मीडियामोरचा

____________________________________पत्रकारिता के जनसरोकार

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Blog posts : "व्‍यंग्‍य"

बोली पर ब्रेक...!!

यदि सचमुच नेताओं की जुबान पर स्पीड ब्रेकर या ब्रेक लग गया तो कैसे चलेगा चैनलों का चकल्लस

तारकेश कुमार ओझा/ चैनलों पर चल रही खबर…

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बुढ़ौती में तीरथ...

काश पुरस्कार तब मिलता जब वे इसकी महत्ता को महसूस कर पाने में सक्षम होते

तारकेश कुमार ओझा/ कहते हैं कि अंग्रेजों ने जब रेलवे लाइनें बिछा कर उस पर ट्रेनें …

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​क्रिकेट में स्विंग तो राजनीति में स्टिंग

आलम यह कि इस स्टिंग की वजह से हम जैसे कलमघसीटों को नेताओं से काफी लानत - मलानत झेलनी पड़ी

तारकेश कुमार ओझा / जीवन में पहली बार …

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आर्ट आफ टार्चिंग!

मीडिया के कलाकार हैं माहिर  

तारकेश कुमार ओझा/ बाजारवाद के मौजूदा दौर में आए तो मानसिक अत्याचार अथवा उत्पीड़न यानी …

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..और अब वह सम्पादक हो गए!

उन्होंने शटर, रेलिंग आदि बनाने का काम शुरू किया कुछ ही समय में वह भी बन्द कर दिए और अब सम्पादक बनकर धन, शोहरत कमाने की जुगत में हैं...…

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मीडिया जगत में ‘किंग गोबरा’ की इन्ट्री

डॉ. भूपेन्द्र सिंह गर्गवंशी / आज कल हमारे यहाँ के पत्रकार जगत में एक सर्वथा डैसिंग/डायनामिक परसनैलिटी उभर कर सामने आई है, जिसे देखकर बॉलीवुड की जासूसी/स्टंट फिल्मों की यादें आती हैं। क्या परसनैलिटी है- शार्ट शर्ट, जीन्स पैण्ट कमर में कैमरा शर्ट की जेबों …

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