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ईश्वर से संवाद करती कविताएं

‘सत्य-स्वन ’ रामकृपाल शर्मा के जीवन की अन्तिम कृति

एम. अफसर  खां सागर/ रामकृपाल शर्मा के जीवन की अन्तिम कृति ‘सत्य-स्वन ’ लघु काव्य संग्रह  बीस आध्यात्मिक कविताओं का संकलन है। संग्रह की रचनाएं पूरी तरह से ईश्वर से संवाद स्थापित करती हुई आम आदमी को राह दिखाती प्रतीत होती हैं। संवेदनशील व्यक्तित्व के धनी रामकृपाल शर्मा की कविताएं प्राणों में पुलक भर देती हैं। उनकी कल्पना आध्यत्मिक है, उनका नेह और विछोह अनुभूतिजन्य है।  ईश्वर में प्रतिक्षण रमे शर्माजी की कविताएं मुक्तिमार्गी भी हैं और अपने भीतर परमसत्ता के करीब पहुंचने की प्रबल बौखलाहट भी महसूस कराती हैं।

जीवन के अन्तिम दिनों में कवि ने लिखा कि...

इस जिन्दगी का मुझको कोई पता बता दे माना कि तूने जाना, फिर भी मुझे बता दे।

अब आखिरी तमन्ना ‘कृपाल ’ का तू सुन ले, अपनी गली का मुझको अब तो पता बता दे।

शायद कवि ईश्वर से उसका पता पूछ रहा था। जोकि उसे काशी में मिल ही गया। बैंगलोर से वासपी के दौरान वाराणसी आकर अचानक ही प्राण त्याग दिया।

इंसानी जिन्दगी से मानवीय गुण व सच्चाई को खोता देख कवि का मन व्याकुल हो उठता है। अपनी वेदना को व्यक्त करते हुए कवि मानव कहां चला शीर्षक में लिखता है...

कहां गया वह सत्य धर्म, जब सत्य राज का था सपना

हिंसा का अब दौर चला कहां गया गौतम अपना।

जीवन की तलाश में भटकते मुसाफिर सा तंग आकर कवि का मन ईश्वर से सवाल करता है...

थक चुका हूं, कौन है? मैं! नहीं पहचानता

जानना, पहचानना तो, सब तुम्ही में खो गया।

“मरघट” शीर्षक में कवि ने जीवन के उन सच्चाइयों को बयान किया है जिसका सामना सबसे होना है। जीवन के सफर में मुसाफिरों का आना-जना लगा रहता है, लोग मिलते और बिछड़तें रहतें हैं। कवि लिखता है...

मिल गये कुछ लोग वेसे, जो चले थे साथ में।

पूछा कहां से कब छूटे थे, कब चले थे साथ में।।

संग्रह की सभी रचनाएं बिम्बविधान, प्रतीकात्मकता , लाक्षणिकता आदि कलापक्षी सौन्दर्य प्रतिमानों की कसौटी पर खरी उतरती हैं। शब्दों का चयन सरल है, विषय जीवन को बल देने वाले हैं। इन कविताओं में युग-चेतना के विविध सन्दर्भ सहज ही उपस्थित हैं। काव्य संग्रह पठनीय व संग्रहणीय है।

पुस्तक- सत्य-स्वन (लघु काव्य संग्रह)  

कवि- रामकृपाल शर्मा

प्रकाशक- पुस्तक पथ, दिल्ली

मूल्य- 100 रुपये मात्र  (पेपर बैक संस्करण)

समीक्षक- चन्दौली (उत्तर प्रदेश) के निवासी एम.अफसर खां सागर समाजशास्त्र में परास्नातक हैं। पत्रकार व युवा साहित्यकार के रूप में जाने जाते हैं । पिछले दस सालों से  पत्रकारिता में है। राष्ट्रीय स्तर पर विभिन्न अखबारों और पत्रिकाओं के लिए लेखन के साथ ही राष्ट्रीय जनहित मीडिया (हिन्दी मासिक पत्रिका) के सह-संपादक व जनहित भारतीय पत्रकार एसोसिएशन के वरिष्ठ राष्ट्रीय उपाध्यक्ष हैं।

 

 

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