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जरूरत पड़ी तो कोर्ट एस.आई.टी. गठित करेगा: सुप्रीम कोर्ट

January 14, 2018

मामला हिन्दुस्तान के फर्जी संस्करण और सरकारी विज्ञापन घोटाले का, मुकदमे की अगली सुनवाई की तारीख 18 जनवरी मुकर्रर 

नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि जरूरत पड़ी, तो कोर्ट बिहार के दैनिक हिन्दुस्तान के फर्जी संस्करण और सरकारी विज्ञापन घोटाले की जांच के लिए एस.आई.टी. का गठन करेगा। साथ ही,  बिहार सरकार के सुप्रीम कोर्ट में नियुक्त  वरीय अधिवक्ता माननीय विद्यासागर की ओर से स्पेशल लीव पीटिशन। क्रिमिनल। नं0- 1603। 2013 से जुड़ी सभी संचिकाओं की अचानक चोरी होने की स्थिति में कोर्ट कार्रवाई में हिस्सा लेने में असमर्थता व्यक्त करने पर सुप्रीम कोर्ट ने बिहार के दैनिक हिन्दुस्तान के फर्जी संस्करण और दो सौ करोड़ के सरकारी विज्ञापन फर्जीवाड़ा से जुड़े मामले में आगामी 18 जनवरी 2018 को सुनवाई की अगली तारीख मुकर्रर की । पीटिशनर शोभना भरतिया की ओर से कोर्ट में बहस कर रहे सुप्रीम कोर्ट के वरीय अधिवक्ता माननीय सिद्धार्थ लुथरा ने कोर्ट को कहा कि - ‘माई लार्ड, एस.आई.टी.  की कोई जरूरत नहीं है ।

बीते 06 दिसंबर ,17 को सुप्रीम कोर्ट के कोर्ट नं0-02 में माननीय न्यायमूर्ति श्री जे0 चेलामेश्वर और माननीय न्यायमूर्ति श्री संजय किशन कौल की खण्ड पीठ बिहार के मुंगेर के कोतवाली थाना  कांड संख्या- 445। 2011 की नामजद प्रमुख अभियुक्त व  हिन्दुस्तान प्रकाशन समूह ।नई दिल्ली। की अध्यक्ष शोभना भरतिया ।पूर्व सांसद।  के स्पेशल लीव पीटिशन। क्रिमिनल। नं0- 1603। 2013 पर सुनवाई कर रही थीं । अभियुक्त शोभना भरतिया ने मुंगेर कोतवाली कांड संख्या- 445। 2011 को रद्द करने की प्रार्थना को  लेकर सुप्रीम कोर्ट में स्पेशल लीव पीटिशन।क्रिमिनल। नं0- 1603। 2013 दायर किया है ।

06 दिसंबर, 2017 को सुप्रीम कोर्ट में कोर्ट नं0-02 में एस0एल0पी0।क्रिमिनल। नं0 - 1603। 2013 में सुनवाई के दौरान रेस्पोन्डेन्ट नं0-02 मन्टू शर्मा ।सामाजिक कार्यकर्ता,मुंगेर,बिहार। की ओर से बहश  में हिस्सा लेते हुए सुप्रीम कोर्ट के अधिवक्ता श्रीकृष्ण प्रसाद।मुंगेर,बिहार। ने न्यायालय के समक्ष मुगेर कोतवाली थाना कांड संख्या- 445। 2013 में सुप्रीम कोर्ट के 5 मार्च , 2013 के ‘इन्टरीम स्टे आर्डर‘ की अवेहलना के मामले में बिहार सरकार के मुख्य सचिव और अन्य वरीय प्रशासनिक पदाधिकारियों के विरूद्ध सुप्रीम कोर्ट की अवमानना की न्यायिक काररवाई अलग से शुरू करने की प्रार्थना कीं ।

सुप्रीम कोर्ट के अधिवक्ता श्रीकृष्ण प्रसाद ने सुप्रीम कोर्ट को बताया कि सुप्रीम कोर्ट  के 5 मार्च 2013 के ‘इन्टरीम स्टे-आर्डर‘  की अवहेलना कर बिहार सरकार ने मुंगेर कोतवाली थाना कांड संख्या- 445। 2011 में ‘पुर्नअनुसंधान‘ शुरू किया और बिहार सरकार । रेस्पोन्डेन्ट नं0-01। ने सुप्रीम कोर्ट में जो काउन्टर-एफिडेविट  सुपुर्द किया, उसमें बिहार सरकार ने प्राथमिकी नामजद अभियुक्त शोभना भरतिया को ‘निर्दोष‘ साबित करने का भरपूर प्रयास किया । 

सुप्रीम कोर्ट ने 05 मार्च 2013 को इन्टरीम स्टे आर्डर पारित किया था:मुंगेर कोतवाली थाना कांड संख्या- 445। 2011 की नामजद प्रधान अभियुक्त शोभना भरतिया के एस0एल0पी0 ।क्रिमिनल। नं0- 1603। 2013 में सुनवाई के बाद सुप्रीम कोर्ट ने  05 मार्च 2013 को मुंगेर के कोतवाली थाना कांड संख्या-445। 2011 में प्राथमिकी  से निकलने वाली सभी प्रकार की काररवाई पर अगले आदेश तक रोक लगा दी थीं ।

अवमानना- कार्रवाई और सी0बी0आई0 जांच की प्रार्थना  की गई थीं: 17 जुलाई,2017 को भी सुप्रीम कोर्ट के अधिवक्ता श्रीकृष्ण प्रसाद।मंुगेर,बिहार। ने सुप्रीम कोर्ट में माननीय न्यायमूर्ति श्री जे0 चेलामेश्वर की अध्यक्षतावाली दो सदस्यीय खण्ड-पीठ के समक्ष बिहार के दैनिक हिन्दुस्तान के जिला-जिलाबार फर्जी संस्करण और सरकारी विज्ञापन घोटाले में सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में सी0बी0आई0 जांच या अन्य एजेंसी से जांच  कराने और सुप्रीम कोर्ट  के 05 मार्च 2013 के इन्टरीम स्टे-आर्डर  की अवहेलना करने वाले बिहार सरकार के मुख्य सचिव ओैर अन्य वरीय प्रशासनिक पदाधिकारियों के विरूद्ध अलग से अवमानना की अदालती काररवाई  शुरू करने की प्रार्थना की थीं । इस तारीख को पीटिशनर शोभना भरतिया की ओर से वरीय अधिवक्ता और पूर्व एटार्नी जेनरल आफ इंडिया मुकुल रोहतगी ने बहश में हिस्सा लिया और पीटिशनर शोभना भरतिया को ‘निर्दोष‘ बताया । 

निचली अदालत में इस  मुकदमे से जुड़ी सभी मूल संचिकाओं को सुप्रीम कोर्ट ने  तलब किया : 17 जुलाई , 17 को अधिवक्ता श्रीकृष्ण प्रसाद की ओर से बहश में हिस्सा लेने के बाद खण्ड-पीठ ने एक  आदेश पारित किया और पटना उच्च न्यायालय और मुंगेर के मुख्य न्यायिक दंडाधिकारी के न्यायालय को इस मुकदमे से जुड़ी संबंधित सभी मूल संचिकाओं। लोअर कोर्ट रिकार्ड। को  सुप्रीम कोर्ट भेजने का आदेश पारित किया । 

मूल संचिकाएं  सुप्रीम कोर्ट भेजी गईं: पटना उच्च न्यायालय और मुंगेर स्थित मुख्य न्यायिक दंडाधिकारी के न्यायालय ने कोतवाली कांड संख्या- 445। 2011 से जुड़ी सभी अदालती काररवाई की मूल संचिकाओं को सुप्रीम कोर्ट भेज दिया है ।

उच्च न्यायालय ने शोभना भरतिया के पीटिशन को खारिज किया था: पटना उच्च न्यायालय की माननीय न्यायमूर्ति श्रीमती अंजना प्रकाश ने 17 दिसंबर 2012 को मुंगेर कोतवाली कांड संख्या- 445। 2011 की नामजद अभियुक्त शोभना भरतिया और अन्य अभियुक्त शशि शेखर और अन्य की ओर से दायर क्रिमिनल मिससेलेनियस पीटिशन नं0- 2951। 2012 और अन्य पीटिशन को खारिज कर दिया  और मुंगेर पुलिस को कोतवाली कांड संख्या- 445। 2011 में तीन माह के अन्दर  पुलिस अनुसंधान पूरा करने का आदेश पारित किया । 

माननीय न्यायमूर्ति ने अपने आदेश में यह भी लिखा कि - मुंगेर के जिला पदाधिकारी के पत्र ने वरीय पुलिस पदाधिकारियों की जांच रिपोर्ट भी संलग्न की है जो दर्शाता है कि इस कांड में पुलिस अनुसंधान पूरी गति में है और घटना का हिस्सा मुंगेर में भी है । 

मुकदमा में क्या है ? बिहार के मुंगेर जिला मुख्यालय के माननीय मुख्य न्यायिक दंडाधिकारी श्री मनोज कुमार सिन्हा के आदेश पर कोतवाली पुलिस ने मुंगेर शहर  के पुरानीगंज मोहल्ले के निवासी व सामाजिक कार्यकर्ता मन्टू शर्मा के प्रतिवेदन पर  प्राथमिकी ,जिसकी संख्या- 445। 2011 है, दर्ज कीं  ।पुलिस ने प्राथमिकी में ।1। शोभना भरतिया।अध्यक्ष, हिन्दुस्तान प्रकाशन समूह।,नई दिल्ली, ।2। शशि शेखर । प्रधान संपादक, दैनिक हिन्दुस्तान,नई दिल्ली, ।3। अक्कू श्रीवास्तव । स्थानीय संपादक , दैनिक हिन्दुस्तान ,पटना संस्करण।, । 4। बिनोद बन्धु । स्थानीय संपादक, दैनिक हिन्दुस्तान, भागलपुर संस्करण। और ।5। अमित चोपड़ा । प्रकाशक, मेसर्स हिन्दुस्तान मीडिया वेन्चर्ज लिमिटेड । नई दिल्ली। को भारतीय दंड संहिता की धाराएं 420। 471। 476 और प्रेस एण्ड रजिस्ट्र्ेशन आफ बुक्स एक्ट, 1867 की धाराएं  8।बी।, 14 और 15 के तहत नामजद अभियुक्त बनाया और पुलिस अनुसंधान शुरू कर दिया ।

नामजद अभियुक्तों पर आरोप है: मुंगेर कोतवाली कांड संख्या- 445। 2011 के सूचक व सुप्रीम कोर्ट के एस0एल0पी0।क्रिमिनल। नं0-1603। 2013 के रेस्पोन्डेन्ट नं0 -02 मन्टू शर्मा ने सुप्रीम कोर्ट में अपनी ओर से जो काउन्टर-ऐफिडेविट जमा की है  उसमें मुंगेर कोतवाली थाना कांड संख्या- 445। 2011 के सभी नामजद अभियुक्तों पर आरोप है कि उनलोगों ने वर्ष 2001 के 02 अगस्त से वर्ष 2011 के 30 जून तक मुंुगेर जिले के पाठकों के लिए दैनिक हिन्दुस्तान‘ के अवैध मुंगेर संस्करण का मुद्रण भागलपुर स्थित प्रिंटिंग प्रेस से करता रहा और मुंगेर जिले के पाठकों के बीच प्रकाशित करता रहा । इस पूरी अवधि में अभियुक्तों ने दैनिक हिन्दुस्तान के  न केवल ‘मुंगेर संस्करण‘ बल्कि दैनिक हिन्दुस्तान के  मुजफ्फरपुर और ‘ भागलपुर संस्करणों ‘ के लिए प्रेस रजिस्ट्र्ार।नई दिल्ली। से अलग से ‘सर्टिफिकेट आफ रजिस्ट्र्ेशन‘ और ‘ रजिस्ट्र्ेशन नम्बर ‘ नहीं प्राप्त किया । बल्कि अभियुक्तों ने जालसाजी और धोखाधड़ी करते हुए सेम  टाइटिल के दैनिक हिन्दुस्तान के पटना संस्करण को आवंटित ‘सर्टिफिकेट आफ रजिस्ट्र्ेशन‘ और ‘रजिस्ट्र्ेशन नम्बर -आर0एन0आई0 नं0-44348। वर्ष 1986‘ को मुंगेर, भागलपुर और मुजफ्फरपुर  के अवैध हिन्दुस्तान के संस्करणों के लिए उपयोग कर बिहार सरकार और भारत सरकार तथा मुंगेर, भागलपुर और मुजफ्फरपुर जिलों के सरकारी विभागों  से इस दौरान लगभग दो सौ करोड़ रूपया का सरकारी विज्ञापन सरकारी पदाधिकारियों से धोखाधड़ी और जालसाजी कर  प्राप्त कर लिया और उसे प्रकाशित कर लगभग दो सौ करोड़ रूपया का चूना  राजकीय कोष को लगाया । जब विभिन्न स्तरों पर जांच शुरू हुई,तो सभी नामजद अभियुक्तगण वर्ष 2011 के 01 जुलाई  से मुंगेर, भागलपुर और मुजफ्फरपुर के दैनिक हिन्दुस्तान के अलग-अलग संस्करणों में प्रिंट -लाइन में रजिस्ट्र्ेशन नम्बर के स्थान पर ‘ आर0एन0आई0 नं0 -आवेदित‘ लिखने लगे । जबकि सभी नामजद अभियुक्तगण अवैध मुंगेर, भागलपुर, मुजफ्फरपुर  और जिलाबार के सेम टाइटिल हिन्दुस्तान के  संस्करणों की पिं्रट-लाइनों पर पटना संस्करण को आवंटित रजिस्ट्र्ेशन नं0- आर0एन0आई0 नं0-44348। वर्ष 1986 को 2 अगस्त 2001 से 30 जून, 2011 तक लगातार छापते रहे और केन्द्र और राज्य सरकारों के समक्ष अवैध जिलाबार संस्करणों को वैध संस्करण घोषित कर सरकारी विज्ञापन लेते रहे और सरकारी खजाना को जमकर लूटते रहे । इस अवधि में भारत सरकार और बिहार सरकार ने बिना निबंधन के मुंगेर, भागलपुर, मुजफ्फपुर और अन्य जिलाबार संस्करणों को सरकारी विज्ञापन देने का सिलसिला जारी रखा और सरकार के खजाने को लूटने की ईजाजत दे दीं ।

रेस्पोन्डेन्ट मन्टू शर्मा ने अपने काउन्टर-ऐफिडेविट में सुप्रीम कोर्ट को बताया है कि -  ‘ दैनिक हिन्दुस्तान के अवैध भागलपुर और मुजफ्फरपुर संस्करणों के प्रकाशन और लगभग एक करोड़ पन्द्रह हजार 955 रूपए के  अनियमित भुगतान का भंडाफोड़  बिहार सरकार के वित्त । अंकेक्षण। विभाग के मुख्य लेखा नियंत्रक ने अंकेक्षण प्रतिवेदन संख्या- 195। 2005-06 में उजागर किया । 

मुख्य लेखा नियंत्रक ने अंकेक्षण प्रतिवेदन में लिखा कि- ‘ दैनिक हिन्दुस्तान  के भुगतान  से संबंधित  संचिका - विज्ञापन। लेखा। - 2-7।2004 और संचिका- विज्ञापन। लेखा। -42-4। 2003 के अवलोकन और आकस्मिक विपत्रों  की जांच से अंकेक्षण  से स्पष्ट  हुआ है कि - हिन्दुस्तान दैनिक को पटना के अतिरिक्त  मुजफ्फरपुर और भागलपुर मुद्रण-केन्द्रों  को ‘ स्वतंत्र- प्रकाशन‘ दिखाकर उनके विज्ञापन के लिए अलग-दर  पर वर्ष 2002-03  और वर्ष 2003-04  में  कुल एक करोड़ पन्द्रह हजार नौ सौ पचपन रूपया का अवैध  भुगतान किया गया । ‘‘

संचिका से स्पष्ट  है कि भागलपुर और मुजफ्फरपुर कोई स्वतंत्र  प्रकाशन या संस्करण नहीं है, वरन् पटना संस्करण का केवल मुद्रण केन्द्र है और इनके लिए अलग से कोई पंजीयन आर0एन0आई0  से नहीं प्राप्त था । पटना संस्करण की पंजीयन संख्या- 44348। 1986 ।पटना। ही उनका पंजीयन के रूप में अंकित था ।

अभियुक्तों ने जालसाजी  और धोखाधड़ी क्यों कीं  ? सुप्रीम कोर्ट  को रेस्पोन्डेन्ट नं0-02 मन्टू शर्मा ने अपने काउन्टर-ऐफिडेविट  में बताया है कि  भारत सरकार के सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय के विज्ञापन  और दृष्य प्रचार निदेशालय । डी0ए0वी0पी0। नई दिल्ली  और बिहार सरकार के सूचना एवं जनसम्पर्क विभाग।पटना।  की विज्ञापन-नीति है कि प्रेस-रजिस्ट्र्ार।  नई दिल्ली।  से निबंधित समाचार-पत्र को ही सरकारी विज्ञापन दिया जाता है । प्रेस एण्ड रजिस्ट्र्ेशन आफ बुक्स एक्ट, 1867  के तहत प्रेस-रजिस्ट्र्ार । नई दिल्ली। से   अखबार का  निबंधन कानूनी बाध्यता है ।

डी0ए0वी0पी0। भारत सरकार । की विज्ञापन -नीति रही है कि प्रेस-रजिस्ट्र्ार से निबंधित समाचार-पत्र  जब तीन वर्ष नियमित प्रकाशन पूरा कर लेता है,तो उस समाचार-पत्र को विभाग विज्ञापन-सूची में शामिल करता है और विभाग उस अखबार के लिए विज्ञापन-दर भी निर्धारित करता है । डी0ए0वी0पी0 के विज्ञापन-दर  पर ही बिहार सरकार का सूचना एवं जनसम्पर्क विभाग । पटना ।  राज्य सरकार की विज्ञापन-सूची में उस समाचार-पत्र को शामिल करता है और उस समाचार -पत्र को सरकारी विज्ञापन जारी करता है ।

परन्तु, भारत सरकार और बिहार सरकार ने दैनिक हिन्दुस्तान के बिना निबंधनवाले  अवैध भागलपुर और मुजफ्फरपुर  संस्करणों  को वर्ष 2001 से 30 जून ,2011 तक सरकारी-विज्ञापन देने और सरकारी खजाना लूटने की इजाजत दे दीं । 

सुप्रीम कोर्ट को रेस्पोन्डेन्ट नं0-02 मन्टू शर्मा ने लिखित रूप में आगे  बताया है कि - ‘‘ जब बिहार सकरार ने वित्त अंकेक्षण प्रतिवेदन - 195। 2005-06 के आलोक में राज्य सरकार के महाधिवक्ता से कानूनी-सलाह मांगी,तो तात्कालीक महाधिवक्ता  ने हिन्दुस्तान  अखबार के विरूद्ध कानूनी काररवाई न करने और अवैध संस्करण  के कारण सरकारी खजाने से लगभग एक करोड़ के अनियमित भुगतान की वसूली भी न करने की सिफारिश राज्य सरकार से  कर दी जिससे अभियुक्तों का मनोवल बढ़ गया और अभियुक्तों की ओर से अवैध जिलाबार संस्करणों के प्रकाशन और अवैध जिला-बार संस्करणों में अवैध ढंग से केन्द्र औेर राज्य सरकारों के विज्ञापन छापने और सरकारी खजानों  की लूट का सिलसिला वर्षों-वर्ष तक जारी रहा ।

रेसपोन्डेन्ट नं0-02 मन्टू शर्मा ने अपने काउन्टर-ऐफिडेविट में दैनिक हिन्दुस्तान अखबार के अवैध संस्करण और लगभग एक करोड़ के विज्ञापन मद में हुए अनियमित भुगतान की वसूली को रोकने के मामले में पूर्व महाधिवक्ता  की भूमिका की भी जांच कराने की प्रार्थना सुप्रीम कोर्ट से लिखित रूप में की है ।

सभी नामजद अभ्यिुक्तों के विरूद्ध प्रथम दृष्टया आरोप सत्य  प्रमाणित: मुंगेर के पुलिस उपाधीक्षक ऐ0के0 पंचालर और पुलिस अधीक्षक पी0 कन्नन  की सुपरविजन रिपोर्ट नं0-01 और नं0-02 जारी हो चुकी है । दोनों वरीय पुलिस पदाधिकारियों ने अपनी-अपनी सुपरविजन रिपोर्टों में लिखा है कि -  अनुसंधान और पर्यवेक्षण तथा उपलब्ध दस्तावेजी -साक्ष्यों से यह प्रमाणित होता है कि  मुंगेर कोतवाली कांड संख्या- 445। वर्ष 2011 के सभी नामजद अभियुक्तों, जिसमें अभियुक्त शोभना भरतिया, शशि शेखर, अक्कू श्रीवास्तव, बिनोद बंधु और अमित चोपड़ा शामिल हैं ,  के विरूद्ध भारतीय दंड संहिता की धाराएं 420।471। 476 और प्रेस एण्ड रजिस्ट्र्ेशन आफ बुक्स् एक्ट, 1867 की धाराएं 8।बी।, 14 और 15 के तहत आरोप ‘प्रथम दृष्टया सत्य‘ हैं । मुंगेर के डी0एम0 कुलदीप नारायण ने पटना उच्च न्यायालय को जो जांच रिपोर्ट सौंपी थीं, उन्होंने मुंगेर के डी0एस0पी0 और एस0पी0 की सुपरविजन रिपोर्ट नं0- 01 और 02 की प्रतियां भी भेज दी थीं 

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