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जल संरक्षण के लिए एक अनूठी पहल

April 25, 2016

ज़िला प्रशासन के नाम जुड़ सकता है रिकॉर्ड, मीडिया की भूमिका भी अहम       

साकिब ज़िया/ सीतामढ़ी। सीतामढ़ी ज़िला प्रशासन ने जल संरक्षण की दिशा में एक अनोखी पहल की है। प्रशासन ने एक दिन में 2,168 सोख्ता (सोकपीट) का निर्माण कराया है। यह सोकपीट ज़िला के सभी सरकारी स्कूलों,निजी स्कूलों, मदरसों, आंगनबाड़ी केंद्रों, पीएचसी, थानों और प्रखंड कार्यालयों जैसे महत्वपूर्ण स्थानों पर बनवाया गया है। मां सीता की जन्मस्थली सीतामढ़ी में प्रकृति प्रदत्त जल श्रोत प्रचुर मात्रा में उपलब्ध है। साल भर पानी से भरी अधवारा और बागमती जैसी मुख्य नदियों और अनेकों छोटी नदियों से सिंचित सीतामढ़ी में पूरे उत्तर बिहार की तरह अनेकों पोखर, आहर और तालाब हैं। लेकिन पिछले कुछ सालों से आंकड़ों के अनुसार भूजल स्तर में लगातार गिरावट हो रही है । इसी को ध्यान में रखकर स्वच्छ भारत अभियान के अंतर्गत जल निकासी के समुचित प्रबंध और भूजल स्तर को रिचार्ज करने के लिए यह अनूठा प्रयास किया गया है। इस अनोखे प्रयास से महाराष्ट्र के लातूर में भेजे जा रहे पानी के ट्रेनों की तरह एक साल में 500 पानी के ट्रेनों के बराबर लगभग 26 करोड़ लीटर पानी को बचाया जा सकता है।

एक दिन में इतनी बड़ी संख्या में सोख्ता के निर्माण के लिए ज़िला प्रशासन और यूनिसेफ ने मिलकर काम किया है। माना जा रहा है कि यह पहली बार है जब बिहार में ही नहीं देश भर में जल संरक्षण के लिए इस तरह की पहल की गई है। तिरहुत प्रमंडल के आयुक्त अतुल प्रसाद ने शहर के कन्या उच्च विद्यालय डूमरा, कमला बालिका उच्च विद्यालय और बाजपट्टी के मध्य विद्यालय मधुबन, से सोख्ता निर्माण कार्यक्रम का शुभारंभ किया। इस मौके पर जिलाधिकारी राजीव रौशन और उप विकास आयुक्त अब्दुल रहमान के अलावा यूनिसेफ के कार्यक्रम प्रबंधक शिवेंद्र पांडेय, कम्युनिकेशन अधिकारी निपुण गुप्ता सहित ज़िला के विभिन्न विभागों के अधिकारी, कर्मचारी और बड़ी संख्या में स्कूली बच्चे भी शामिल हुए।इससे पूर्व सोख्ता पर विस्तार से चर्चा करते हुए प्रमंडलीय आयुक्त अतुल प्रसाद ने कहा कि जल ही जीवन है और इसका संरक्षण जीवन चक्र के लिए महत्वपूर्ण है। उन्होंने देश के कई राज्यों में मौजूदा जल संकट की चर्चा करते हुए कहा कि सीतामढ़ी और प्रदेश में ऐसी स्थिति उत्पन्न न हो इसलिए ऐसे उपाय करना जरूरी है। उन्होंने कहा कि जिला प्रशासन का यह कदम सराहनीय है। श्री प्रसाद ने कहा कि यह कदम देश भर के लिए मिसाल बनेगा और भविष्य में जिलाधिकारी तथा अन्य अधिकारियों को इस दिशा में विशेष योगदान देने के लिए पुरस्कृत भी किया जाएगा। मौके पर जिलाधिकारी राजीव रौशन ने कहा कि यह पहल "स्वच्छ सीतामढ़ी, स्वस्थ सीतामढ़ी, सुन्दर सीतामढ़ी" के नारे को हकीकत में बदलने में मील का पत्थर साबित होगा। उन्होंने कहा कि इन सोकपीटों के माध्यम से गंदगी के कारण फैलने वाले डेंगू, मलेरिया, चिकनगुनिया, फायलेरिया, जापानीज इंसेफ्लाइटिस, जीका जैसे रोगों से बचाव करने में सहायता मिलेगी । जिलाधिकारी ने कहा कि स्कूलों से शुरू होने वाले इस पहल के कारण इसका सीधा प्रभाव बच्चों पर होगा और उनके माध्यम से जल संरक्षण और स्वच्छता का संदेश जन-जन तक पहुंचेगा। इस प्रक्रिया के तहत जिले के 11, 000 शिक्षकों को इसका प्रशिक्षण दिया गया है साथ ही 5 लाख बच्चों को भी इसके फायदों के बारे में बताया गया है।

श्री रौशन ने बताया कि इस विधि के बारे में आपदा विभाग से भी बात हुई है और अगर विभाग कहेगा तो दूसरे जिलों में भी इसकी शुरुआत करने में वो हर संभव सहायता करेंगे।कार्यक्रम की जानकारी देने के दौरान वरिष्ठ अधिकारियों ने मीडिया की भूमिका को भी महत्वपूर्ण बताया और मीडिया के माध्यम से लोगों से इस कार्यक्रम को सफल बनाने के लिए अपील भी किया। प्रशासन ने इस कार्यक्रम की निगरानी के लिए एक कंट्रोल रूम भी तैयार किया है। ज़िला प्रशासन की इस पहल को लेकर स्थानीय लोगों में काफी उत्साह देखा जा रहा है और जिलाधिकारी की अपील पर लोगों ने इस कार्यक्रम को पूर्ण रूप से सफल बनाने का मन बना लिया है।                                             

क्या है सोख्ता(सोकपीट) ? भूजल संरक्षण और वाटर टेबल को रिचार्ज करने में सोख्ता(सोकपीट) महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है। सोख्ता चापानल के पास बनाया गया एक गडढ़ा होता है जिसमें नल का इस्तेमाल किया हुआ पानी जमा होता है और ज़मीन के भूजल स्तर को रिचार्ज करता है। सोकपीट के निर्माण का आकार चापाकल के इस्तेमाल पर निर्भर करता है कि वहां पर कितना पानी प्रयोग होता है और कितना बर्बाद होता है। एक सोख्ता के निर्माण में लगभग 3,500से 4,500हज़ार रुपये खर्च होता है। घर के कबाड़ समान का भी इसके निर्माण में बखूबी इस्तेमाल किया जा सकता है। 

गौरतलब है कि, लोहिया स्वच्छ अभियान के अंतर्गत सीतामढ़ी ज़िला प्रशासन और यूनिसेफ के सहयोग से जिले को खुले में शौच मुक्त बनाने की पहल की जा रही है। अब तक ज़िले के चार पंचायतों नानपुर सिरौली मरपा और हरिहरपुर को खुले में शौच मुक्त कर लिया गया है।

(मीडियामोरचा के लिए ब्यूरो प्रमुख साकिब ज़िया की रिपोर्ट)

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