मीडियामोरचा

____________________________________पत्रकारिता के जनसरोकार

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Blog posts : "पत्रिका पुस्तक समीक्षा मीडिया पुस्तक समीक्षा व्यंग्य संस्मरण साहित्य सिनेमा"

मैं नहीं चम्मच चुरायो

January 12, 2018

दिनेश चौधरी/ अनुप्रास के उदाहरण के रूप में हम सब अपने बचपन से 'चाँदी के चम्मच से चटनी चटाई' पढ़ते आ रहे थे। अब चूंकि दसों दिशाओं में पतन का जोर है तो इसे 'चटनी चखते चाँदी की चम्मच चुराई' के रूप में पढ़ा जा सकता है। काम भले ही बुरा हो, अनुप्रास तो बढ़िया सधता है। यह कलाकर्म वाला मामल…

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‘समागम’ पत्रिका 18वें वर्ष में

January 11, 2018

भोपाल। रिसर्च जर्नल ‘समागम’ ने अपने निरंतर प्रकाशन के 17 वर्ष पूर्ण कर लिया है. 17वें साल का आखिरी अंक जनवरी-2018 का महात्मा गांधी के ग्राम स्वराज एवं विवेकानंदजी के शिकागो भाषण के सवा सौ साल पूर्ण होने पर केन्द्रित है. फरवरी 2018 में ‘समागम’ रेडियो पर केन्द्रित होगा और यह अंक 18वें वर्ष…

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"समागम" जीवनभर, मात्र 15सौ में

December 1, 2017

भोपाल/ शोध पत्रिका समागम फरवरी 2018 में 18वे साल में प्रवेश कर रही है। पत्रिका के सम्पादक मनोज कुमार ने बताया कि इस अवसर पर लाइफ मेम्बरशिप 3000 रुपये के स्थान पर मात्र 1500 में दिया जाएगा। साथ में दो मानक स्तर के शोध पत्र का प्रकाशन भी किया जाएगा। समागम यूजीसी से एएप्रूव्ड रिसर्च जर्नल है।…

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पत्रकारिता कैसे करूँ?

November 22, 2017

पूजा प्रांजला //

पत्रकार तो बन रही,

पत्रकारिता कैसे करूँ?

अच्छाइयां मिलती नहीं,

बुराइयाँ कितनी लिखूं ?

ये देश है जितनी बड़ी…

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हिंदी के श्राद्ध पर्व पर हिंदी पत्रकारिता का पिंडदान

September 13, 2017

राम प्रकाश वरमा/ हिन्दी और हिन्दी पत्रकारिता के कर्मकांडी श्राद्धपर्व के माहौल में हिन्दी बोलने पर जुर्माने की सजा! हिन्दी का पिण्डदान करने सरकारी अय्याशों के साथ ‘कामसू़त्र’ की नई विधा तलाशने का सपना संजोए हिंदी पुत्रों के विदेश जाने का शुल्क बस पांच हजार! देश में रोमन लिप…

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लोकसंस्कृति विशेषांक है साहित्य अमृत का नया अंक

August 4, 2017

नयी दिल्ली/ हिन्दी साहित्य की प्रख्यात पत्रिका ‘साहित्य अमृत’ के इस माह लोकसंस्कृति विशेषांक में देश में करीब 36 क्षेत्रों की लोकसंस्कृतियों को अनूठे ढंग से संग्रहीत किया गया है तथा इसके साथ एक-डेढ़ सदी पहले प्रवासियों के साथ विश्व के अनेक भागों में फैली भारतीय संस्कृति और 1947 में…

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सजग पत्रकार की दृष्टि में मोदी-युग

June 24, 2017

रमेश नैयर/ पुस्तक ‘मोदी युग’ का शीर्षक देखकर प्रथम दृष्टया लगा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की स्तुति में धड़ाधड़ प्रकाशित हो रही पुस्तकों में एक कड़ी और जुड़ गई। अल्पजीवी पत्र-पत्रिकाओं के लेखों के साथ ही एक के बाद एक सामने आ रही पुस्तकों में मोदी सरकार की जो अखंड वंदना चल रही है, वो अब…

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समागम’ का जून अंक नर्मदा नदी पर केन्द्रित

May 14, 2017

शोध पत्र एवं आलेख आमंत्रित

भोपाल/ शोध एवं संदर्भ की मासिक पत्रिका ‘समागम’ जून-2017 का अंक पर्यावरण की दृष्टि से नर्मदा नदी पर केन्द्रित है. मध्यप्रदेश सरकार द्वारा 144 दिनों की नमामी नर्मदे सेवा यात्रा के विभिन्न आयामों एवं पर्यावरणीय संदर्भों…

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‘समागम’ का विशेष अंक चम्पारण सत्याग्रह पर

April 12, 2017

100 साल पहले एक व्यक्ति ने चम्पारण में अलख जगायी थी. ना हाथ में लाठी-बंदूक थी और न जुबान पर कड़ुवी बोली. एक अहिंसक सत्याग्रह ने अंग्रेजी शासन को झकझोर कर रख दिया. आज इसी आंदोलन को पूरी दुनिया चम्पारण सत्याग्रह के नाम से जानती है. यह हमारी पीढ़ी के लिए गौरव की बात है कि हमें अवसर मिला है कि संसार को …

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सुबह लाठी, शाम चपाती ...!!

April 11, 2017

तारकेश कुमार ओझा/ न्यूज चैनलों पर चलने वाले खबरों के ज्वार - भाटे से अक्सर ऐसी - ऐसी जानकारी ज्ञान के मोती की तरह किनारे लगते रहती हैं जिससे कम समझ वालों का नॉलेज बैंक लगातार मजबूत होता जाता है। अभी हाल में एक महत्वपूर्ण सूचना से अवगत होने का अवसर मिला कि देश के एक बड़े र…

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सामाजिक प्रतिबद्धताओं से सजा व्यंग्य संग्रह: शोरूम में जननायक

March 11, 2017

एम. एम. चन्द्रा/ अनूप मणि त्रिपाठी का पहला व्यंग्य संग्रह “शोरूम में जननायक” में लगभग तीन दर्जन व्यंग्य है. व्यंग्य संग्रह में भूमिका नहीं है, सुधी पाठक इससे अंदाज लगा सकते है कि नव लेखन के सामने आने वाली चुनौतियां कम नहीं होती. पुस्तक में भूमिका का न होना एक तरह अच्छा ही हुआ ह…

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यह मैने नहीं मेरी कलम ने लिखा ...!!

March 7, 2017

किसी ने बेसिरपैर की बातें कर दी और शुरू हो गया ट्वीट पर ट्वीट का खेल।

तारकेश कुमार ओझा/  मैं एक बेचारे ऐसे अभागे जो जानता हूं जिसे गरीबी व भूखमरी के चलते उसके ब…

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पत्रकाऱ

February 2, 2017

अमलेंदु कुमार अस्थाना //

हम नहीं लौट पाते,

जैसे शाम ढले पंछी लौटते हैं घोंसलों में,

अंधेरी रात जब दौड़ती है मुंह उठाए हमारी ओर…

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मारक होती “माननीय” बनने की मृगतृष्णा ...

January 23, 2017

तारकेश कुमार ओझा / ... देश और जनता की हालत से मैं दुखी हूं। इसलिए आपके बीच आया हूं। अब बस मैं आपकी सेवा करना चाहता हूं... राजनीति से अलग किसी दूसरे क्षेत्र के स्थापित शख्सियत को जब भी मैं ऐसा कहता सुुनता हूं तो उसका भविष्य मेरे सामने नाचने लगता है। मैं समझ जाता हूं कि यह…

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विभोम-स्‍वर का नया अंक ऑनलाइन उपलब्‍ध

January 17, 2017

विभोम-स्‍वर का जनवरी-मार्च 2017 अंक अब ऑनलाइन उपलब्‍ध है। इस अंक में शामिल है, संपादकीय। मित्रनामा। साक्षात्कार- उषा प्रियंवदा से सुधा ओम ढींगरा की बातचीत। कहानियाँ - पुनर्जन्म प्रतिभा, छोटा-सा शीश महल अरुणा सब्बरवाल, वसंत लौट रहा है कविता विकास, किस ठाँव ठहरी है-डायन ? प्रेम गुप्ता ‘मानी’ । लघुकथाए…

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समाजवादी नेताओं को मिले बेस्ट एंटरटेनर एवार्ड ...!!

January 4, 2017

तारकेश कुमार ओझा / बचपन में स्कूल की किताबों में स्वतंत्रता सेनानी लाल - बाल - पाल के बारे में खूब पढ़ा था। जिज्ञासा हो ने पर  पता चला कि तीनों महान स्वतंत्रता सेनानी थे। जिनका आजादी के आंदोलन में बड़ा योगदान था। कॉलेज तक पहुंचने पर देश के सबसे बड़े सूबे के उस राजनैति…

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इतिहासबोध से वर्तमान विसंगतियों पर प्रहार

December 16, 2016

सागर मंथन चालू है

समीक्षक: एम् एम् चन्द्रा/ व्यंग्य की दुनिया में चार पीढ़ी एक साथ सक्रिय है. यह व्यंग्य क्षेत्र के लिए शुभ संकेत है. मैं व्यक्तिगत तौर पर इस बात का खंडन करता हूँ कि व्यंग्य के लिए यह समय अन्धकार का समय है या चरणवं…

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समय की रेत, घटनाओं के हवा महल

November 30, 2016

तारकेश कुमार ओझा/ बचपन में टेलीविजन के पर्दे पर देखे गए दो रोमांचक दृश्य भूलाए नहीं भूलते। पहला  क्रेकिट का एक्शन रिप्ले और दूसरा पौराणिक दृश्यों में तीरों का टकराव। एक्शन रिप्ले का तो ऐसा होता था कि क्रिकेट की मामूली समझ रखने वाला भी उन दृश्यों को देख कर खासा रोमांचित हो…

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अथ श्री चचा कथा ....!!

November 6, 2016

नई खबर - पुरानी को चलन से बाहर कर देती है

तारकेश कुमार ओझा/  वाणिज्य का छात्र होने के नाते कॉलेज में पढ़ा था कि बुरी मुद्रा अच्छी मुद्रा को चलन से बाहर कर देती है। पेशे के नाते महसूस किया कि  नई खबर - पुर…

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मध्यप्रदेश-छत्तीसगढ़ के स्थापना दिवस पर ‘समागम’ का विशेष अंक

November 1, 2016

एक नवम्बर को मध्यप्रदेश का 61वां स्थापना दिवस है. आज से 60 वर्ष पूर्व 1956 को मध्यप्रदेश का गठन हुआ था. तब इस प्रदेश की कोई एकजाई पहचान थी तो यह कि यह प्रदेश भौगोलिक रूप से देश का सबसे बड़ा प्रदेश है और भारत के नक्शे में ह्दयप्रदेश के रूप में चिंहित था. हमारे मध्यप्रदेश ने हौले हौले विकास के रास…

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