मीडियामोरचा

____________________________________पत्रकारिता के जनसरोकार

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"अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता एवं मीडिया को खतरा" विषय पर एकदिवसीय कार्यशाला आयोजित

पटना/ शुभम कुमार/ साउथ एशिया वीमेन इन मीडिया (स्वाम) एवं ऑक्सफैम के संयुक्त तत्वाधान में "अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता एवं मीडिया को खतरा के विषय पर एकदिवसीय कार्यशाला का आयोजन होटल पाटलिपुत्र अशोक में किया गया। कार्यक्रम की शुरुआत हिंदुस्तान समाचार की पत्रकार रजनी शंकर ने की । कार्यक्रम के प्रथम सत्र में अभिव्यक्ति की आज़ादी एवं मीडिया को खतरा के विषय पर चर्चा किया गया। स्वाम, बिहार की अध्यक्ष निवेदिता ने बताया कि पिछले साल पत्रकारों पर हमले में 10 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई है।  उन्होंने सरकार पर सवाल उठाते हुए कहा कि "आखिर क्यों पत्रकारों की हत्या के मामलों में आज तक किसी को सजा नही मिली है?" बिज़नेस स्टैण्डर्ड के उदित मिश्रा ने मीडिया को समाज का आइना बताया। उन्होंने कहा कि अगर कोई आइने से ही झगड़ने लगे तब यह स्पष्ट है कि गलती आइने के सामने वाले की है। टाइम्स ऑफ़ इंडिया के मनोज मित्ता ने छोटे जगह के पत्रकारों के महत्व को बताया। उन्होंने रामचंद्र प्रजापति एवं नरेंद्र यादव की प्रशंसा करते हुए कहा कि उनके प्रयास से ही गुरमीत राम रहीम एवं आशाराम आज सलाखों के पीछे है। स्वाम की स्वाति भट्टाचार्य ने कहा कि पत्रकारिता में केवल दूसरों से ही नही बल्कि खुद से भी सवाल करनी चाहिए।

कार्यशाला के दूसरे सत्र में बीबीसी की रूपा झा एवं वरिष्ठ पत्रकार नसीरुद्दीन हैदर खान ने फेक न्यूज़ पर  विस्तार से चर्चा किया। रूपा झा ने बताया कि छोटे से सच के आधार पर झूठी खबरों को फैलाया जा रहा है। उन्होंने कहा कि पीएम मोदी के ट्विटर हैंडल पर उनके फॉलोवर में से 56 प्रतिशत ऐसे ट्विटर हैंडल है जो वेरिफिएड नही है, जो काफी संख्या में ट्विट करते है। वही नसीरुद्दीन हैदर खान ने कहा कि आज के इस दौर में हर वो व्यक्ति जिसके पास स्मार्टफोन है वह पत्रकार है, जिसके कारण फेक न्यूज़ काफी गंभीर समस्या बन गई है। उन्होंने कई फेक न्यूज़ का उदहारण देते हुए कहा कि हर वह खबर जो अज्ञात स्रोत से हो एवं उसके कारण उतेजना, गुस्सा, एवं दुर्भावना पैदा हो तो वह फेक न्यूज़ है।

कार्यक्रम के तीसरे सत्र में मीडिया में महिलाओं पर अत्याचार एवं मीटू विषय पर चर्चा किया गया। स्वाति गौतम ने मीटू अभियान पर विस्तार से अपने विचार रखे। उन्होंने कहा कि अधिकतर मामलो में आरोपित पुरूष ताकतवर एवं महिलाएं लाचार और उनसे न्यून  स्तर के होते है। डॉ. लीना ने कहा कि महिलाओं को इम्पावर होने की जरूरत है ताकि उनके कम ज्ञान का कोई गलत फायदा न उठा सके। डॉ. किरण ने कहा कि महिलाएं केवल कर्ज या जिम्मेवारी नही है और नाही वो केवल बहु बनने के लिए जन्म ली है।

कार्यशाला में बड़ी संख्या में विद्यार्थी एवं पत्रकार मौजूद रहे। उन्होंने ओपन हाउस में कई सवाल पूछे जिनका उत्तर भी मिला।  सहारा की वरिष्ठ पत्रकार अंजीता सिन्हा ने कार्यशाला का सारांश रखा। वही धन्यवाद ज्ञापन ज्योति सिन्हा ने किया।

(तस्वीर रजनीश रमण की )

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