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आधुनिक कहानी : स्लोवाकिया

पुस्तक चर्चा / दो देशों के मध्य सांस्कृतिक तथा साहित्यिक सम्बन्ध सुदृढ़ बनाने की दिशा में वाणी प्रकाशन प्रतिबद्ध दिखता है। आधुनिक कहानी श्रृंखला के अन्तर्गत  'आधुनिक कहानी : आस्ट्रिया, आधुनिक कहानी : स्विट्ज़रलैंड', अफगानिस्तान-ईरान, चीन, रूस, अरबिस्तान, जर्मनी,  इसी श्रृंखला की कड़ी में इस बार  'आधुनिक कहानी : स्लोवाकिया' लेकर वाणी प्रकाशन आया है । 

स्लोवाक देश की पहचान विकसित होने की प्रक्रिया के दौरान वह एक ऐसे दौर से गुजरा था। जब एक अखिल-स्लावी पहचान एक बृहत् स्लावी जगत का आलम्ब थी। इसी तरह की एक मसीही मानसिकता पॉलिश तथा रूसी संस्कृति और साहित्य में पहले ही प्रचलित थी, जिसमें स्लोवाकिया का अखिल-स्लाववाद राष्ट्रीय घटकों को अधिक महत्त्व नहीं देता था और एक स्लावी संस्कृति के संश्लेषण में उसकी ज्यादा दिलचस्पी थी। गत शताब्दी का मोड़ स्लोवाक साहित्य के इतिहास के युग के लिए भी एक नया मोड़ लेकर आया है। जब जीवन पर एक नयी सोच और एक नयी काव्यात्मक भाषा उभर कर सामने आयी प्रतीकात्मकता कविता में एक मूल तत्त्व बन कर उभरी।

आधुनिक युग की स्लोवाक कविता ईवान क्रासको, लुडमिला ग्रोएब्लेवा तथा यांको येनेस्की के यथार्थवादी गद्य से एकदम भिन्न है। दो विश्वयुद्धों के मध्य सबसे अधिक महत्त्वपूर्ण लेखकों में लादिस्लाव नोवोमेस्की का नाम उल्लेखनीय है, जिनकी कविता पर चेक काव्यशास्त्र का प्रभाव था। नब्बे के दशक में नाटक ने तीस के दशक उस प्रगतिवादी साहित्य से पुनः अपनी कड़ी जोड़ी , जो शीतऋतु की निद्रा में कहीं खो गयी थी।

पचास के दशक में साहित्य और राजनीति में एक आवेशग्रस्त सम्बन्ध रहा था और अधिनायकवाद में ढिलाई आने पर कुछ ऐसा लेखन सामने आया जिसमें तत्कालीन व्यवस्था पर प्रश्नचिन्ह लगाया गया था। इस अवधि के दौरान स्लोवाक राष्ट्रवादी आन्दोलन इस क्रान्ति का निश्चयवाचक बिन्दु बन गया था।
साठ का दशक स्लोवाक साहित्य के इतिहास में सबसे अधिक उर्वर और कलात्मकता के स्तर पर सबसे ज्यादा बेशकीमती समझा जाता है, हाँलाकि कुछ लेखक अपनी तब लिखी रचनाओं को 1989 में जा कर प्रकाशित करवा सके थे। साठ का दशक पचास के दशक के योजनाबद्ध साहित्य से विदा लेने का था जो समाजवादी यथार्थवाद का क्लासिकल दौर था। साठ के दशक में अनेकों लेखक उभरे, जिनमें सबसे महत्त्वपूर्ण रुडोल्फ यासिक हैं जिनकी पुस्तक ‘होली एलिजाबेथ प्लेस’ 50 के दशक के अन्तिम वर्षों में प्रकाशित हुर्ह थी और व्लादिमीर मीनाक जिनकी त्रयी ‘जेनेरेशन’ महत्त्वपूर्ण है। 
 
पुस्तक के अनुक्रम...
टीला
गुलाबी लड़की ग्रेत्क 
अजनबी लड़की
बाख़ के साथ कॉफी, शोपिन के साथ चाय
पेशेवर मध्य-यूरोपीय
चौथा दिन
बच्चा
पैसे
गर्मी
दो भाई
घाट
आस्ट्रेलिया में अवतरण
काया-पलट
डॉन जोविन्नी की याद में
नदी के द्वीप पर 
बूढ़ा जमादार
वायु
शताब्दी की सबसे सुन्दर तस्वीर
पृथ्वी गोल है
विश्वास
बिल्ली का बच्चा
सम्पादक : अमृत मेहता
जन्म: 1946 ई., मुलतान में। हिन्दी, जर्मन, अंग्रेजी, पंजाबी तथा इतालवी भाषाओं का ज्ञान। जर्मन साहित्य में डॉक्टर की उपाधि। जर्मन विभाग, पंजाब विश्वविद्यालय, चण्डीगढ़ में तथा अनुवाद विज्ञान विभाग, केन्द्रीय अंग्रेजी  एवं विदेशी भाषा संस्थान, हैदराबाद में अध्यक्ष के पद पर कार्यरत रहे। विदेशी भाषा साहित्य की त्रैमासिक  पत्रिका ‘सार संसार’ के मुख्य सम्पादक। जर्मन साहित्य का अनुवाद। 60 अनूदित पुस्तकें, दो पुस्तकें अनुवाद विज्ञान पर और दो पुस्तकें मूल जर्मन में। निजी साहित्य का स्लोवाक तथा हिन्दी में अनुवाद।
अनुवादक : शारदा यादव
एम.ए.: विश्व इतिहास में, चार्ल्स यूनिवर्सिटी, प्राग से (चेकोस्लाविया) 1981 में।
डॉक्टर की उपाधि: चेक एवं स्लोवाक साहित्य में, चार्ल्स यूनिवर्सिटी, प्राग से 1991 में स्लोवाक भाषा में। स्लोवाक भाषा में ग्रीष्म स्कूल, स्तूदिया अकादेमिका स्लोवाका, ब्राटिस्लावा में, 1997 से 2001 तक। प्रसिद्ध स्लोवाक लेखकों -योजेफ सिगार ह्नोंसकी, मारिया युरिच्किओवा, पीटर कारवास, दानिएल हाविएर, याना बोदनारोवा, मिलान रुफुस आदि - के गद्य तथा पद्य का हिन्दी में अनुवाद। चेक से परीकथाओं के अनुवाद की एक पुस्तक।
चेक तथा स्लोवाक साहित्य का सार संसार, कादम्बिनी, नन्दन इत्यादि पत्रिकाओं में प्रकाशित। 
Book :  Aadhunik Kahani : Slovakiya
Editor:  Amrit Mehta
Translator: Sharada Yadav
Publisher : Vani Prakashan
Total Pages : 104
ISBN : 978-93-5000-834-8
Price :  `250(HB)
Size (Inches) : 5.25x8.75
First Edition : 2013
Category  : Collection of Short Stories

 

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