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____________________________________पत्रकारिता के जनसरोकार

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वरिष्ठ पत्रकार सुमित मिश्र नहीं रहे

नई दिल्ली/ वरिष्ठ पत्रकार सुमित मिश्र का आज निधन हो गया. वे जनसत्ता अखबार और आजतक न्यूज चैनल से लंबे समय से जुड़े थे..बताया जा रहा है कि वे काफी अरसे से बीमार चल रहे थे. 

सोशल मीडिया पर पत्रकारों ने उन्हें याद करते हुए विनम्र श्रद्धांजलि दी है।  

वरिष्ठ पत्रकार क़मर वाहिद नकवी लिखते हैं- सुमित जी किसी समय दिल्ली के शीर्षस्थ रिपोर्टरों में थे. कहते हैं कि तब दिल्ली की ख़बरों पर उनकी पकड़ बेमिसाल थी. बाद में आज तक की सम्पादकीय डेस्क पर वह अत्यन्त वरिष्ठ सहयोगी के तौर पर जुड़े और फिर दिल्ली आज तक की लाँचिंग टीम में उनकी बहुत महत्त्वपूर्ण भूमिका रही. ख़ास कर इसलिए भी कि दिल्ली आज तक की टीम में काफ़ी सहयोगी बिलकुल ही नये-नवेले पत्रकार थे, जिन्हें सुमित जी ने गढ़ और माँज कर चैनल की एक धारदार टीम तैयार करने में बड़ी भूमिका निभायी.
उनका न रहना बहुत खलनेवाला है. 
विनम्र श्रद्धाँजलि.

वरिष्ठ पत्रकार अजीत अंजुम ने सुमित मिश्रा के निधन पर शोक व्यक्त किया. उन्होंने बताया कि आजतक और जनसत्ता में लंबे समय तक काम कर चुके सुमित जी हम सबके के बेहद अजीज थे. ईश्वर उनके परिजनों को दुख सहने की ताकत दे और सुमित जी की आत्मा को शांति. पत्रकार संदीप ठाकुर और संजीव चौहान ने भी सुमित जी के निधन पर शोक व्यक्त करते हुए उन्हें श्रद्धांजलि दी.

सुमित जी के निधन पर वरिष्ठ पत्रकार अमिताभ श्रीवास्तव लिखते हैं-

आज तक और दिल्ली आज तक में सहयोगी रहे सुमित मिश्र चल बसे। सुमित लंबे समय से बीमार चल रहे थे। सुमित जनसत्ता से भी जुड़े रहे थे। अखबार में थे तो उनकी रिपोर्टिंग की धाक थी। शानदार शख्सियत थी। दिल्ली शहर और यहां की कांग्रेस-बीजेपी की राजनीति की रग-रग से वाकिफ। सज्जन,शालीन इन्सान, बेहद मिलनसार, मददगार और शानदार मेहमाननवाज़। बहुत लंबा साथ रहा है न्यूज़ रूम में। बहुत सी यादें हैं। मन बहुत दुःखी है।

सुमित जी को श्रद्धांजलि। परिवार से मिली सूचना के अनुसार अंत्येष्टि शाम 5 बजे निगमबोध घाट पर होगी।”

अम्बरीश कुमार ने लिखा है कि आजतक के पत्रकार सुमित मिश्र के जाने की खबर से सन्न रह गया हूं .जनसत्ता में अपनी मंडली के लोगों में थे .दिल्ली जनसत्ता में नौकरी के लिए गया तो हर त्यौहार उनके घर ही खाना होता था .उनके भाई संजय मिश्र जो फिल्मों में मशहूर हैं उनसे भी वही मुलाक़ात हुई .वे जनसत्ता में हम सबमे संभवतः सबसे छोटे थे .बहुत दुःख हुआ .अंतिम बार लखनऊ में ही राम कृपाल सिंह के बेटे की शादी में मुलाक़ात हुई थी .

संजय कुमार उन्हें याद करते हुए लिखते हैं कि बेहद दुःखद खबर। सुमित मिश्र भइया नहीं रहे। लंबी बीमारी से लड़ते हुए इस दुनिया को छोड़ गए। दिल्ली में AMU से पत्रकारिता की पढ़ाई के बाद नौकरी के लिए उनके(फूफा जी स्व. श्री शम्भू नाथ मिश्र, सुमित जी के पिता जी,जो भारतीय सूचना सेवा से थे) के घर कई दिन रुका था।...श्रद्घांजलि।

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