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____________________________________पत्रकारिता के जनसरोकार

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तो सरकार प्रेस क्लब को अपने अधीन ही कर ले!

संजय वर्मा/ पटना प्रेस क्लब की सदस्यता प्राप्त करना है, वो कहेंगे ज्ञानेश्वर जी बो कहेंगे सुभाष पांडे जी, बो कहेंगे अरुण अशेष जी से मिल लीजिये। मतलब जो सदस्य बनना चाहते उन्हें फुटबॉल की तरह पासिंग थ्रो का सामना करना पड़ रहा. पत्रकार ही पत्रकार को औकात बता दे रहे है जो प्रेस क्लब पर काविज हैं बो राजा। जिनको महज सदस्य बनना है बे कटोरा लेके भीख मांग रहे। एक अन्य प्रशांत झा कहते हैं नियम कानून है संस्था का रजिस्ट्रेशन सोसाइटी एक्ट। 1860 से है। पत्रिका पोर्टल, छोटे मंझोले अखवारों यहां तक कि मान्यता प्राप्त पत्रकारों को भी सदस्य नही बनाएंगे जो लीडिंग अखवार है जिनके पत्रकार फॉर्म 16 समर्पित करेंगे बे ही सदस्य होंगे तो कोषाध्यक्ष अनवर मियां प्रेस क्लब की आड़ में हो रहे चक्कलस का विरोध करने और जांच करबाने बाले पत्रकार श्यामनाथ श्याम को सीधे जान मारने की धमकी ही दे देते है। मतलब दुल्हन बही जो पिया मन भाये के तर्ज पर खास की दुकान चलते रहे । इसका क्या मतलब आप निकाले एक बात जो कमिटी सदस्य्ता या चुनाव अभियान कैसे चलाएंगे जो खुद विवादित है और सरकार की जांच के जद में जब अधिकांश पत्रकार इसकी सदस्य्ता से एक साजिश के तहत बंचित रहेंगे तो बेहतर है कि सरकार क्लब को अपने अधीन ही कर ले ताकि मठाधीशों की मठाधीशी चक्कलस पर विराम लगे.

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