मीडियामोरचा

____________________________________पत्रकारिता के जनसरोकार

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Blog posts : "मुद्दा "

गुजरात में समाचार पोर्टल के संपादक पर राजद्रोह का मामला

सारे देश में पत्रकारों की स्वतंत्र आवाज़ को ऐसे ही दबाया जा रहा हैं

पंकज चतुर्वेदी / नई दिल्ली/ गुजरात में एक समाचार पोर्टल के संपादक के खिलाफ राजद्र…

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भारतीय मीडियाः गरिमा बहाली की चुनौती

प्रो. संजय द्विवेदी/ भारतीय मीडिया का यह सबसे त्रासद समय है। छीजते भरोसे के बीच उम्मीद की लौ फिर भी टिमटिमा रही है। उम्मीद है कि भारतीय मीडिया आजादी के आंदोलन में छिपी अपनी गर्भनाल से एक बार फिर वह रिश्ता जोड़ेगा और उन आवाजों का उत्तर बनेगा जो उसे कभी पेस्टीट्यूट, कभी…

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अखबार मरेंगे तो लोकतंत्र बचेगा?

अरुण कुमार त्रिपाठी/ हम गाजियाबाद की पत्रकारों की एक सोसायटी में रहते हैं. वहां कई बड़े संपादकों और पत्रकारों(अपन के अलावा) के आवास हैं. इस सोसायटी में एक बड़े पत्र प्रतिष्ठान के ही पूर्व कर्मचारी अखबार सप्लाई करते हैं. वे बताते हैं कि कोरोना से पहले लोग तीन- तीन अख…

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सामाजिक क्रांति के महानायक पत्रकार डॉ. अम्बेडकर

अंबेडकर जयंती, 14 अप्रैल पर विशेष

संजय कुमार/ संविधान निर्माता और बहुजनों के मसीहा डॉ. भीमराव रामजी अम्बेडकर महान एवं जुझारू पत्रकार भी थे। डॉ. अम्बेडकर ने ‘मूकनायक’ पाक्षिक अखबार के जरिये 31 जनवरी 1920 को सामाजिक क्रांति का जो ब…

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‘मूक’ समाज को आवाज देकर बने ‘नायक’

अंबेडकर जयंती, 14 अप्रैल पर विशेष,  बाबा साहेब की पत्रकारिता  

लोकेन्द्र सिंह/ भारतीय संविधान के शिल्पकार डॉ. भीमराव रामजी अंबेडकर ने समाज में व्याप्त जातिभेद, ऊंच-नीच और छुआछ…

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कौन सज़ा देगा इन झूठों व अफ़वाह बाज़ों को ?

कई आग लगाऊ चैनल्स का समाज को विभाजित करने का एजेंडा इस महामारी के दौर में भी बेशर्मी के साथ जारी

तनवीर जाफ़री/ वैसे तो समूची प…

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फर्जी खबरों से हमारा मानस तैयार हो रहा है

कृष्ण कान्त/ फर्जी खबरों का दुश्चक्र भारत को कोरोना से बड़ा नुकसान पहुंचाने जा रहा है. समाज का ​अपने ही लोगों के प्रति अविश्वास से भर जाना किसी महामारी में नहीं होता. कोरोना के बहाने भारत के नफरत के कारोबारियों ने अपना कारोबार आपात स्तर पर तेज कर दिया है.…

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प्रिंट मीडिया पर कोविड-19 का कहर

सरकार आर्थिक मदद करे 

आदित्य कुमार दूबे/ अभी देशव्यापी लाक-डाउन के दो ही दिन हुए हैं कि प्रिंट मीडिया पर कोविड-19 का कहर साफ नजर आने लगा है। अखबारों के पन्ने कम हुए हैं, उनका वितरण बाधित हुआ है और विज्ञापन नदारद हो गए हैं।  जो अखबा…

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सामाजिक क्रांति के महानायक पत्रकार : डॉ. अम्बेडकर

(‘मूकनायक’ के 100 साल- 31 जनवरी, 2020 पर विशेष)

संजय कुमार/ डॉ. भीमराव रामजी अम्बेडकर किसी परिचय के मोहताज नहीं है, संविधान निर्माता और दलितों के मसीहा के तौर विख्यात हैं। डॉ. अम्बेडकर के परिचय में एक सफल पत्रकार एवं संपादक शब्…

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इसका, उसका, किसका मीडिया

(‘मूकनायक’ के 100 साल- 31 जनवरी, 2020 पर विशेष)

संजय स्वदेश/  बाबा साहब भीम राव अंबेडकर ने 31 जनवरी 1920 को मराठी पाक्षिक ‘मूकनायक’ का प्रकाशन प्रारंभ किया था. सौ साल पहले पत्रकारिता पर अंग्रेजी हुकूमत का दबाव था. दबाव से कई …

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अंबेडकर की पत्रकारिता

(‘मूकनायक’ के सौ साल- 31 जनवरी, 2020 पर विशेष)

डॉ. विद्या शंकर विभूति/ डॉ.भीमराव अंबेडकर प्रशिक्षित अर्थशास्त्री एवं बैरिस्टर थे, पत्रकारिता से उनका कोई लेना-देना नहीं था, लेकिन काल और परिस्थितियों की वजह …

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मूक नायक की गूंज सौ वर्ष बाद भी

(‘मूकनायक’ के सौ साल- 31 जनवरी, 2020 पर विशेष)

मनोज कुमार/ प्रकाशन का नाम ‘मूकनायक’ था लेकिन आवाज इतनी बुलंद की आज गुजरते सौ वर्ष में भी  ‘मूकनायक’ का डंका बज रहा है। ‘मूकनायक’ डॉ. भीमराव अम्बेडकर की पत्रकारिता के सौ साल का…

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आज की भी जरूरत हैं कर्मवीर और मूकनायक

मनोज कुमार/ शब्द सत्ता की शताब्दी मनाते हुए हम हर्षित हैं लेकिन यह हर्ष क्षणिक है क्योंकि महात्मा गांधी जैसे कालजयी नायक के डेढ़ सौ वर्षों को हम चंद महीनों के उत्सव में बदल कर भूल जाते हैं, तब सत्ता को आहत करने वाली पत्रकारिता की जयकारा होती रहे, यह कल्पना से बाहर है। इन सबके बावजू…

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इंटरनेट पर शीर्ष अदालत का फैसला बनेगा नज़ीर!

लिमटी खरे/ कानून और व्यवस्था की स्थिति निर्मित होने की आशंकाओं को देखकर धारा 144 को लागू करना लाजिमी है पर लंबे समय तक इस धारा का प्रयोग कैसे किया जा सकता है! देश की सर्वोच्च अदालत ने भी इस बारे में ऐतराज जताते हुए कहा है कि सीआरपीसी की धारा 144 (निषेधाज्ञा) को लंबे समय या अनिश्चित क…

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मीडिया पर मड़राता खतरा

रिंकी राउत/ रिपोर्टर्स विदाउट बॉर्डर्स (RSF) ने 18 अप्रैल, 2019 को पत्रकारों के प्रति बढ़ती हिंसा को दर्शाते हुए वर्ल्ड प्रेस फ्रीडम इंडेक्स 2019 जारी किया। वर्ल्ड प्रेस फ्रीडम इंडेक्स 2019 की रिपोर्ट के अनुसार भारत ने 140वां स्थान पाया है। भारत की रैंक 2018 में 138वें स्थान से गिर…

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मीडिया ब्रेकडाउन !

जिस वक्त रिपोर्टिंग की ज़रूरत है, .... उस वक्त मीडिया अपने स्टुडियो में बंद है

रवीश कुमार/ “अगर मीडिया नहीं दिखाएगा तो हमें ही पूरे भारत को दिखाना होगा। इसे वायर…

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टेलीविजन की मश्कें कसता इंटरनेट

एक सर्वे के अनुसार देश के आधे से ज्यादा दर्शक अब टीवी देखने से परहेज ही करते हैं

लिमटी खरे/ परिवर्तन प्रकृति का अटल सत्य है। कोई भी चीज स्थित नहीं है। हर च…

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सहिष्णुता मीडिया का गुण-धर्म

मनोज कुमार/ समाज में जब कभी सहिष्णुता की चर्चा चलेगी तो सहिष्णुता के मुद्दे पर मीडिया का मकबूल चेहरा ही नुमाया होगा. मीडिया का जन्म सहिष्णुता की गोद में हुआ और वह सहिष्णुता की घुट्टी पीकर पला-बढ़ा. शायद यही कारण है कि जब समाज के चार स्तंभों का जिक्र होता है तो मीडिया को एक स्तंभ मा…

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भारतीय बाजार से लुप्त हो जाएंगे अखबार ?

डिजिटल माध्यमों से मिल रही हैं प्रिंट मीडिया को गंभीर चुनौतियां

प्रो. संजय द्विवेदी/ दुनिया के तमाम प्रगतिशील देशों से सूचनाएं मिल रही हैं कि प्रिंट मीडिया पर …

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सांस्कृतिक संवेदनहीनता के समय में लोकजीवन और मीडिया

प्रो. संजय द्विवेदी/ ‘मोबाइल समय’ के दौर में जब हर व्यक्ति कम्युनिकेटर, कैमरामैन और फिल्ममेकर होने की संभावना से युक्त हो, तब असल खबरें गायब क्यों हैं? सोशल मीडिया के आगमन के बाद से मीडिया और संचार की दुनिया के बेहद लोकतांत्रिक हो जाने के ढोल पीटे गए और पीटे जा रहे है…

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