मीडियामोरचा

____________________________________पत्रकारिता के जनसरोकार

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भारतीय मीडिया का मानसिक दिवालियापन

प्रेमेंद्र। किसी ने कह दिया कि यूपी के सोनभद्र में सोना मिला है बस यार लोग कैमरा कलम लेकर टूट पड़े । किसी को 3000 टन सोना मिल गया,  किसी ने लिखा ट्रेन की बोगी के साइज की सोने की चट्टाने, किसी को वहां जहरीले नाग दिखने लगे, किसी ने कहा कि खजाने की रक्षा करने के लिए  यह जहरीले सांप है , किसी को इकोनॉमी में अचानक बूम बूम दिखने लगी ....लेकिन किसी ने पता करने की कोशिश नहीं की की वास्तविकता क्या है ? अब पता चल रहा है कि यहां से अधिकतम 160 किलो सोना मिल सकता है, वह भी संभावना है, कंफर्म नहीं. संबंधित विभाग बोल रहा है कि हमसे तो किसी ने बात ही नहीं की . हमने कभी नहीं कहा कि 3000 टन सोना है.  इस बीच किसी भी इलेक्ट्रॉनिक प्रिंट मीडिया या वेब मीडिया ने बिना असलियत जाने तूफान मचा दिया. क्या आपको नहीं लगता कि यह बेहद गैर जिम्मेदार और सतही पत्रकारिता का नमूना है ? अफसोस की बात यह है इस सतही पत्रकारिता में कई बड़े बैनर बड़े नाम भी दिखे जिन्होंने पत्रकारिता में काफी इज्जत कमाई है। यह वाकई मीडिया के लिए अफसोस जनक है । शायद ऐसे ही अति उत्साह में किसी पत्रकार को 2000 के नोटों में इलेक्ट्रॉनिक चिप दिखी थी।

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