मीडियामोरचा

____________________________________पत्रकारिता के जनसरोकार

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क्या है हमारी खबरों में

रश्मि रंजन//

 

सोचती हूँ.......

क्या है हमारे विचारों में

क्या है हमारे शब्दों में

क्या है हमारी खबरों में

धर्म/ जाति/ पैसा.....

और भी बहुत कुछ......

भ्रांति, अराजकता, शक्ति

सामर्थ्य युक्त हिंसक- भीड़

शब्दों और वाक्यों की.....

 

भाषा का उघड़ा हुआ रूप

लेखनी से बहता हुआ मवाद

और 

भावनाओं से रिसता हुआ रक्त

अर्थहीन, संवादहीन, सन्देशहीन.....

वाह...

मनाएँ आओ, जश्न-ऐ- आजादी

विचारों, शब्दों और वाक्यों की.....

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