मीडियामोरचा

____________________________________पत्रकारिता के जनसरोकार

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तब विरोधस्वरूप एक्रेडिटेशन कार्ड भी सरकार को लौटा देते थे पत्रकार

सुरेन्द्र किशोर/ हम पत्रकार गण अपने बारे में कम ही लिखते हैं। बल्कि न के बराबर। आज थोडा़ अपनी बिरादरी के बारे में भी लिख देता हूं। इस बहाने कुछ बड़े व सम्मानित पत्रकारों की हमें याद भी आ जाएगी। इनमें से कई अब इस दुनिया में नहीं रहे।

1982 में जब तत्कालीन मुख्य मंत्री डा.जगन्नाथ मिश्र ने पत्रकारों की स्वतंत्रता का गला घांेटने के लिए बिहार प्रेस बिल को राज्य की विधायिका से पास करवा दिया तो विरोधस्वरूप जर्नलिस्ट एक्शन कमेटी ने राज्य सरकार द्वारा प्रदत्त एक्रेडिटेशन कार्ड यानी मान्यता पत्र सरकार को लौटा देने का निर्णय कर लिया। साथ ही पत्रकार आंदोलनरत तो थे ही। यह और बात है कि देश भर के मीडिया और जनता के दबाव के कारण बाद में मिश्र सरकार को पे्रस बिल वापस लेना पड़ा था।

याद रहे कि उन दिनों पत्रकारों के आंदोलन का नेतृत्व इंडियन नेशन के संपादक दीनानाथ झा कर रहे थे। पत्रकारों के बीच व समाज में भी झा जी का बड़ा सम्मान था। पर 17 अगस्त, 1982 को अनेक पत्रकारों ने राज्य सरकार के जन संपर्क निदेशक जगतानंद झा को कार्ड वापस कर दिए। 

जिन पत्रकारों ने वापस किए,उनके नाम इस प्रकार हैं-

जनक सिंह-टाइम्स ऑफ़ इंडिया।

एस.पी.सागर-आनंद बाजार पत्रिका।

पी.के.कृपाकरण-इंडियन एक्सप्रेस।


अम्बिकानंद सहाय- स्टेट्समैन।
आर.नारायण- इकोनोमिक टाइम्स। 
फरजंद अहमद- इंडिया टूडे।
कृष्ण मुरारी किशन- प्रेस फोटोग्राफर।
अवध किशोर झा,
शरद चंद्र मिश्र
और टी अम्बरीष-आर्यावर्त।
भूपेन्द्र सहाय,
दीनानाथ सिंह,
दुर्गानाथ झा,
मिथिलेश मोइत्रा,
विक्रम कुमार-इंडियन नेशन।
नर्मदेश्वर सिन्हा,
मुक्ता किशोर सिन्हा,
सत्यनारायण लाल-सर्चलाइट।
रामजी सिंह,
राधिका रमण सिंह बालन,
परशुराम शर्मा,
भुवनेश्वर प्रसाद सिंह -प्रदीप।
पारसनाथ सिंह,
सुरेन्द्र किशोर,
ज्ञान वर्धन मिश्र- दैनिक आज।
शिव नारायण सिंह-जनशक्ति।
डी.एन.झा-यू.एन.आई.।
देवीदास गुप्ता-पी.टी.आई.।
अयोध्या प्रसाद केसरी-हिन्दुस्तान समाचार।

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