मीडियामोरचा

____________________________________पत्रकारिता के जनसरोकार

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Blog posts : "बहस "

दलित साहित्य में अड़ंगे लगाते द्विज

कैलाश दहिया / द्विज आलोचक नंद किशोर नवल का एक साक्षात्कार हिन्दी पत्रिका ‘तहलका’ के 1-15, सितंबर, 2012 अंक में छपा है, जिसे इसकी वेबसाइट पर भी देखा जा सकता है। जैसा कि होता आया है, इन्होंने मुखौटा तो प्रगतिशील-उदारवादी का ओढ़ा हुआ है, लेकिन उस मुखौटे के नीचे एक सामंत छुपा बैठा ह…

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भारतीय मीडिया में विदेशी एजेंट

यह तथ्य कमोवेश सबको ज्ञात हैं कि भारतीय मीडिया का एक बडा तबका अपनी आजीविका विदेशियों की ऐजेंटी से चलाता है। हर एक समाचार पत्र का पाठक या टेलीविजन का जागरूक दर्शक यह जानता है कि मीडिया में एक तबका है जो अमेरिका की भारत से ज्यादा चिंता करता है तथा उसके लिये …

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लो, ब्राह्मणों की बुधिया तो पकड़ी गई

 कैलाश दहिया12 सितम्बर 2005, प्रखर आजीवक (दलित) चिन्तक डा. धर्मवीर की आलोचना की किताब प्रेमचंद: सामंत का मुंशीका लोकार्पण का…

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आखिर क्यों पढ़ें डा. धर्मवीर का साहित्य

कैलाश दहिया / डा. धर्मवीर का साहित्य क्यों पढ़ें? यह कोई छोटा सवाल नहीं, बल्कि हिन्दी साहित्य का केन्द्रीय प्रश्न है। हिन्दी साहित्य या किसी भी भाषा के साहित्य का मूलभूत प्रश्न क्या है? या, साहित्य क्यों लिखा और पढ़ा जाता है? ऐसे ही सवालों के बीच डा. धर्मवीर के साहित्य की पर…

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