तनवीर जाफ़री/ पिछले दिनों 30 मई को जब हमारे देश में पत्रकारिता दिवस की बधाइयों का सिलसिला चल रहा था उस के चंद रोज़ पहले पंजाब से यह ख़बर आई कि ज़ी मीडिया ग्रुप के सभी चैनल्स जिनमें हिंदी, अंग्रेज़ी के साथ पंजाबी जैसी क्षेत्रीय भाषा के चैनल्स भी शामिल हैं, को सरकार द्वारा ब्लैक आउट कर दिया गया है। इस ख़बर…
मीडिया: दरकते भरोसे को बचाएं कैसे
हिंदी पत्रकारिता दिवस (30 मई) पर विशेष
प्रो. (डॉ.) संजय द्विवेदी/ हिंदी पत्रकारिता दिवस मनाते समय हम सवालों से घिरे हैं और जवाब नदारद हैं। पं.जुगुलकिशोर शुकुल ने जब 30 मई ,1826 को कोलकाता से उदंत मार्तण्ड की शुरुआत की तो अपने प्रथम संपादकीय में अपनी पत्रकारिता का उद्देश्य लिखते हुए शीर्षक दिया - …
आंदोलनरत अन्नदाता: उदासीन सरकार, ख़ामोश मीडिया
निर्मल रानी/ इस समय पूरा देश, शासन,प्रशासन तथा मीडिया लोकसभा चुनावों के वातावरण में डूबा हुआ है। सभी राजनैतिक दलों के स्टार प्रचारकों के निरर्थक आरोपों व प्रत्यारोपों को ज़बरदस्ती मुद्दा बनाकर जनता पर थोपा जा रहा है। आम लोगों की भावनाओं को झकझोर कर सत्ता में बने रहने के कुटिल प्रयास किये जा रहे हैं। …
चुनावी बांड पटाक्षेप और 'ग़ुलाम मीडिया' में पसरा सन्नाटा
तनवीर जाफ़री/ लोकसभा चुनावों से ठीक पहले सर्वोच्च न्यायालय के आदेश पर आख़िरकार भारतीय स्टेट बैंक ने चुनावी बॉन्ड ख़रीद का विस्तृत डेटा अदालत को पेश कर ही दिया। साथ ही यह भी सार्वजनिक कर दिया कि इन इलेक्टोरल बांड के माध्यम से किस राजनैतिक दल को कितने पैसे प्राप्त हुये। जैसा कि पहले भी होता आया है कि सत…
मीडिया अपनी भूमिका पर विचार करे
वरना आने वाले समय में विश्वसनीयता का संकट हो सकता है खड़ा, पूर्व जस्टिस कुरियन जोसफ की बातों पर गंभीरता से विचार करने की है जरूरत . . .
लिमटी खरे/ पत्रकार हैं . . . पक्षकार हैं . . . पत्तलकार हैं . . . इस तरह के कटीले, चुभते व्यंग्य डेढ़ दो दशकों से सोशल मीडिया पर तैरते नजर आते हैं। कभी गोदी मीडिया…
घोर संक्रमणकाल से गुज़रता भारतीय मीडिया
पर्दे के पीछे इन ऐंकर्स को संचालित करने वाले इनके आक़ा व उनके चैनल्स भी प्रतिबंधित हों
तनवीर जाफ़री/ विपक्षी गठबंधन '"INDIA " ने आख़िरकार सत्ता के साम्प्रदायिक एजेंडे को हर समय अपने चैनल्स पर चलाने वाले उन 14 टीवी एंकरों की एक सूची जारी कर ही डाली। अब इनके विद्वेषपूर्ण कार्यक्रमों में 'इण्डिया ' क…
लो आ गया पत्रकारिता का 'गटर काल '
इसे 'लघुशंका काल ' भी कह सकते !
निर्मल रानी/ देश इन दिनों बड़े ही अजीबो-ग़रीब दौर से गुज़र रहा है। मुख्यधारा का भारतीय मीडिया जो सत्ता के समक्ष 'षाष्टांग दंडवत ' हो चुका है। देश के लोकतंत्र का चौथा स्तंभ पुकारा जाने वाला भारतीय मीडिया अब 'गोदी मिडिया' कहकर सम्बोधित किया जाने लगा है। पूरे विश्व की न…
मेरा पसंदीदा रंग तो आज भी काला है...
साल 2022 की मीडिया
मनोज कुमार/ तुम खेलो रंगों से, रंग बदलना तुम्हारी आदत में है, मेरा पसंदीदा रंग तो आज भी काला है और काले रंग में समा जाना तुम्हारी फितरत में नहीं क्योंकि तुम रंग बदलने में माहिर हो. साल 2022 मीडिया के ऐसे ही किस्से कहानियों का साल रहा है. सबकी उम्मीदें रही कि मीडिया निरपेक्ष रहे…
नफ़रत और अफ़वाहबाज़ी की गिरफ़्त में सोशल मीडिया
तनवीर जाफ़री/ वर्तमान युग में कंप्यूटर -इंटरनेट के सबसे बड़े चमत्कार के रूप में सोशल मीडिया के विभिन्न प्लेटफ़ार्म्स को देखा जा रहा है। इसके माध्यम से जहां दूरस्थ इलाक़ों की जो ख़बरें व सूचनायें कई कई दिनों बाद ज़िला व प्रदेश मुख्यालयों में पहुंचा करती थीं वे अब बिना समय गंवाये,तत्काल या लाईव पहुँच जाती ह…
एनडीटीवी अस्त हो गया
राजेश बादल/ संस्था के नाम पर भले ही एनडीटीवी मौजूद रहे, लेकिन पत्रकारिता के क्षेत्र में अनेक सुनहरे अध्याय लिखने वाले इस संस्थान का विलोप हो रहा है । हम प्रणॉय रॉय और राधिका रॉय की पीड़ा समझ सकते हैं । छोटे से प्रोडक्शन हाउस को जन्म देकर उसे चैनलों की भीड़ में नक्षत्र की तरह चमकाने वाले इस दंपत्ति क…
भांड गीरी पर उतारू भारतीय टी वी चैनल्स
निर्मल रानी/ क्रिकेट टी-20 विश्व कप का पिछले दिनों इंग्लैण्ड के 'विश्व विजयी ' होने के साथ समापन हुआ। फ़ाइनल मैच से पूर्व जब भारतीय टीम सेमीफ़ाइनल में पहुंची थी और फ़ाइनल में प्रवेश के लिये इंग्लैंड की ही टीम से संघर्ष कर रही थी उसी समय भारतीय टी वी चैनल्स ने क्रिकेट मैच की भविष्यवाणियों का गोया एक 'वा…
संवाद से संवेदना जगाइए
मनोज कुमार/ सोशल मीडिया पर एक पीड़ादायक तस्वीर के साथ एक सूचना शेयर की जा रही है कि एक मजबूर पिता और एक मासूम बच्चा अपने भाई की लाश अपनी गोद में लिये कभी उसे दुलारता है तो कभी खुद रोने लगता है. पिता को बच्चे की लाश घर ले जाने के लिए एम्बुलेंस की जरूरत है लेकिन व्यवस्था के पास यह सुविधा नहीं है. मजबू…
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- शहला निगार को मिला लिपि यूरोप मीडिया अवार्ड 26
- बीबीसी की पंक्तियां चोरी करके आजतक बनेगा भरोसेमंद चैनल !
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- शब्दों का सामर्थ्य और विचारों की धरोहर है 'संजय उवाच'
- छात्र आंदोलन की आड़ में पत्रकारों पर हमले की डब्ल्यूजेएआई ने की कड़ी निंदा
- डिजिटल चुनौती के बीच कैसे जिएं अखबार
- स्टूडियो नैरेटिव और ग्राउंड रिपोर्टर के बीच बड़ा गैप है
- स्टूडियो तानाशाह हो गया है और पत्रकार निरीह
- पास रद्द किए जाने पर पत्रकारों ने कवरेज का किया बहिष्कार
- डब्ल्यूजेएआई की पश्चिम बंगाल प्रदेश समिति घोषित
- कैमरे में दर्ज एक दौर की जीवंत गाथा
- सदस्यों की समस्याओं के निवारण के लिए नियमित बैठक
- शीघ्र होगा सभी जिला इकाइयों का गठन
- डब्ल्यूजेएआई बिहार अगस्त में आयोजित करेगा राज्यस्तरीय कार्यक्रम
- झारखंड में डब्ल्यूजेएआई की नई टीम गठित
- एमसीयू में तनाव प्रबंधन पर कार्यक्रम
- अमरनाथ झा : पत्रकारिता से नदी-पानी के जनसरोकार तक की अविस्मरणीय यात्रा
- डब्ल्यूजेएआई बिहार प्रदेश की नई कार्यकारिणी का गठन
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सुख मंगल सिंहJuly 4, 2026
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कैलाश दहियाJuly 3, 2026
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Kailash DahiyaJuly 3, 2026
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Omprakash KashyapJune 30, 2026
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रवि अहिरवारJanuary 6, 2025
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पंकज चौधरीDecember 17, 2024
सम्पादक
डॉ. लीना
